कौन हैं अनूप चंद्र पांडे, जिन्हें यूपी चुनाव से पहले बनाया गया है इलेक्शन कमिश्नर
नई दिल्ली, 9 जून: रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनूप चंद्र पांडे को चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के साथ ही चुनाव आयोग में इलेक्शन कमिश्नर के तीनों पद भर गए हैं। 12 अप्रैल को चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुनील अरोड़ा के रिटायरमेंट के अगले दिन ही उनकी जगह चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। इसके चलते तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में उनके अलावा राजीव कुमार ही रह गए थे। लेकिन, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे को नया इलेक्शन कमिश्नर बनाने से आयोग के सारे पद फिर से भर गए हैं। अनूप चंद्र पांडे की ये नियुक्ति बहुत ही अहम है, क्योंकि अगले 8 महीने में ही उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

कौन हैं अनूप चंद्र पांडे ?
अनूप चंद्र पांडे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव हैं। वो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही 2018 में राज्य के मुख्य सचिव बने और 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उसी साल अगस्त में उस पद से रिटायर हुए थे। भारत के चुनाव आयुक्त नियुक्त होने तक वो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की निगरानी समिति के भी सदस्य थे। यूपी के मुख्य सचिव के पद से रिटायरमेंट के बाद भी वो यूपी की ओवरसाइट कमिटी में सदस्य के तौर पर अहम भूमिका निभा चुके हैं। अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में उन्होंने अपने बारे में बताया है कि 35 साल से ज्यादा के करियर में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन कई सारी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

चंडीगढ़ के रहने वाले हैं अनूप चंद्र पांडे
नए चुनाव आयुक्त डॉक्टर अनूप चंद्र पांडे 1984 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी थे। चंडीगढ़ के रहने वाले पांडे का जन्म 15 फरवरी,1959 हुआ। उन्होंने मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स किया है और मटेरियल्स मैनेजमेंट में एमबीए। साथ ही साथ प्राचीन इतिहास में उन्होंने पीएचडी भी कर रखी है। उत्तर प्रदेश में चीफ सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त होने से पहले उनका राज्य में लंबा प्रशासनिक अनुभव रहा है और विभिन्न जिलों के डीएम और कमिश्नरियों के कमिश्नर भी रह चुके हैं। साथ ही कई विभागों की जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। उन्होंने कई वर्षों तक केंद्र सरकार में भी सेवाएं दी हैं और रक्षा मंत्रालय जैसे अहम मिनिस्ट्री में अतिरिक्त सचिव के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा भी केंद्र के कई मंत्रालयों में उन्होंने योगदान दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं
उत्तर प्रदेश में चीफ सेक्रेटरी रहते हुए उन्होंने अपने कार्यकाल की जिन सफलताओं का जिक्र किया है, उसमें कृषि ऋण माफी योजना को संचालित करने, इंवेस्टर्स समिट का आयोजन और कुंभ मेला के साथ-साथ प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन भी शामिल है। केंद्र में नियुक्ति के दौरान जब वह श्रम मंत्रालय में संयुक्त सचिव थे तो अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), जी20 और कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने जिस लंबे प्रशासनिक अनुभव और दक्षता का जिक्र किया है, उनमें उद्योग, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास प्रशासन शामिल है। उनका मानना है कि उनके पास जटिल प्रशासनिक समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत कौशल है। 2019 के लोकसभा चुनावों यूपी में शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतदान संपन्न कराने को भी उन्होंने अपनी बड़ी सफलता बताई है।

यूपी समेत कई विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी
भारत के चुनाव आयुक्त की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल फिक्स है। इस तरह से चुनाव आयोग में उनका कार्यकाल करीब तीन साल का रहेगा और अगले लोकसभा चुनाव से पहले 2021 के फरवरी में वो रिटायर हो जाएंगे। लेकिन, उससे पहले उनके कार्यकाल के दौरान अगले साल की शुरुआत में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव करवाए जाएंगे। अगले साल के ही आखिर में गुजरात में भी विधानसभा चुनाव होंगे। जबकि, उनके रिटायरमेंट से पहले ही कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।












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