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जब एक मिग पायलट ने सरकार को झुकाया

पत्रकार राहुल बेदी के अनुसार पिछले 46 सालों में मिग 21 दुर्घटनाओं में 171 पायलट मारे गए हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर तेज़ धूप में खड़े विंग कमांडर संजीत सिंह काएला के चेहरे पर खुशी और संतोष के भाव थे.

वर्ष 2005 में वो मिग-21 पर अभ्यास के लिए उड़े ही थे कि एक मिनट के भीतर ही उनका विमान क्रैश हो गया.

दुर्घटना में विंग कमांडर काएला की जान तो बच गई लेकिन रीढ़ की हट्टी में लगी चोट के कारण वो दोबारा विमान उड़ाने के लिए फ़िट नहीं रहे.

कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी में पता चला कि विमान के "उत्पादन में खराबी" के कारण दुर्घटना हुई थी.

12 साल बाद अदालत ने विमान उत्पादक एचएएल (हिंदुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड) और भारत सरकार को आदेश दिया कि विंग कमांडर काएला को 55 लाख रुपया मुआवज़ा दिया जाए.

रूसी मिग विमानों को 'फ्लाइंग कॉफ़िन' कहा जाता है.

क्यों गिर रहे हैं वायुसेना के विमान?

मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट की मौत

वरिष्ठ रक्षा पत्रकार राहुल बेदी बताते हैं, "1966 से 872 मिग 21 भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए. 1966 और 2012 के बीच दुर्घटनाओं में 482 मिग 21 विमान नष्ट हुए जिससे 171 फ़ायटर पायलटों सहित 39 आम नागरिकों की मौत हुई. इन मौतों की कोई जवाबदेही नहीं हुई, किसी ने कोई नहीं सवाल पूछे."

File: मिग 21 क्रैश
Getty Images
File: मिग 21 क्रैश

कोर्ट का आदेश

मिग 21 दुर्घटना मामले में मुआवज़े को लेकर अपनी तरह का ये पहला आदेश है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "एक सैनिक और एक अफ़सर का सम्मान और गौरव जीवन के अधिकार की तरह ही है. उन्हें सुरक्षित कार्यस्थल से वंचित करना और स्टैंडर्ड उपकरण से वंचित रखना उनके जीवन और प्रतिष्ठा के अधिकार का हनन है."

आदेश से खुश 43 वर्षीय विंग कमांडर काएला ने कहा, "ये एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. ये मामला सुरक्षित माहौल में काम करने के अधिकार का है. मैं चाहता हूं जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो."

मिग मकान पर गिरा

एक और मिग दुर्घटनाग्रस्त

मिग 21 बनाने वाली सरकारी कंपनी एचएएल विमान में किसी खराबी से इनकार करती रही है. दुर्घटना की सरकारी कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी के नतीजों की जानकारी विंग कमांडर काएला को नहीं दी गई थी.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, एचएएल का लगातार ये कहना है कि उसका कोई दोष नहीं है, साथ ही सरकार का इस बारे में पत्थर की तरह शांत रहकर याचिकाकर्ता को अंधेरे में रखना, उसे सुरक्षित कार्यक्षेत्र और स्टैंडर्ड उपकरण उपलब्ध न करवा पाना, इन सभी का बचाव नहीं किया जा सकता.

एचएएल के वकील ने इस बारे में कोई भी वक्तव्य देने से मना कर दिया.

File: मिग 21 क्रैश
Getty Images
File: मिग 21 क्रैश

क्यों होती हैं इतनी दुर्घटनाएं ?

राहुल बेदी बताते हैं, अभी भी 110 से ज़्यादा मिग 21 विमानों के अपग्रेडेड वर्ज़न सेवा में है और उनमें भी दुर्घटनाएं हुई हैं.

वो कहते हैं, "सरकारें रूस से कहती रही हैं कि इन विमानों के इंजन में तकनीकी समस्याएं हैं लेकिन रूस ये मानने को तैयार नहीं है. वो इसके लिए खराब रख-रखाव और पायलट को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. 2009 से अब तक सात सुखोई दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं लेकिन इसे लेकर भी कोई जवाबदेही नहीं है."

विंग कमांडर काएला दिसंबर 1991 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए.

चार जनवरी 2005 का दिन. विंग कमांडर काएला राजस्थान के नल एअर फ़ोर्स स्टेशन में तैनात थे.

सोवियत पायलट जो अपने देश का लड़ाकू विमान ही ले भागा

ऊंटों की सवारी, सुखोई और तोप

अपने तीन साथी पायलटों के साथ वो नियमित अभ्यास के लिए उड़े ही थे कि उन्हें ऐसा लगा कि विमान बाएं ओर झुक सा रहा है.

विमान के टेकऑफ़ के कुछ ही सेकेंड्स में आग लग गई थी. कंट्रोल पैनल पर लगी बत्तियां जलने लगीं.

विमान को मोड़कर वापस रनवे पर लाने की कोशिश हुई लेकिन पता चला कि विमान के सारे सिस्टम जल गए हैं और मास्टर ब्लिंकर अलार्म तेज़ी से बज रहा है.

जब जहाज़ के बचने की कोई उम्मीद नहीं होती तो तब ये अलार्म बजता है.

जब बाल बाल बचे काएला

वो कहते हैं, "मैंने ऐसी स्थिति में लिए जाने वाले तमाम कदम उठाए और मेरे साथ उड़ रहे एक दूसरे सीनियर पायलट से संपर्क करके चेक करवाया कि मैंने सही ऐक्शंस किए हैं या नहीं. उसने बोला सब सही है."

विमान तेज़ी से पलटी खाकर नीचे जा रहा था. तभी सामने 'विजय सिंह की धानी' गांव नज़र आया.

विंग कमांडर काएला कहते हैं, "मेरी कोशिश थी कि गांव निकल जाए, उसके बाद मैं विमान से निकलूं. अगर विमान गांव पर गिरता तो लोगों की मौत हो सकती थी."

विंग कमांडर काएला के विमान से कूदने (इजेक्ट) के डेढ़ से दो सेकेंड बाद ही विमान क्रैश हो गया. वो बाल-बाल बच गए.

ज़मीन पर गिरते ही उन्हें पीठ में कड़ापन और दर्द महसूस हुआ.

अगले डेढ़ साल तक चली डॉक्टरी जांच और टेस्ट के बाद पाया गया कि उनके स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगी है और 2007 में उन्हें बताया गया कि वो दोबारा विमान नहीं उड़ा पाएंगे.

वो कहते हैं, "मुझे बेहद दुख हुआ. फ्लाइंग मेरा पैशन था."

वायु सेना ने दुर्घटना के तुरंत बाद कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी की जांच बिठाई और एक रिपोर्ट तैयार की.

एक आरटीआई के जवाब में वायु सेना ने रिपोर्ट के कुछ हिस्से की जानकारी दी.

वायु सेना ने कहा था, "दुर्घटना का कारण उत्पादन में दोष को ठहराया गया. हालांकि एचएएल ने उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं किया है."

विंग कमांडर काएला ने सरकार से मुआवज़ा मांगा लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

आखिरकार उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

दिल्ली हाईकोर्ट
Getty Images
दिल्ली हाईकोर्ट

फैसले से कुछ बदलाव आएगा?

विंग कमांडर काएला ने याचिका में कहा था कि सुरक्षित परिस्थिति में काम करना उनका हक़ है और उनके अधिकार का हनन हुआ है. उन्होंने एचएएल की जवाबदेही की मांग की, साथ ही कहा कि इस दुर्घटना के कारण उनके करियर पर असर पड़ा है.

उनके वकील भरत कुमार कहते हैं, "हम चाहते थे कि इस बारे में गाइडलाइन बने. आगे कोई ऐसा काम करने से डरे इसलिए हमने मुआवज़े की मांग की."

आखिरकार अदालत ने विंग कमांडर काएला के हक़ में फ़ैसला दिया.

वो कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि आने वाली पीढ़ी के लिए उच्च क्वालिटी के उपकरण बनेंगे. जिस तरह मैंने कष्ट सहे, मैं नहीं चाहता कि अगली पीढ़ी कष्ट सहें."

विंग कमांडर काएला नासिक में स्कूल ऑफ़ आर्टिलरी में इंस्ट्रक्टर हैं और सैन्य अफ़सरों को एअरफ़ोर्स टैक्टिक सिखाते हैं.

क्या अदालत के आदेश से चीज़ें बदलेंगी, राहुल बेदी कहते हैं, "मिग विमानों की लगातार दुर्घटनाओं को लेकर सैनिकों में ज़बरदस्त भावनाएं हैं लेकिन अगर आपको लगता है कि अदालत के फ़ैसले से कुछ बदलेगा, तो मुझे ऐसा नहीं लगता."

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