कौन है कश्मीर का मसरत आलम, जिस पर भिड़ीं भाजपा-पीडीपी?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ल)। कौन है मसरत आलम ? उसे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने रिहा करके एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। मसरत पर 2008 से 2010 के बीच पत्थरबाजी के आतंक की साजिश रचने का आरोप लगाया था और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 लाख का इनाम भी घोषित किया था। [फोटो में इंसेट तस्वीर ग्रेटर कश्मीर डॉट कॉम के सौजन्य से]
उसे 2010 में श्रीनगर के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया था। पत्थरबाजी ने आतंक का एक अलग चेहरा प्रस्तुत किया था जिसमें सुरक्षा बालों के जवान सहित 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे एवं कश्मीर में एक बड़ा उबाल दिख रहा था। केन्द्र और प्रदेश सरकार उसे रोकने में नाकामयाब रही थी।
स्वाभाविक गुस्सा
मुफ्ती सरकार द्वारा 4 साल से जेल में बंद हुर्रियत के अलगाववादी नेता मसरत आलम को रिहा करने पर देश में जो आक्रोश पैदा हुआ है वह अपनी जगह स्वाभाविक है। पहली नजर में ऐसा लगता है कि देश विरोधी आदमी बिना सजा पाये कैसे बाहर आ सकता है। आगे और ऐसे कैदी रिहा होने वाले हैं। इसकी प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
जानकारों ने बताया कि इतने जघन्य मामलों के आरोपी मसरत पर पुलिस ने कोई केस दर्ज ही नहीं किया। वह बिना किसी आपराधिक मुकदमे के, आरोप के केवल पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत जेल में था। अगर किसी पर कोई मुकदमा है ही नहीं तो फिर आप उसे जेल में कैसे रख सकते हैं? उस पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए था।
वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की पूर्व सरकार ने भी जेल में बंद ऐसे कैदियों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई थी जो केवल राजनीतिक कारणों से बंद थे। बहरहाल मुफ्ती सरकार नहीं भी आती तो ऐसे करीब 160 से ज्यादा लोगों को रिहा किया जा सकता था।
इसमें कोई शक नहीं है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद का अलगाववादियों और यहां तक कि आतंकवादियों के प्रति मोहब्बत जगजाहिर है। उन्होंने बयान दे दिया था कि राजनीतिक कैदी रिहा किये जायेंगे। इसके लिए अध्यादेश लाने की बात कही थी।













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