पेट में हो रहा था दर्द, अचानक 7 महीने की गर्भवती निकली महिला
मुंबई। पेट दर्द की शिकायत लेकर 20 साल की महिला अस्पताल पहुंची। वहां जो उसे पता चला उसने उसके होश उड़ा दिए। जांच में सामने आया कि वो सात माह की गर्भवती है। महिला की बिगड़ती हालत देख डॉक्टरों ने फौरन ऑपरेशन किया जिसके बाद उसन बच्चे को जन्म दिया है। बच्चा प्री-मेच्योर है और उसका वजन 1 KG है। वहीं महिला के पहले से दो बच्चे हैं। मामला नवी मुंबई का है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा उस वक्त होता है जब कोई महिला पहली बार मां बन रही हो। खासकर उन महिलाओं के साथ जिनका यौन उत्पीड़न हुआ है। इस अवस्था में प्रेग्नेंसी का पता नहीं चल पाता है लेकिन कोई महिला पहले से दो बच्चों की मां हो उसके साथ ऐसा होना अचंभित करने वाला है।

6 माह पहले ही पति के साथ मुंबई आई थीं यासमीन शेख
जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल की रहने वाली यासमीन शेख 6 माह पहले ही अपने पति और 18 माह की बेटी के साथ नवी मुंबई आई थीं। यासमीन की बड़ी बेटी पश्चिम बंगाल में ही अपने रिश्तेदार के साथ रहती है। यासमीन की शादी 14 साल की उम्र में ही हो गई थी और दूसरी बार मां बनने के बाद से ही उसका मासिक स्राव रुक गया था। यासमीन ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और खुद ही मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाती रही। बीते रविवार अचानक यासमीन के पेट में तेज दर्द उठा।

यासमीन को लगा- पीरियड रुकने के चलते हो रहा है पेट दर्द
यासमीन ने अपने पति शहनवाज को बताया और उसके बाद नेहरू अस्पताल पहुंची। पहले तो यासमीन को ऐसा लग रहा था कि लंबे समय से पीरियड रुकने के चलते उसे पेट दर्द हो रहा है लेकिन मेडिकल चेकअप में जो बात सामने आई उसने उसे हैरान कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि वो 7 माह की प्रेग्नेंट है। मामला प्री-मेच्योर बेबी का था इसलिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए फौरन सर्जरी की बात कही। उसके बाद यासमीन को एनएमएमसी अस्पताल रेफर किया गया जहां उसने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा 1 किलो का है और अभी अस्पताल में ही है।

क्या कहना है डॉक्टरों का
डॉक्टरों ने इसे अज्ञानता का मामला बताया है। मेडिकल के मुताबिक स्तनपान कराने के दौरान महिलाओं का मासिक धर्म रुक जाता है। यासमीन शेख अपनी बेटी को स्तनपान कर रही थीं, जिसके कारण उनके मासिक चक्र में देरी हुई थी। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रशांत जावडे ने कहा, "इस वजह से, वह शायद गर्भवती नहीं हो सकती थी।" प्रशांत जावडे ने बताया कि नवजात शिशु को एनआईसीयू में रखा गया है। उसकी हालत सुधरने में वक्त लगेगा क्योंकि सामान्य स्थिति में आने के लिए उसे 500 ग्राम वजन हासिल करना होगा। अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि जो महिला को दो गर्भधारण कर चुकी हो उसे तीसरे के बारे में महसूस तक नहीं हुआ।












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