Election ink: क्यों नहीं मिटती है चुनावी स्याही? कितना भी दम लगा लीजिए इतने दिनों तक नहीं जाएगा निशान

Election ink: देश में जब भी चुनावी मौसम आता है, उंगलियों पर लगी चुनावी स्याही की तस्वीर दिमाग में सबसे पहले आती है। वोट देने के बाद चुनाव अधिकारी वोटर की उंगली पर वोट देने के साथ ही नीले रंग की एक स्याही लगा देते हैं। इसे 'चुनावी स्याही' कहा जाता है।

ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर वोट देने के बाद ये चुनावी स्याही क्यों लगाई जाती? कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि आखिर चुनावी स्याही का निशाना जाता क्यों नहीं है? कई लोग इसके इतिहास के बारे में भी जानने में दिलचस्पी लेते हैं। इस लेख में हम आपको चुनावी स्याही से जुड़ी सारी जानकारी देंगे?

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सवाल 1: भारत चुनावी स्याही कब से लगाई जा रही है? क्या है इसका इतिहास?

भारत में साल 1962 के से इस चुनाव स्याही का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस नीले रंग की स्याही को भारतीय चुनाव में शामिल करने का पूरा श्रेय देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को जाता है। इसे इलेक्शन इंक या इंडेलिबल इंक भी कहा जाता है।

सवाल 2: चुनावी स्याही क्यों लगाया जाता है?

चुनावी स्याही फर्जी वोटों से बचने के लिए लगाया जाता है। वोट सुरक्षित रहे और एक शख्स दूसरी बार वोट ना डाल सके, कोई दूसरा किसी और के नाम से फर्जी वोट ना डाले...इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए चुनावी स्याही लगाया जाता है।

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सवाल 3: कहां बनाई जाती है ये चुनावी स्याही?

  • ये चुनावी स्याही दक्षिण भारत में स्थित एक कंपनी बनाती है। कंपनी का नाम है, मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (MVPL)। इस कंपनी की शुरुआत 1937 में हुई थी। कंपनी को मैसूर प्रांत के महाराज नलवाडी कृष्णराजा वडयार ने शुरू किया था।
  • वैसे तो ये कंपनी कई तरह के पेंट बनाती है, लेकिन इसकी मुख्य पहचान चुनावी स्याही बनाने के लिए ही है। कंपनी इस चुनावी स्याही को थोक के भाव में किसी को नहीं बेचती है।
  • इसे सरकार या चुनाव से जुड़ी एजेंसियों को ही सप्लाई की जाती है। यह कंपनी भारत के अलावा कई दूसरे देशों में भी चुनावी स्याही की सप्लाई करती है।

सवाल 4: क्यों नहीं मिटती है चुनावी स्याही? कितने दिनों तक रहता है निशान?

  • कंपनी की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक चुनावी स्याही को बनाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट केमिकल का इस्तेमाल होता है।
  • इसे आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए, कम-से-कम 72 घंटे तक यानी 3 दिनों तक त्वचा से मिटाया नहीं जा सकता है।
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सवाल 5: चुनावी स्याही में किस केमिकल का होता है इस्तेमाल?

  • असल में सिल्वर नाइट्रेट केमिकल को इस स्याही में इसलिए मिलाया जाता है...क्योंकि ये पानी के संपर्क में आने के बाद काले रंग या गहरे नीले रंग का हो जाता है। जिसके बाद ये मिटता नहीं है।
  • जब पोलिंग अफसर वोटर की उंगली पर स्याही लगाता है तो ये सिल्वर नाइट्रेट हमारे शरीर में मौजूद नमक के साथ मिलकर सिल्वर क्लोराइड बनाता है।
  • सिल्वर क्लोराइड एक ऐसा केमिकल है, जो पानी में घुलता नहीं है और त्वचा से जुड़ा रहता है। इसे साबुन या हैंडवॉश से धोया नहीं जा सकता है। ये तभी मिटता है, जब धीरे-धीरे त्वचा के सेल पुराने होते जाते हैं और वे उतरने लगते हैं।
  • कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, हाई क्वालिटी की चुनावी स्याही 40 सेकेंड से भी कम समय में त्वचा पर लगते ही सूख जाती है। इसका रिएक्शन इतनी तेजी से होता है कि उंगली पर लगने के एक सेकेंड के भीतर निशान छोड़ जाता है।
  • यही वजह है कि इस स्याही को छुड़ाना मुश्किल है। हालांकि कई लोग ये दावा करते हैं कि कुछ खास केमिकल की मदद से इसे छुड़ाया जा सकता है लेकिन इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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