गुजरात में बीजेपी ने इतनी बड़ी 'फ़ौज' क्यों उतारी?
गुजरात में विधानसभा चुनाव की तारीख़ जैसे-जैसे नज़दीक आती जा रही है, सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी अपने हर बड़े नेता को चुनावी मैदान में उतार रही है.
इनमें केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, उमा भारती, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के नाम शामिल हैं.
रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य समन्वयक बनाया है.
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'हार का डर'
समाजशास्त्री शिव विश्वनाथन कहते हैं, ''भारतीय जनता पार्टी चुनाव प्रचार के लिए कई मंत्रियों को गुजरात भेज रही है. इसकी वजह ये है कि उन्हें हार का डर सता रहा है. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी यदि अच्छे से नहीं जीती तो भी ये उसके लिए हार की तरह होगा.''
लेकिन भारतीय जनता का अपना तर्क है. पार्टी के मीडिया सेल की कमान संभाल रहे डॉक्टर हर्षद पटेल कहते हैं, ''जो केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री गुजरात आ रहे हैं, वो पार्टी के कार्यकर्ता भी तो हैं. किसी भी राज्य में चुनाव होता है तो चुनाव प्रचार के लिए केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जाते ही हैं.''
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इसके विपरीत वरिष्ठ पत्रकार अजय उमठ का मानना है, ''गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए इतने केंद्रीय मंत्री इससे पहले तो कभी नहीं आए थे. साल 2007 के विधानसभा चुनाव में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चुनाव प्रचार के लिए गुजरात आए थे, तब विपक्ष ने उनका मज़ाक उड़ाया था.''
अजय उमठ कहते हैं, ''तब ये कहा गया था कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस को प्रधानमंत्री को मैदान में उतारना पड़ा.''
गुजरात में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक के बाद एक लगातार कई रैलियां कर रहे हैं. ऐसा भी देखने में आया है कि राहुल गांधी ने किसी रैली में भारतीय जनता पार्टी पर कोई आरोप लगाया और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने उसी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन पर पलटवार किया.
गुजरात में 9 और 14 दिसंबर को मतदान कराया जाएगा और 18 दिसंबर को मतगणना होगी.
कुल 182 सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव करवाए जाएंगे.
पहले चरण में 89 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 9 दिसंबर (शनिवार) को मतदान होगा.












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