इनकम टैक्स विभाग जब्त 351 करोड़ कैश का क्या करेगा? क्या कांग्रेस सांसद धीरज साहू को वापस मिल जाएंगे पैसे?
Dhiraj Prasad Sahu News: कांग्रेस के झारखंड के लोहरदगा से राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ओडिशा और झारखंड परिसरों पर आयकर विभाग (इनकम टैक्स) की छापेमारी हफ्तेभर से जारी है। आयकर विभाग ने ओडिशा और झारखंड में कई स्थानों पर धीरज साहू से जुड़ी संपत्तियों पर छापे के दौरान रिकॉर्ड 353 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक देश में किसी भी जांच एजेंसी द्वारा एक कार्रवाई में सबसे ज्यादा नकदी बरामद की गई है।
अब ऐसे में सवाल उठता है कि इनकम टैक्स विभाग जब्त 351 करोड़ कैश का क्या करेगा? कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि जब कोई केंद्रीय एजेंसी ऐसे छापेमारी में रुपये जब्त करती है तो ये सारा पैसा कहां जाता है और उसका क्या होता है? कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि धीरज साहू को क्या ये जब्त किए रुपये जांच के बाद वापस कर दिए जाएंगे?

ED या IT विभाग द्वारा छापे के दौरान बरामद नकदी का क्या होता है?
- जब ईडी, सीबीआई या आईटी विभाग बेहिसाब धन जब्त करता है, तो वे इसे अपने कार्यालय परिसर में नहीं रख सकते। सबसे पहले आरोपी को यह बताने का मौका मिलता है कि नकदी कहां से आई। अगर आरोपी संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहता है, तो धन को गलत तरीके से अर्जित माना जाता है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया जाता है।
- नकदी जब्त करने की वास्तविक प्रक्रिया यहीं से शुरू होती है। जब्त नकदी की गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को बुलाया गया जाता है। इसके साथ ही, जब्त की गई नकदी की एक सूची तैयार की जाती है जिसमें जैसे 500 रुपये, 200 रुपये, 100 रुपये, 50 रुपये आदि में बरामद राशि का विवरण शामिल होता है। राशि के आधार पर, बैंक गिनती प्रक्रिया को सुचारू और जल्दी पूरा करने के लिए कई मशीनें तैनात करता है।
- एक बार गिनती पूरी होने के बाद, कैश को स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में बक्सों में सील कर दिया जाता है। फिर कैश को एसबीआई शाखा में ले जाया जाता है, जहां इसे एजेंसी के व्यक्तिगत जमा (पीडी) खाते के तहत जमा किया जाता है। बाद में, नकदी को केंद्र सरकार के खजाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
- ऐसे नकदी का उपयोग सिर्फ अदालत में मामला खत्म होने के बाद ही किया जा सकता है। मामला विचाराधीन होने तक न तो ईडी, न बैंक, न ही सरकार को किसी भी उद्देश्य के लिए धन का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
- एजेंसी एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी करती है और एक निर्णायक प्राधिकारी को छह महीने के भीतर कुर्की की पुष्टि करनी होती है। यह आदेश सुनिश्चित करता है कि आरोपी जब्त की गई नकदी से लाभ नहीं उठा सके। एजेंसी केवल 180 दिनों तक नकदी अपने पास रख सकती है। उस दौरान एजेंसी को जब्ती की वैधता साबित करनी होगी। अगर एजेंसी ऐसा करने में विफल रहती है, तो पैसा स्वचालित रूप से आरोपी को वापस मिल जाता है।
- पैसे का उपयोग कैसे किया जाएगा यह मामले के नतीजे पर निर्भर करता है। अगर अभियुक्त बरी हो जाता है, तो नकदी वापस कर दी जाती है अन्यथा, दोषी पाए जाने पर पैसा सरकारी संपत्ति बन जाता है।
धीरज साहू के जब्त करोडों के कैश किस बैंक में जाएंगे?
इंडिया टुडे के मुताबिक आयकर अधिकारी जब्त की गई सभी रुपये को ओडिशा के बलांगीर में एसबीआई (SBI) के मेन ब्रॉन्च में जमा किए जाएंगे। आयकर अधिकारियों ने 176 बैगों की नोटों की गिनती पूरी कर ली है और जब्त कैश को बलांगीर में एसबीआई की मेन ब्रॉन्च में जमा करा दिया जाएगा। हालांकि, एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक भगत बेहरा ने कहा कि शाखा सार्वजनिक लेनदेन के लिए काम करती रहेगी।
क्या है आयकर नियम?
- आयकर नियमों के जानकार सौरव कुमार के इंटरव्यू के मुताबिक अघोषित आय पकड़े जाने पर टैक्स के साथ-साथ पेनल्टी का भी प्रावधान है। टैक्स स्लैब के हिसाब से 300 प्रतिशत तक टैक्स और पेनल्टी लगाया जा सकता है।
- आयकर विभाग अघोषित संपत्ति के मामले में सबसे अधिक 33 फीसदी टैक्स लगाती है। इसके अलवा 3 फीसदी सरचार्ज होता है और 200 प्रतिशत तक पेनल्टी होती है।
- इसमें एक नियम ये भी है कि जब्त की गई संपत्ति चालू वित्त वर्ष में अर्जित की गई है तो फिर 84 फीसदी टैक्स और पेनल्टी लगाई जाएगी। अगर संपत्ति चालू वित्त वर्ष में नहीं अर्जित की गई है तो 99 फीसदी टैक्स और पेनल्टी लगाई जाती है।
- बता दें कि धीरज साहू को ये पैसा वापस नहीं मिलने वाला है। उन्होंने कहा है कि धीरज साहू ठिकानों से मिली संपत्ति उन्हें वापस मिलना मुश्किल है। उन्हें उसके लिए टैक्स भी देना पड़ सकता है।












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