विनेश पर भारी पड़ गई उनकी ये मजबूरी! कहीं बृजभूषण सिंह तो नहीं इस पूरी कहानी की जड़? कैटेगरी से जुड़ा है मामला

Why Vinesh Phogat changed category: इस वक्त हर तरफ सिर्फ विनेश फोगाट की ही चर्चा हो रही है। पेरिस ओलंपिक में 100 ग्राम वजन ज्यादा मिलने पर उन्हें फाइनल के लिए डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। वे ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई थीं। मगर फिर लाखों देशवासियों का दिल टूट गया, जब वे प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गईं।

क्यों 53 से 50 Kg कैटेगरी में आईं विनेश?
विनेश फोगाट वैसे तो 53 किलो की कैगेटरी में खेल रही थीं। मगर वे बाहर 50 किलोग्राम की कैटेगरी में हुई हैं। ऐसे में तमाम लोगों के मन में ये सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर वे 53 वाली कैटेगरी से 50 में क्यों आ गईं? चलिये बात करते हैं इस मुद्दे पर...

Vinesh Phogat

विनेश के लिए आसां नहीं था ये सफर
विनेश फोगाट के लिए ओलंपिक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। जब विनेश 22 साल की थीं तो 48 किलोग्राम की कैटेगरी में लड़ती थीं और जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, उम्र बढ़ने के साथ इस वजन को कंट्रोल कर पाना काफी मुश्किल होता चला गया। अब विनेश 53 किलोग्राम वाली कैटेगरी में लड़ रही थीं। विनेश फोगाट की उम्र 29 साल है।

जब डैमेज हुआ विनेश का लीगामेंट
अगर बात करें 53 किलोग्राम वाली कैटेगरी की, तो विनेश फोगाट उस कैटेगरी के हिसाब से अपना वजन वैसे ही कम कर चुकी थीं। वहीं बीते दिनों बृजभूषण सिंह के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के चलते विनेश की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ा था। उन्हें काफी चोटें भी आईं, और उनका लीगामेंट तक डैमेज हो गया था। कमजोर पड़ने की वजह से कुश्ती से वे दूर जाती रहीं। खासकर ओलंपिक से।

अंतिम पंघाल की वजह से बंधी आस
अब यहां होती है अंतिम पंघाल की एंट्री, जिन्होंने साल 2023 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ड मेडल जीता। इसके बाद भारत के लिए पेरिस ओलंपिक के रास्ते खुल गए। इसके बाद फोगाट कुछ असमंजस की स्थिति में थी। मगर तब भारत में कुश्ती का संचालन कर रही एड-हॉक कमेटी ने उनसे वादा किया था कि उनका 53 किलोग्राम के लिए ट्रायल होगा। लेकिन इससे पहले ही रेसलिंग फेडरेशन के चुनाव और संजय सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद सब कुछ बदल गया।

कब बढ़ीं विनेश की परेशानियां?
Wrestling Federation Of India के नए अध्यक्ष के बनने के बाद भी काफी हद तक दिक्कतें बढ़ती चली गईं। जैसा कि हमने बताया इससे पहले WFI की अस्थाई समिति ने उन्हें 53 किलो की कैटेगरी का आश्वासन दिया। मगर बाद में विनेश को भी समझ आ गया कि उन्हें 53 किलोग्राम वाली कैटेगरी पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके बाद जब समिति का नया अध्यक्ष बना तो विनेश की परेशानियां बढ़ती चली गईं। विनेश के पास दो ऑप्शन थे, या तो वे 57 किलोग्राम में खेलें, या फिर 50 किलोग्राम वाली कैटेगरी में।

कहीं बृजभूषण सिंह तो नहीं वजह?
50 किलोग्राम वाली कैटेगरी की बात की जाए तो विनेश ने आखिरी बार इस कैटेगरी में साल 2018 में खेला था। तब विनेश की उम्र 23 साल थी। उम्र बढ़ने के साथ वजन को नियंत्रित कर पाना किसी के लिए भी मुश्किल हो जाता है। अब 50 किलोग्राम की कैटेगरी में देश को मेडल दिलाने के लिए विनेश की टीम ने उनपर खूब मेहनत की। टीम ने उनसे जॉगिंग, स्किपिंग और साइकलिंग तक करवाई। मगर फिर भी 100 ग्राम वजन ज्यादा होने पर उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।

2022 में जीता ब्रॉन्ज मेडल
बताते चलें कि 53kg वाली कैटेगरी में आने के बाद साल 2019 में विनेश फोगाट ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद साल 2022 में भी फोगाट को ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसके बाद वे कुछ समय के लिए प्रोटेस्ट में उलझकर रह गईं। विनेश ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया। तब उनकी सेहत को भारी नुकसान हुआ था।

बीमार हुईं विनेश फोगाट
बताते चलें कि ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने के बाद विनेश का कम से कम रजत पदक तो पक्का ही लग रहा था मगर 100 ग्राम वजन ज्यादा पाए जाने के बाद विनेश को फाइनल के लिए डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। इसके बाद उनके शरीर में डिहाइड्रेशन भी हो गया था, जिसके चलते विनेश को भर्ती कराना पड़ा।

टूट गया देशवासियों का दिल
विनेश फोगाट के फाइनल से डिस्क्वालिफाई होने के बाद देशवासियों का दिल टूट गया। इससे पहले वे ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बन गई थीं। मगर इससे पहले कि वे आगे बढ़ पातीं, 100 ग्राम वजन ज्यादा होने के चलते उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।

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