भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को WHO ने दी मंजूरी

नई दिल्ली, 3 नवंबर: भारत बायोटेक की कोरोना वायरस की वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंजूरी दे दी है। डब्ल्यूएचओ के स्ट्रैटेजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स ने कोवैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत दी है। भारत बायोटेक ने काफी पहले कोवैक्सीन को मंजूरी के लिए अप्लाई किया था लेकिन डब्ल्यूएचओ से मान्यता नहीं मिल पाई थी। डब्ल्यूएचओ की समिति ने 26 अक्टूबर को कोवैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक से कुछ जानकारियां मांगी थीं। जिसके बाद आज वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) में शामिल करने का फैसला लिया गया।

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    डब्ल्यूएचओ के टेक्नीकल एडवाइडजरी ग्रुप ने कहा है कि निर्धारित किया है कोवैक्सीन कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए मानकों को पूरा करती है और इसका उपयोग दुनिया भर में किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं पर भी टीके के इस्तेमाल को डब्ल्यूएचओ ने सही पाया है। डब्ल्यूएचओ के स्ट्रेटेजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स ऑन इम्यूनाइजेशन (एसएजीई) ने कोवैक्सीन को लेकर कहा कि 18 और उससे अधिक उम्र के लोगों को चार सप्ताह के अंतराल में इसकी दो डोज दी जानी चाहिए।

    भारत बायोटेक डब्ल्यूएचओ से मान्यता के बाद कहा है कि अब कोवैक्सीन के आयात और प्रशासन के लिए अपनी नियामक अनुमोदन प्रक्रियाओं में आसानी होगी। यूनिसेफ, पैन-अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन, गवी कोवैक्स दुनिया भर के देशों में वितरण के लिए कोवैक्सीन की खरीद अब कर सकेंगी। आईसीएमआर के डीजी डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि दुनिया हमारे लिए खुल गई है। हमने बड़ी संख्या में वैक्सीन की खुराक दी है, हम इस पूरी तरह से स्वदेशी वैक्सीन को दुनिया के बाकी हिस्सों में भेज पाएंगे।

    कोवैक्सीन भारत में तैयार की गई कोरोना वैक्सीन है। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने तैयार किया है। भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) में शामिल करने के लिए इस साल 19 अप्रैल को डब्ल्यूएचओ को आवेदन किया था। सात महीने के इंतजार के बाद टीके को विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से मंजूरी मिली है।

    जनवरी से चल रहा देश में टीकाकरण

    भारत में इस साल जनवरी में कोरोना टीकाकरण शुरू हुआ था। देश में ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन, जो सीरम इंस्टीट्यूट में कोविशील्ड के नाम से बन रही है और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का मुख्य तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कोविशील्ड को तो डब्ल्यूएचओ की मान्यता है लेकिन कोविशील्ड को मान्यता नहीं थी। इसके चलते कोवैक्सीन लेने वाले लोगों को विदेश यात्रा में दिक्कत आ रही थी। विदेश पढ़ने वाले छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में डब्ल्यूएचओ की मंजूरी के बाद कोवैक्सीन लेने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

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