मैगी पर बैन तो मैगी के प्रचार पर क्यों नहीं?
नई दिल्ली। इस समय पूरे देश में मैगी को लेकर बवाल मचा हुआ है। मैगी का प्रचार करने वालों को भी नोटिस भेजा गया है लेकिन बच्चों के टीवी चैनलों पर धड़ल्ले से मैगी का प्रचार आ रहा है। आखिर जब मैगी को राज्यों पर प्रतिबंधित किया जा रहा है तो फिर मैगी के एड पर शिकंजा क्यों नहीं है?
बच्चों के चैनल जैसे डिजनी, हंगामा पर कमर्शियल ब्रेक काफी लंबे-लंबे होते हैं जिनमें सबसे ज्यादा मैगी के ही एड होते हैं, ऐसे में बच्चों को मैगी से दूर रखने में मांओ को काफी मुश्किल हो रही है। इस कारण कई मांओं ने मीडिया से अपील की है कि जब तक मैगी पर मामला क्लीयर नहीं होता है तब तक चैनल्स पर मैगी का एड ना दिखाया जाये।
लखनऊ में रहने वाली रीता बाजपेई ने वनइंडिया से कहा कि मेरा बेटा ध्रुव पांच साल का है और वो दिन भर डोरेमॉन देखता है, जिसमें ब्रेक में केवल मैगी का एड आता है जिसे देखने के बाद वो लगातार मुझसे मैगी की मांग कर रहा है जो कि मैं उसे दे नहीं रही लेकिन उसे रोते देखकर मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। मुझे लगता है कि ऐसी समस्या से दो चार हर मां हो रही होगी, इसलिए मैं चाहती हूं कि तत्काल प्रभाव से एड्स पर रोक लगे। गौरतलब है कि मैगी के सेंपल में लेड पाया गया है जिसे खाना बेहद घातक है।













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