क्यों हर बार दांव पर लगता है 'तिरंगा'?

मेरी जान तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है। याद है ये पंक्तियां। जी हां ''तिरंगा'' फिल्म की ये पंक्तियां गर्व का एहसास दिलाती हैं। लेकिन खुद को बाया सियासत बताने वाले कुछ लोग इस हद तक गिर चुके हैं कि कभी तिरंगे को केक का रूप देकर काटा जाता है, तो कभी उल्टे तिरंगे को सलामी दी जाती है। लेकिन हद तो तब हो गई जब रिकॉर्ड कायम करने की होड़ में तिरंगे का अपमान किया गया।

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Tricolour

रिकॉर्ड की आड़ में देश के सम्मान के साथ खिलवाड़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देश का कथित रूप से सबसे बड़े आकार का तिरंगा फहराया गया। जबकि बीते शनिवार की रात इस झंडे को क्षतिग्रस्त होने के बाद उतार लिया गया। हालांकि इससे पूर्व में भी झारखंड की राजधानी रांची में भी फहराया गया सबसे ऊंचा तिरंगा फट गया था। उसे बड़ी मुश्किल से उतारा गया था। रायपुर में 105 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा झंडा तेलीबांधा इलाके में फहराया गया।

ये कैसा राष्ट्र प्रेम?

झंडा रोहण करने के दूसरे ही दिन तिरंगे को लेकर उस समय विवाद शुरू हो गया, जब झंडे को रोशन रखने के लिए लगाई गई लाइट बंद हो गई। नियम ये है कि अगर रात में तिरंगा झंडा फहराया जाना है तो उस स्थान पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। दो सप्ताह बाद यह बात सामने आई कि रायपुर नगर निगम ने जो झंडा फहराया है, उसका आकार 105 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा नहीं, बल्कि 90 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तिरंगे को महज रिकॉर्ड के मद्देनजर फहराया गया था।

खुद भी सीखिए और दूसरों को भी सिखाईये

आम तौर पर कई बार ऐसी घटनाएं छिपी दबी रह जाती हैं लेकिन स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर बच्चे-बच्चे के हाथ में तिरंगा रहता है। लेकिन कार्यक्रम की समाप्ति के साथ ही कई बार तिरंगे कूड़े के ढ़ेर में भी देखने को मिलते हैं। वो भी तो तिरंगा ही है साहब। जरूरत है कि बच्चों को तिरंगे की अहमियत के बारे में सीख दी जाए।

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तमाम नियमों से रूबरू कराया जाए। लेकिन जितनी जरूरत इसकी बच्चों को है, उतनी ही बड़ों को भी। अगर वास्तव में इसी तरह आप हाथ में शान के साथ उठाने वाले तिरंगे को महज दो मिनट लेकर खुद को सच्चा देशभक्त कहते हैं, और कुछ देर बाद तिरंगे की मर्यादा तार-तार करते हैं तो ये बात आपके लिए, हमारे लिए शर्मनाक है। राष्ट्र ध्वज है हमारा। जिसकी रक्षा के लिए न जाने कितने वीर अपनी आहुति दे चुके हैं।

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