Vikram Wadhwa कौन हैं? ₹1,500 की नौकरी से लेकर 590 करोड़ के बैंक घोटाले के 'साजिशकर्ता' बनने तक की पूरी कहानी
Chandigarh Fraud Case: चंडीगढ़ में सामने आए एक बड़े बैंकिंग घोटाले ने इन दिनों काफी चर्चा बटोरी है। इस मामले में पुलिस ने जिस शख्स को मुख्य साजिशकर्ता बताया है, वह हैं विक्रम वधवा। चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 52 साल के विक्रम वधवा को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच के लिए उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
विक्रम पर हरियाणा सरकार के विभागों से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये और चंडीगढ़ नगर निगम, CREST से जुड़े करीब 190 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। आखिर कौन है विक्रम वधवा?

Who Is Vikram Wadhwa: कौन हैं विक्रम वधवा?
विक्रम वधवा मूल रूप से पंजाब के मलोट के रहने वाले हैं। 1990 के दशक में वह बेहतर काम की तलाश में चंडीगढ़ पहुंचे थे। शुरुआत में उन्होंने एक गेस्ट हाउस में केयरटेकर के तौर पर काम किया, जहां उनकी सैलरी करीब 1,500 रुपये महीना थी। धीरे-धीरे उन्होंने रियल एस्टेट के क्षेत्र में कदम रखा और कुछ ही वर्षों में प्रॉपर्टी कारोबार में अच्छी पकड़ बना ली। समय के साथ वधवा ने चंडीगढ़ के कई सेक्टरों में संपत्तियां खरीदीं और न्यू चंडीगढ़ में एक फार्महाउस भी लिया। पुलिस के मुताबिक वह होटल बिजनेस और रियल एस्टेट डेवलपमेंट से भी जुड़े रहे हैं।
IDFC First Bank Scam: कैसे शुरू हुआ कथित घोटाला?
जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले की शुरुआत 2022 के आसपास हुई थी। वधवा ने पूछताछ में बताया कि उनकी पहचान बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि से उनके पिता राकेश कुमार ऋषि के जरिए हुई थी। रिभव ऋषि IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में काम करते थे। वधवा के अनुसार, ऋषि ने उन्हें बताया था कि हरियाणा और चंडीगढ़ के कई सरकारी विभागों के खाते इस बैंक में हैं और वह इन खातों की निगरानी करते हैं।
Haryana Corruption Case: पैसे निवेश करने का कथित प्रस्ताव
वधवा ने जांचकर्ताओं को बताया कि रिभव ऋषि ने उन्हें सरकारी खातों में पड़े करोड़ों रुपये को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाने का प्रस्ताव दिया था। आरोप है कि योजना के तहत यह पैसा पहले कुछ निजी कंपनियों के खातों में भेजा जाता था और बाद में अलग-अलग खातों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था। जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें Capco Fintech Services, RS Traders और Swastik Desh Projects जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
वधवा का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जरूरत पड़ने पर सरकारी खातों में पैसे की रिवर्स एंट्री कर दी जाएगी और बैंक स्टेटमेंट इस तरह मैनेज किए जाएंगे कि किसी को शक न हो।
सरकारी विभागों के खाते ट्रांसफर कराने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि वधवा ने कुछ सरकारी विभागों से संपर्क कर उन्हें अपने खाते IDFC First Bank में ट्रांसफर करने के लिए राजी किया था। बताया जा रहा है कि 2023-24 के दौरान चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड, चंडीगढ़ नगर निगम और CREST जैसे सरकारी संस्थानों से जुड़े फंड कथित तौर पर अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर किए गए।
पुलिस के अनुसार इस पैसे का इस्तेमाल चंडीगढ़, मोहाली, खरार और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए किया गया।
घोटाला कैसे सामने आया?
यह मामला तब सामने आया, जब चंडीगढ़ नगर निगम ने 2026 की शुरुआत में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के बंद होने के बाद फंड्स का मिलान शुरू किया। जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि रिकॉर्ड में दिखाए गए करीब 116.84 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट बैंक के सिस्टम में मौजूद ही नहीं थे। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो हरियाणा के कई सरकारी विभागों के खातों से भी बड़ी रकम के गबन का शक सामने आया।
590 करोड़ रुपये की जांच
हरियाणा स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में पता चला कि विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत कम से कम आठ सरकारी विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपये की रकम निकाली गई।
बताया जा रहा है कि यह पैसा IDFC First Bank की सेक्टर 32 चंडीगढ़ शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा होना था, लेकिन कथित तौर पर 12 संदिग्ध खातों के जरिए निकाल लिया गया।
अब तक कई गिरफ्तारियां?
इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि, अभय कुमार और विभाग के सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार भुवानी समेत कुल 11 लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
ED की कार्रवाई
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी जांच कर रहा है। हाल ही में ED ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज किया गया।
जांच में कई फर्जी कंपनियों और संदिग्ध कारोबारों का नेटवर्क सामने आया है जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर पैसे के लेनदेन के लिए किया गया था।
अब आगे क्या?
पुलिस फिलहाल विक्रम वधवा की रिमांड के दौरान 2,400 से ज्यादा बैंक ट्रांजैक्शनों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी फंड्स आखिर किन-किन रास्तों से ट्रांसफर किए गए।
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