तेलंगाना की लड़ाई KCR दिल्ली क्यों लाए ? धान खरीद पर संग्राम के पीछे का पूरा खेल समझिए
नई दिल्ली, 11 अप्रैल: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने सोमवार से दिल्ली में 'महा धरना' शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार राज्य से सारा धान खरीदे। उनकी सरकार केंद्र सरकार से यह लिखित भरोसा भी चाहती है कि केंद्र सरकार यह बताए कि हर खरीफ मौसम के बाद वह तेलंगाना से कितनी मात्रा में धान खरीदेगी। उसके मुताबिक इससे प्रदेश में खेती का पैटर्न तैयार करने में सहायता मिलेगी। लेकिन, इस धान पर धरने के पीछे तेलंगाना की राजनीति का बहुत बड़ा रोल है।

तेलंगाना में धान खरीद पर दिल्ली में संग्राम
तेलंगाना में सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति और भारतीय जनता पार्टी का संघर्ष अब दिल्ली पहुंच चुका है। राजधानी के तेलंगाना भवन में मुख्यमंत्री केसीआर का साथ देने के लिए उनकी पार्टी के कई नेता और समर्थक शामिल हुए हैं। नवंबर में किसान आंदोलन खत्म होने के बाद से खाली बैठे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने में देरी नहीं की है। टिकैत की मानें तो वह तेलंगाना सरकार के इस धरने में इसलिए शामिल हो रहे हैं, क्योंकि वह केंद्र सरकार की धान खरीद में कथित भेदभाव वाली नीति के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। लेकिन, तेलंगाना की यह लड़ाई दिल्ली लाने का केसीआर का मकसद इतना साफ नहीं है, जितना कि दिख रहा है। इसके पीछे की कहानी कहीं ज्यादा राजनीतिक है। टीआरएस की एमएलसी और मुख्यमंत्री की बेटी के कविता ने धान के नाम पर पार्टी के संग्राम के बारे में कहा है, 'हम केंद्र की प्रतिशोधी और भेदभाव वाली धान खरीद नीति को उजागर करना चाहते हैं।' उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि चाहे वह कितनी भी उदासीनता दिखाए, टीआरएस की सरकार तेलंगाना के किसानों के हितों की रक्षा करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीति राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा है और इसके खिलाफ उनकी पार्टी लड़ेगी।

टीआरएस चाहती है कि केंद्र किसानों का सारा धान खरीदे
असल में तेलंगाना में हुआ ये है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, रायथु बंधु कल्याण योजना सफल है और बिजली की बेरोक-टोक सप्लाई की वजह से किसानों ने धान की बंपर पैदावार कर ली है। लेकिन, सप्लाई की तुलना में मांग नहीं है। सीएम केसीआर को इस बात का पहले से ही अंदाजा था, इसलिए उन्होंने किसानों से कहा भी था कि वह वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान दें। टीआरएस के नेताओं का आरोप है कि बीजेपी नेताओं ने ही किसानों को धान की रोपाई के लिए उकसाया और भरोसा दिया कि केंद्र इसकी खरीद करेगा। राज्य के कृषि मंत्री एस निरंजन रेड्डी के मुताबिक, 'अब वे कुछ भी नहीं बोल रहे हैं, सारा धान खरीदने के बारे में अपने वादे को लेकर एक भी शब्द नहीं बोल रहे हैं।' दावे के मुताबिक केंद्र ने 65 लाख टन खरीदने का वादा किया था, जिसमें से सिर्फ 45 लाख टन की ही खरीद की गई है। लेकिन, राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र पूरा ही स्टॉक यानी लगभग 75 लाख टन धान की खरीद करे। जबकि, केंद्र का कहना है कि उसके पास पर्याप्त स्टॉक है।

इस मामले में पहले क्या हुआ ?
टीआरएस नेताओं का दावा है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के जरिए पिछले खरीफ सीजन में केंद्र सरकार ने पंजाब से 186.86 अनाज खरीदा था,जबकि तेलंगाना के किसानों से सिर्फ 70.26 लाख टन। रेड्डी ने आरोप लगाया कि 'यह हमारे किसानों के साथ भेदभाव और उनके प्रति उदासीनता है, जिसे हम उजागर करना चाहते हैं। इससे लाखों किसान प्रभावित होते हैं।' पिछले साल ही मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर शिकायत की थी कि एफसीआई की कुछ नीतियां राज्य में खेती के पैटर्न की योजना बनाने में उलझनें और परेशानियां पैदा करती हैं। तेलंगाना चाहता है कि एफसीआई पूरे साल के लिए खरीद का टारगेट एक ही बार में बता दे, ताकि सरकार उसी तरह से बुआई का पैटर्न बनाए और किसानों को भी उससे अवगत करा दे। लेकिन, टीआरएस का आरोप है कि केंद्र से कोई जवाब नहीं मिला। टीआरएस को केंद्री की बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन, परिणाम सरकार के पक्ष में आने के बाद उसने नए सिरे से रणनीति तैयार करके दिल्ली में धरना शुरू किया है। इससे पहले वह गैर-बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर चुके हैं।

तेलंगाना की लड़ाई केसीआर दिल्ली क्यों लाए ?
असल में तेलंगाना राष्ट्र समिति जिस कदर दिल्ली आकर धान खरीद के नाम पर राजनीतिक संग्राम करना चाह रही है, उसके पीछे तेलंगाना में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए बीजेपी की कोशिशें हैं। तेलंगाना में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा हैदराबाद नगर निगम चुनाव के पहले से ही दक्षिण भारत के इस राज्य में अपने लिए काफी उम्मीदें पाल रही है। पार्टी के इन उम्मीदों को मजबूत करने में करीमनगर से पार्टी सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंदी संजय कुमार भी हैं, जिनके साथ टीआरएस कार्यकर्ताओं का आमना-सामना होना आए दिन की बात हो चुकी है। पिछले साल भाजपा ने जिस तरह से हुजूराबाद विधानसभा उपचुनाव में टीआरएस को जोर का झटका दिया है, उसने सत्ताधारी पार्टी को और भी असहज कर दिया है। बस राज्य में बीजेपी की बढ़त की रफ्तार रोकने के लिए ही अब मुख्यमंत्री केसीआर प्रदेश के किसानों के प्रति पार्टी की कथित उदासीन को उजागर करने में जुट गए हैं और इसकी आवाज वह दिल्ली से उठाना चाहते हैं।












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