क्यों दिल्ली के प्रदूषण से पंजाब में AAP की हवा हो सकती है खराब ? जानिए

नई दिल्ली, 16 नवंबर: दिल्ली में प्रदूषण के लिए अबतक जिम्मेदार माने जाने वाला सबसे बड़ा कारण फिलहाल गलत साबित हो रहा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उसके हिसाब से दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए 70-80% कारण पराली जलाने से संबंधित नहीं हैं। अबतक यही जाहिर हो रहा था कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए पराली जलाने और दिवाली में पटाखे फोड़ने ही सबसे बड़े कारण हैं। नवंबर के महीने में हर साल इन्हीं दोनों की वजह से दिल्ली की हवा खराब होती है, लोग यही मानकर चल रहे थे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और पराली जलाने की घटनाओं में सबसे ज्यादा हरियाणा और पंजाब का नाम लिया जाता रहा है। अगले साल की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसमें दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी अबतक बेहतर स्थिति में मानी जाती है। सवाल है कि दिल्ली में इस बार का वायु प्रदूषण, नई जानकारियों के सामने आने के बाद कहीं पंजाब में इसकी हवा तो नहीं खराब कर देगी ?

दिल्ली में प्रदूषण के लिए पराली गुनहगार नहीं!

दिल्ली में प्रदूषण के लिए पराली गुनहगार नहीं!

दिल्ली में प्रदूषण का अबतक सबसे ज्यादा ठीकरा पंजाब-हरियाण और पश्चिमी यूपी में पराली जलाने और दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के दिन पटाखे जलाने पर ही फोड़ा जाता रहा है। पिछले 6 वर्षों से दिल्ली सरकार नवंबर में प्रदूषण का प्रकोप बढ़ने पर प्रदूषण के इन्हीं स्रोतों पर उंगली उठाकर अपना दामन साफ दिखाती रही थी। लेकिन, दिवाली खत्म हुए करीब दो हफ्ते गुजर चुके हैं; और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, उसमें एनसीआर में प्रदूषण के लिए पराली जलाने को 4 फीसदी ही जिम्मेदार माना गया है। यहां तक कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी सरकार को फटकार भी लगाई है। जाहिर है कि इस मुद्दे पर सभी संबंधित सरकारें अपनी-अपनी पार्टी लाइन के हिसाब से एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रही हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल ज्यादा बड़ी दिख रही है। क्योंकि, वह दिल्ली में सत्ता में है और पंजाब में सत्ता में आने के लिए जोर लगा रही है।

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    पंजाब सरकार अपनी पीठ थपथपाने में जुट चुकी है

    पंजाब सरकार अपनी पीठ थपथपाने में जुट चुकी है

    ये बात सही है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकीलों ने ये भी दावा किया है कि आने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों की वजह से केंद्र सरकार ने प्रदूषण का बोझ पराली पर डालने से बचने की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट में पराली को कम गुनहगार माने जाने के बाद पंजाब की कांग्रेस सरकार भी रक्षात्मक के बजाए फ्रंट फुट पर खेलने की कोशिश में है। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर की साप्ताहिक रिपोर्ट के आधार पर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार का दावा है कि इस साल 10 नवंबर तक प्रदेश के 10.34 लाख हेक्टेयर में ही पराली जलाई गई, जबकि पिछले साल 15.21 लाख हेक्टेयर तक इसका दायरा था। पंजाब सरकार अब अपनी पीठ थपथापने लगी है कि उसकी कोशिशों से पराली जलाने की घटनाओं में इतनी बड़ी कमी आई है।

    दिल्ली का प्रदूषण पंजाब में 'आप' की हवा करेगी खराब ?

    दिल्ली का प्रदूषण पंजाब में 'आप' की हवा करेगी खराब ?

    पंजाब में कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी है। यहां आंतरिक कलह के चलते कांग्रेस की कमर टूट चुकी है और ऊपर से साढ़े चार साल की एंटी-इंकंबेंसी से भी उसकी सांसें अटकी हुई हैं। ऊपर से एबीपी-सी वोटर का हाल ही में आया सर्वे भी उसे नुकसान दिखा रहा है। इसके मुताबिक वोट शेयर में इस बार एएपी (36 फीसदी) कांग्रेस (35 फीसदी) से एक फीसदी बढ़त बना सकती है। लेकिन, यह ओपिनियन पोल होने के बाद प्रदूषण की वजह से आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। कांग्रेस यह तो दिखा रही है कि पराली जलाने के नाम पर सिर्फ पंजाब के किसानों को बदनाम किया जाता रहा है, दूसरी तरफ दिल्ली की हवा खराब करने के नाम पर पंजाब को बदनाम करने का आरोप लगाकर शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने केजरीवाल से माफी मांगने तक की मांग कर दी है। पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने भी कहा है कि दिल्ली की केजरीवाल ने अपना चेहरा बचाने के लिए पंजाब के किसानों को झूठा बदनाम किया है और राष्ट्रीय राजधानी में खुद प्रदूषण रोकने में नाकाम रही है।

    यमुना के प्रदूषण के तस्वीरें भी बढ़ा रही हैं चिंता

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    दरअसल, तथ्य ये है कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए कदमों से केजरीवाल सरकार सर्वोच्च अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रही है और पंजाब की राजनीति से इसका सीधा नाता उसकी सेहत के लिए सही नहीं लग रहा है। यही नहीं, हाल में छठ पूजा के दौरान यमुना नदी में सफेद झाग की जो तस्वीरें आई हैं, उससे भी काम करने वाली आम आदमी पार्टी की छवि पर बट्टा लगा है। 2015 से केजरीवाल सरकार यमुना नदी के पानी को स्वच्छ करने के दावे ही करती रह गई है। यही वजह कि सुप्रीम कोर्ट ने उसपर सिर्फ विज्ञापन पर फंड लुटाने के आरोपों के मद्देनजर ऑडिट करवाने जैसी सख्त टिप्पणी तक कर दी है। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर अबतक देश को गुमराह करते रहने का आरोप लगाया है।

    पंजाब में क्यों बनी है आम आदमी पार्टी की संभावना ?

    पंजाब में क्यों बनी है आम आदमी पार्टी की संभावना ?

    हालांकि, पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी तक अपना कोई बड़ा चेहरा नहीं ढूंढ़ पाई है। लेकिन, कांग्रेस सरकार की जिस तरह से अपने ही नेताओं की वजह से किरकिरी हो रही है, उससे 2022 के विधानसभा चुनाव में इस बार 'आप' के लिए अच्छी संभावना बनती दिख रही थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी और तब शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन को भी पीछे कर दिया था। तब केजरीवाल की पार्टी 117 सीटों में से 112 पर लड़ी थी और उसके 20 उम्मीदवार जीते थे और 23.72% वोट मिले थे। जबकि, कांग्रेस सभी सीटों पर लड़कर 77 सीटें जीती थी और 38.50% वोट पाए थे। आम आदमी पार्टी और केजरीवाल ने शुरू से किसान आंदोलन को आगे बढ़कर समर्थन दिया है। ओपिनियन पोल के हिसाब से उसके वोट शेयर में जो करीब 12% की बढ़ोतरी दिखाई गई है, उसका मूल कारण यही लगता है। लेकिन, अगर कांग्रेस और एसएडी उसे पंजाब के किसानों को बदनाम करने वाले आरोपों के जरिए घेरने में सफल हो गई तो दिल्ली की हवा की तरह पंजाब में इस बार आम आदमी की पार्टी की चुनावी हवा भी खराब होने में देर नहीं लगेगी।

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