1999 में 'अम्मा' ने ऐसा क्या किया था, जिसने बदली थी भारत की सियासी तस्वीर?

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चेन्‍नई। तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री रहीं जे जयललिता अब हमारे बीच नहीं हैं। जयललिता शायद भारतीय राजनीति की ऐसी शख्सियत रहीं जिन्‍होंने दो दशकों से भी ज्‍यादा समय तक देश की राजनीति को बदलने और एक नई इबारत लिखने का काम किया।

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1999 में दिखी तेवर की पहली झलक

जयललिता को आज जिस तेवरों के लिए लोग याद करते हैं उसकी पहली झलक उन्‍होंने वर्ष 1999 में दिखा दी थी। हमेशा खुद को केंद्र की राजनीति से दूर रखने की बात कहने वाली जयललिता केंद्र की सरकार में जितनी अहमियत आज रखती थीं, उतनी ही अहमियत वह 90 के दशक में शुरू हुई राजनीति में भी रखती थीं।

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17 अप्रैल 1999 की घटना

17 अप्रैल 1999 को केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार देश में विश्वासमत की वजह से गिरने वाली पहली सरकार थी। वाजपेयी की सरकार सिर्फ एक वोट से गिरी थी और यह एक वोट था जयललिता का।

समर्थन पर धमकाने वाली अम्‍मा

उस समय अटल बिहारी वाजपेयी गठबंधन वाली सरकार का नेतृत्‍व कर रहे थे। एआईएडीएमकी की मुखिया जयललिता भी उस समय सरकार का समर्थन कर रही थीं। वह अक्‍सर सरकार को धमकी देती रहती थीं कि अगर उनकी कुछ मांगों को पूरा नहीं किया गया तो फिर वह समर्थन वापस ले लेंगी।

और गिर गई वाजपेयी की सरकार

जयललिता सरकार से तमिलनाडु की सरकार को बर्खास्‍त करने की मांग कर रही थीं। बीजेपी ने जयललिता पर आरोप लगाया कि वह खुद पर लगे भ्रष्‍टाचार के आरोपों के ट्रायलसे बचने के लिए ऐसी मांग कर रही हैं।

इसके बाद सरकार और पार्टियों के बीच कई मीटिंग हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया और सरकार गिर गई। वाजपेयी की सरकार सिर्फ 13 दिन तक ही टिक सकी और विश्‍वासमत के अभाव में गिर गई।

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English summary
It was in 17th April 1999, Atal Bihari Vajpayees’s government lost power because of confidence motion. During that time Jayalalithaa became the only reason.
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