आखिर कांग्रेस को अचानक भगवा क्यों भाने लगा है ?
Why does the Congress suddenly find saffron good? knowकांग्रेस महासचिव सोनिया गांधी ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर भगवा को लेकर किया बयान में कांग्रेस का भगवा को लेकर बदला हुआ रुप नजर आ रहा है। आइए जानते हैं क्या कारण
बेंगलुरु। भगवा राजनीति पर कांग्रेस कुछ बदली हुई नजर आ रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के वस्त्र धारण किए हैं, भगवा धारण किया है, मगर ये भगवा आपका नहीं है। ये भगवा हिन्दुस्तान की धार्मिक, आध्यात्मिक परंपरा का है। हिंदू धर्म का चिह्न है। उस धर्म को धारण करिए. उस धर्म में रंज, हिंसा और बदले की भावना की कोई जगह नहीं हैं।

मुख्यमंत्री पर किए गए इस बयान पर प्रियंका गांधी घिरने लगी तो उनके बचाव में कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रियंका गांधी के बयान को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। 'प्रियंका गांधी ने भगवा के प्रति आदर का भाव व्यक्त किया था। उन्होंने भगवा को आस्था का प्रतीक बताया है। उन्होंने सफाई दी कि प्रियंका गांधी ने हिन्दुत्व का गुणगान करते हुए कहा था कि हिन्दुत्व करुणा, ममता और क्षमा सिखाता है। उन्होंने भगवा का अपमान नहीं किया, बल्कि कहा कि सीएम योगी भगवा पहनते हैं, इसलिए उन्हें उसका मान और सम्मान रखना चाहिए।

प्रियंका को भगवा राजनीति में दिखायी देने लगा है गांधीवादी सिद्धांत
प्रियंका गांधी ने जो बयान दिया उससे साफ है कि कांग्रेस ने भगवा पॉलिटिक्स पर यू-टर्न ले लिया है। वह यूपी सीएम योगी पर निशाना साधते हुए भाजपा को कठघरे में खड़ा करना चाहती है। यह बयान प्रियंका गांधी का भगवा राजनीति को लेकर नया राजीतिक स्टंट हैं। कभी भगवा रंग में आतंकवाद की परछाई देखने वाली कांग्रेस को अचानक भगवा में सत्य, अहिंसा का गांधीवादी सिद्धांत दिखायी देने लगा हैं। प्रियंका गांधी ने अब भगवा राजनीति में अहिंसा की भावना की खोज कर ली है।

कांग्रेस में इतने बड़े बदलाव की वजह क्या है ?
जबकि इससे पहले कांग्रेस को भगवा रंग में आतंकवाद का साया ही नजर आता रहा है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने यही थ्योरी दी थी। प्रियंका गांधी के इस बयान से ये साफ हो चुका है कि वर्तमान समय में भगवा को लेकर कांग्रेस के दो दृष्टिकोण है जिसमें पहला वह जिसमें साध्वी प्रज्ञा को लेकर कांग्रेस की भगवा रंग में आतंकवाद की परछायी वाली सोच और दूसरा वह कुछ प्रियंका गांधी ने योगी आदित्यनाथ के बारे में कहा है। कांग्रेस की महासचिव को भगवा को लेकर नया ज्ञान जो प्राप्त हुआ है ऐसे में साफ हो चुका है कि उन्हें कोई नए सलाहकार मिल गए हैं। बता दें यूपी पाॅलटिक्स में राहुल गांधी के लंबे समय तक कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ही सलाहकार रहे। अब ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस में इतने बड़े बदलाव की वजह क्या हैं?

यूपी विधानसभा चुनाव की कांग्रेस कर रही तैयारी
असल में यूपी सीएम योगी पर निशाना साध कर वह उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार कर रही हैं। सीएए के विरोध में यूपी में हुई हिंसा के दौरान कई जिलों में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने प्रदेश की राजधानी का रुख किया। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने पहले यूपी की पुलिस पर सीधा हमला कर दिया और उसके एक दिन बाद सीएम योगी पर भगवा टिप्पणी करके जनता को यह संदेश देने का प्रयास किया कि योगी संन्यासी होकर भगवा वस्त्र तो धारण कर लिया लेकिन वह उसकी अहमियत नहीं समझते।

राहुल गांधी भी कर चुके है ये गलती
प्रियंका गांधी जो वर्तमान समय में राजनीति कर रही है, वह उनके भाई राहुल गांधी से प्रभावित नजर आ रही है। आपको याद दिला दे पिछले वर्ष जैसे राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने गीता का संदर्भ देते हुए ये समझाने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदुत्व की ठीक-ठीक समझ नहीं है। जिसके बाद राहुल गांधी के इस बयान पर सुषमा स्वराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी कि अब हिंदुत्व के बारे में राहुल गांधी से सीखना होगा। ऐसे ही प्रियंका के भगवा वाले बयान पर भाजपा और यूपी सीएम कार्यालय द्वारा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और प्रियंका को कटघरे में खड़ा कर दिया। भविष्य में भी प्रियंका अगर अपने भाई कर तरह आगे भी बिना सोचे समझे बयान देती है तो उनकी चाल उलटी भी पड़ सकती हैं।

कांग्रेस की सॉफ्ट राजनीति हो गयी थी फेल
मालूम हो कि गुजरात विधान सभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने कर्नाटक राज्य में कई मठों और मंदिरों की यात्रा की। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव हुए तो राहुलगांधी शिव भक्त बन गए लेकिन जल्दी ही ये चोला उतर गया क्योंकि उनका पूरा ध्यान चौकीदार चोर है में लग गया। इतना ही नहीं चुनावों के दौरान राहुल गांधी जनेऊधारी हिंदू के रुप में दिखने लगे थे। हालांकि इन सभी रुपों को धारण करने के बावजूद कांग्रेस को कोई लाभ होता नहीं दिखा तो राहुल गांधी ने एक के बाद यह सब करना छोड़ दिया। राहुल गांधी की यह सो काल्ड सॉफ्ट राजनीति पूरी तरह असफल रही। इतना ही नहीं यूपी में राहुल गांधी के सलाहकार में दिग्विजय सिंह को विधानसभा चुनाव के दौरान भगवा में आतंक का रंग नजर आया जिसका खामियाजा उन्हें भोपाल जैसी महत्तवपूर्ण लोकसभा सीट गंवानी पड़ी।

कांग्रेस का ये हैं जोखिम भरा कदम
मालूम हो कि उस समय भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव मैदान में उनके खिलाफ खड़ा किया था। जिसमें प्रज्ञा ने जीत हासिल कर कांग्रेस को करारा जवाब दिया। कांग्रेस अब हार्डकोर हिंदुत्व के अंदर घुसकर वोटबैंक साधने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस भापजा के भगवा अपनाने को लेकर नए तरीके से सवाल खड़े कर रही है। पहले भाजपा पर भगवा आतंकवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा अब भगवा अहिंसा की बात करके इस बात को आगे बढ़ा कर यूपी की जनता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं। यह तो आने वाला समय बताएगा कि प्रियंका का यह पैतरा कांग्रेस के कितना हित करवाएगा लेकिन यह बात तो साफ है कि कांग्रेस ने जो ये कदम बढ़ाया है वह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है।
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