कौन हैं डॉ. कस्तूरीरंगन? जिनके निधन पर पीएम मोदी ने जताया दुख, नई शिक्षा नीति के निर्माण में निभाई अहम भूमिका
K. Kasturirangan Death: प्रसिद्ध भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का 25 अप्रैल 2025 को बेंगलुरु स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे और हाल के महीनों में उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।
उनके निधन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मु्र्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई हस्तियों ने दुख व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मु्र्मु ने जताया दुख
डॉ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन के निधन के बारे में जानकर अत्यंत दुःख हुआ। इसरो के प्रमुख के रूप में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ज्ञान के प्रति उनके जुनून ने उन्हें विविध क्षेत्रों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई, जो आज नई पीढ़ी के निर्माण में गहरा प्रभाव डाल रही है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
वहीं पीएम मोदी ने डॉ. के. कस्तूरीरंगन के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि, मैं डॉ. के. कस्तूरीरंगन के निधन से गहरे दुःख में हूँ। वे भारत की वैज्ञानिक और शैक्षिक यात्रा के एक प्रेरणादायक स्तंभ थे। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने ISRO में अत्यंत निष्ठा के साथ सेवा दी और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, जिसके लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त हुई। उनके नेतृत्व में कई महत्वाकांक्षी उपग्रह प्रक्षेपण हुए और नवाचार को निरंतर बढ़ावा मिला।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. कस्तूरीरंगन का जन्म 24 अक्टूबर 1940 को केरल के एर्नाकुलम शहर में हुआ था। उन्होंने भौतिकी विषय में शिक्षा प्राप्त की और बाद में पीएच.डी की डिग्री हासिल की।
ISRO में एक गौरवशाली करियर
डॉ. कस्तूरीरंगन का करियर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के सतत विकास का पर्याय रहा। वे 1994 से 2003 तक ISRO के पांचवें अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) और जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) जैसे महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यान विकसित किए।
वे भारत के रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के निदेशक भी रहे और उन्होंने भास्कर I और II जैसे पृथ्वी अवलोकन मिशनों के परियोजना निदेशक के रूप में नेतृत्व किया।
भारत की नई शिक्षा नीति के वास्तुकार
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के साथ-साथ डॉ. कस्तूरीरंगन ने भारत की नई शिक्षा नीति के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। यह नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)के कुलाधिपति और कर्नाटक नॉलेज कमीशन के अध्यक्ष के रूप में भी सेवा दी।












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