OPINION: दिल्ली की सियासत में 'आप' की सरकार ही लोकप्रिय क्यों ?
OPINION: पिछले एक दशक से दिल्ली की राजनीति की धुरी बन चुकी आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) पर देश और दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। तीन चुनावों से आम आदमी पार्टी दिल्ली की सियासत पर हावी है। 2012 में बनी पार्टी आख़िर इतनी जल्दी कैसे देश की राष्ट्रीय पार्टी बन गई। ऐसे कई सवाल हैं और इन सवालों के बीच कई रोचक कहानियां भी हैं। यहां उन तमाम बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है जिसके बल पर 'आप' सरकार ने देश के बड़े राजनीतिज्ञ से लेकर नीति निर्माताओं के बीच एक चर्चा को जन्म दिया।
सुर्खियां बटोर रहीं दिल्ली शिक्षा Model
अक्सर, सरकारी स्कूल अपने ख़राब बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर के लिए जाने जाते हैं। मगर दिल्ली के सरकारी स्कूलों की जमकर तारीफ़ हो रही है। कहा जा रहा है कि ये स्कूल प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं। और तारीफ़ करने वाले लोगों में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी जैसे लोग भी शामिल हैं। वर्ष 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने दिल्ली के एक सरकारी स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल में हैप्पीनेस क्लास में भी हिस्सा लिया। इसके बाद दिल्ली के शिक्षा मॉडल ने अतरराष्ट्रीय मंच पर खूब सुर्खियां बटोरीं थी। वो तमाम सुविधाएं जो एक Model स्कूल में होनी चाहिए उनपर सूक्ष्मता से ध्यान दिया गया। बड़े बिल्डिंग, आधुनिक क्लासरुम, लाइब्रेरी, प्ले ग्राउंड, और शौचालयों के निर्माण करवाए गए। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने कहा था अभी इसमें बहुत सुधार किया जाना है।

ये भी सच है कि बीते सालों में सरकारी स्कूलों का पासिंग रेट प्राइवेट स्कूलों की तुलना में बेहतर रहा है। यह आंकड़ा 2020 में 94 फीसदी था। आप सरकार ने स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या को भी काफी हद तक दूर करने का प्रयास किया। आप का कहना है कि पहले स्कूलों से ये कहा गया था कि वे फेल हो जाने वाले बच्चों को दोबारा मौका न दें। ये नीति आठवीं क्लास तक के बच्चों के लिए लागू थी। लेकिन ये नीति ख़त्म कर दी गई। आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार ने शिक्षा पर तीन गुना ज्यादा खर्च किया। दिल्ली की तत्कालीन शिक्षा मंत्री आतिशी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि अरविंद केजरीवाल सरकार देश में एकमात्र सरकार है जो अपने बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है। मार्च 2024 में शिक्षा के लिए 16 हजार 396 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान पेश किया गया। इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों में भी ध्यान दिया गया।
प्राथमिक स्वास्थ्य में मोहल्ला क्लीनिक का केंद्रीय भूमिका
दिल्ली सरकार की महात्वाकांक्षी 'मोहल्ला क्लीनिक' ने प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया माडल दिया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के वर्ष 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 500 मोहल्ला क्लीनिकों की ओपीडी में हर माह करीब 8 लाख 22 हजार मरीजों के उपचार होते हैं। उन मरीज को निशुल्क जांच, दवाईयां एवं अन्य मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस लिहाज से एक मोहल्ला क्लीनिक में प्रतिदिन 54 से 55 मरीज व 500 मोहल्ला क्लीनिक में प्रतिदिन करीब 27,400 मरीजों का उपचार किया जाता है। इसके अलावा इन मोहल्ला क्लीनिक में 212 तरह की निशुल्क जांच की सुविधाएं उपलब्ध है।
शिपिंग कंटेनर में संचालित अस्पताल आम लोगों के जीवन का आधार बन चुका है। इसे मात्र 350 वर्ग फुट एरिया में बनाया गया है। यह दिखने में तो छोटा है लेकिन इसे बहुत अच्छे तरीके से डिजाइन किया गया है। डाक्टर के बैठने की व्यवस्था से लेकर फार्मेसी व जांच के सैंपल लेने के इंतजान किए गए हैं। साथ ही शौचालय सविधा का भी ध्यान रखा गया है।
क्या लाभ मिला मरीजों को?
इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी अन्य जांच जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन की सुविधा मुफ्त उपलब्ध करवाई जाती है। साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ की थी। कोफी अन्नान ने अपने पत्र में कहा था कि आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली ही नहीं बल्कि हिंदुस्तान के हेल्थ सिस्टम में अभूतपूर्व सुधार की शुरुआत है। विश्व के मशहूर मेडिकल जर्नल 'लांसेंट' में भी मोहल्ला क्लीनिक की सराहना की गई थी। अभी दिल्ली में करीब 530 मोहल्ला क्लीनिक संचालित हैं।
मुफ्त बिजली और पानी का आर्थिक रुप से कमजोर उपभोक्ताओं ने लाभ उठाया
राजधानी दिल्ली में मुफ्त बिजली और पानी (एक निश्चित सीमा तक) निम्न और मध्यम परिवारों के आर्थिक स्वाबलंबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सामान्य जन को ऐसा महसूस हो रहा है कि उसके लिए गारजियन बिजली और पानी का बिल चुका रहा है जिससे लोगों का आम आदमी पार्टी पर विश्वास बढ़ा है।
बीते महीने दिल्ली सरकार ने दिल्ली सोलर पोर्टल लांच किया। इसके ज़रिए राजधानी में लोग अब दिल्ली सोलर पॉलिसी का लाभ उठा सकेंगे और 400 यूनिट से ज़्यादा बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं का बिल भी जीरो आएगा।
फ्री बस सेवा से महिलाओं का आर्थिक स्वाबलंबन
फ्री बस सेवा महिलाओं के आर्थिक स्वाबलंबन की दिशा में कारगर उपलब्धि है। सामान्य परिवार की महिलाएं जो आर्थिक भारी किराया के डर से कार्य से वंचित थीं, आज वे घर से निकलकर पुरुषों के साथ आर्थिक रुप से कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी है। जिससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है साथ ही आम लोगों के पारिवारिक आय में वृद्धि हुई है। जो आप सरकार के दूरदर्शी सोच का परिणाम है। एक अनुमान के मुताबिक फ्री बस से सालाना 1.24 लाख रुपये तक बच सकते हैं। जानकारी के मुताबिक पांच साल में 150 करोड़ पिंक टिकट बिके हैं। दस रुपये पिंक टिकट के हिसाब से दिल्ली सरकार ने 1500 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। यह सब्सिडी महिलाओं के घर में सीधे बचत के तौर पर निश्चित रूप से पहुंची है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली गैर-सरकारी संगठन ग्रीन पीस के सर्वे के मुताबिक 75 फीसदी महिलाओं का मानना है कि परिवहन पर उनका मासिक खर्च कम हुआ है।
मोहल्ला बसों का परिचालन शुरू किया गया
मोहल्ला बस महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली सरकार की महत्वपूर्ण सोच है, जो महिलाओं के आत्मविश्वास को बल दिया है। जिसका मुख्य उद्देश्य पूर्व में महिलाओं के साथ घटित घटनाओं को दोहराने से रोकना है।
इस प्रकार दशकों से दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी का वर्चस्व आम लोगों के लिए दूरदर्शी योजनाओं का परिणाम है। देखना यह है कि आप सरकार अपने सियासी वर्चस्व को बचाए रखने में कहां तक सफल होती है?












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