तीन राज्यों के सीएम चुनने में क्यों देर कर रही है भाजपा, क्या है प्लानिंग?
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला है। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी बीजेपी के आलाकमान ने अभी तक एक भी स्टेट के लिए मुख्यमंत्री पद के लिए किसी भी नाम का ऐलान नहीं किया है।
बताया जा रहा है कि, नई सरकारों के गठन को लेकर भाजपा नेतृत्व नए नेता के चुनाव के लिए तीनों राज्यों का व्यापक फीडबैक जुटा रहा है। इसी बीच एमपी के कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है।

दिल्ली में तीनों राज्यों के लिए मुख्यमंत्री के नामों को लेकर माथापच्ची चल रही है। मंगलवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर साढ़े चार घंटे तक बैठक चली। जिसमें तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों पर विचार किया गया। इस बैठक में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल थे।
माना जा रहा है कि, इस सप्ताह के आखिर तक तीनों राज्यों में नए नेताओं का चयन कर लिया जाएगा। पार्टी नेता के चयन में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाह रही है। इसके पीछे की वजह यह है कि, अगले साल लोकसभा के चुनाव हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी विभिन्न स्तरों से फीडबैक ले रही है। इसके बाद ही नए नेता का फैसला होगा।
दरअसल, पार्टी राज्य आगे की राजनीति के साथ लोकसभा के समीकरणों को भी ध्यान में रख रही है। वह नए नेतृत्व को उभारने और सामाजिक समीकरणों को भी पूरी तरह से संतुलित कर चलेगी। इसीलिए बीजेपी को ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए, जिसके जरिए राज्यों में पॉजिटिव संदेश जाए। जिसकी जाति के नाम पर पकड़ मजबूत हो। यहीं नहीं जिसके चुने जाने से दूसरी जातियों में विरोध की आवाजें ना उठें।
यहीं नहीं जिसे भी राज्य की कमान सौंपी जाए, वह सरकार-संगठन में सामंजस्य बैठाने में भी महारथी हो। जो मोदी सरकार की उपलब्धियों को आम जन तक पहुंचा सका। शीर्ष नेतृत्व के साथ भी उसका अच्छा सामंजस्य हो।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मध्य प्रदेश में बीजेपी यूपी वाला फॉर्मूला लागू कर सकती है। ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि, यूपी की तरह एमपी में भी एक सीएम और दो डिप्टी सीएम हो सकते हैं। तीन अहम पदों के जरिए बीजेपी, एमपी में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी। जो उसे लोकसभा चुनावों में फायदा पहुंचा सकें।
यहां निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं ही, केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं।
अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां, आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग होती रही है। ऐसे में बीजेपी आगामी चुनावों को देखते हुए किसी ऐसे चेहरों उतार सकती है। रमन सिंह यहां तीन पर सीएम रह चुके हैं, लेकिन उनके अलावा आदिवासी नेता विष्णुदेव साय और अरुण साव के नाम भी रेस में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री के नाम को लेकर, तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा कहीं हलचल राजस्थान में है। यहां सीएम के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। वसुंधरा राजे लगातार विधायकों से मिल रही हैं। वह लगातार शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं। खबर है कि, वसुंधरा राजे ने 68 विधायकों से बात की है, और 28 विधायकों से मुलाकात की है।
इसके इतर पार्टी हाई कमान ने गजेंद्र सिंह शेखावत और बाबा बालकनाथ योगी को चुनाव के नतीजों के बाद दिल्ली बुलाया था। इसके साथ ही अटकलें ये शुरु हो गईं कि गजेंद्र सिंह शेखावत और बालकनाथ योगी में से भी कोई सीएम बन सकता है। हालांकि सस्पेंस अभी भी बरकरार है।












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