आखिर क्यों संसद की नई बिल्डिंग की पड़ी आवश्यकता, जानिए संसद भवन का इतिहास

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश के नए संसद भवन का शिलान्यास करेंगे। नए संसद के निर्माण का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में हैं और कोर्ट ने सिर्फ इसकी आधारशिला रखने की इजाजत दी है। मोदी सरकार की ओर से कोर्ट को यह भरोसा दिया गया है कि जबतक सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं पर कोर्ट अपना फैसला नहीं दे देती है तबतक यहां निर्माण या किसी भी तरह की तोड़फोड़ का काम नहीं होगा। कोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए संसद भवन के निर्माण में किसी भी पेड़ को नहीं गिराया जाएगा।

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    20000 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट का हिस्सा

    20000 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट का हिस्सा

    बता दें कि संसद की नई बिल्डिंग का निर्माण सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जिसकी कुल लागत 20000 करोड़ रुपए है, उसी का हिस्सा है। संसद की नई बिल्डिंग के निर्माण में 971 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इस नई बिल्डिंग का निर्माण राजपथ से 3 किलोमीटर की के दायरे में बनेगा जहां राष्ट्रपति भवन और वॉर मेमोरियल इंडिया गेट है। आज संसद की नई बिल्डिंग की आधारशिला दोपहर 12.55 पर रखी जाएगी। भूमि पूजन का कार्यक्रम दोपहर 1 बजे होगा, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 2.15 बजे लोगों को संबोधित करेंगे।

    कई सांसदों ने जाहिर की इच्छा

    कई सांसदों ने जाहिर की इच्छा

    नई संसद भवन की बिल्डिंग के निर्माण को लेकर एक सवाल यह उठता है कि जब पहले से ही संसद भवन मौजूद है तो आखिरकार क्यों नई बिल्डिंग का निर्माण कराने की आवश्यकता आन पड़ी। दरअसल मौजूदा संसद भवन में जगह की कमी महसूस होने लगी थी। मौजूदा संसद भवन ब्रिटिश काल में बनवाया गया था, लेकिन साल दर साल संसद भवन में बढ़ते कामकाज और संसदीय काम को देखते हुए यह भवन जरूरत के हिसाब से छोटा महसूस होने लगा। संसद के कई सदस्यों ने भी मॉडर्न हाईटेक तकनीक से लैस बिल्डिंग के निर्माण की इच्छा जाहिर की थी।

    पुरानी बिल्डिंग की की मुश्किलें

    पुरानी बिल्डिंग की की मुश्किलें

    मौजूदा बिल्डिंग की अपनी सीमाएं हैं, जिसकी वजह से इसमे बदलाव नहीं किया जा सकता है और इसमे आधुनिक बदलाव वगैरह नहीं किए जा सकते हैं। मौजूदा बिल्डिंग में सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, भूकंपरोधी जैसे अहम सुरक्षा के मानकों की कमी है। यह बिल्डिंग 93 साल पुरानी है और इसमे बहुत अधिक बदलाव नहीं किया जा सकता है, जिसकी वजह से नई बिल्डिंग के निर्माण की जरूरत महसूस की गई। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी कहा था कि मौजूदा संसद भवन देश की पुरात्तव संपत्ति है, जिसे संरक्षित रखने की जरूरत है।

    मौजूदा संसद भवन का इतिहास

    मौजूदा संसद भवन का इतिहास

    मौजूदा संसद भव 18 जनवरी 1927 को हुआ था, इसे छह वर्ष के कार्यकाल में तैयार किया गया था। मौजूदा सर्कुलर बिल्डिंग में 144 सैंडस्टोन के कॉलम है, जिसे सर एडवर्ड लुटियंस ने डिजाइन किया था। लुटियंस ने ही हार्ट ऑफ दिल्ली को डिजाइन किया था। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने नई संसद की बिल्डिंग के निर्माण को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो सरकार इस प्रोजेक्ट में इतनी तेजी क्यों दिखा रही है। कोर्ट ने कहा था कि आप आधारशिला रख सकते हैं, आप पेपरवर्क कर सकते हैं, लेकिन किसी भी तरह का निर्माण या तोड़फोड़, पेड़ों को काटा नहीं जा सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार का विस्टा प्रोजेक्ट राजपथ से 3 किलोमीटर के दायरे में होगा।

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