कर्नाटक चुनाव से पहले भाजपा में बगावत से क्या होगा नुकसान, क्या है ये मोदी का कोई प्लान
कर्नाटक चुनाव से पहले जगदीश शेट्टार समेत कई नेता भाजपा को झटका दे चुके हैं, इसके बावजूद भाजपा अपनी जीत को लेकर कैसे निश्चिंत है, आइए जानते हैं!

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 10 मई को होने वाले हैं। चुनाव को अब जब महज 22 दिन शेष बचे हैं । इससे पहले सत्ताधारी बीजेपी में जो हो रहा है उससे भाजपा के हालात कुछ ठीक नहीं दिख रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और छह बार विधायक रहे पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार नाराज होकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ज्वॉइन कर चुके हैं।
भाजपा के दो बड़े लिंगायत नेता ने नाराज होकर थाम कांग्रेस का हाथ
इससे पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी भी कांग्रेस ज्वॉइन कर चुके हैं। भाजपा के दोनों वरिष्ठ और लिंगायत समुदाय के नेता के कांग्रेस में जाने भाजपा का चुनावी गणित जहां गड़बड़ा गया है वहीं कांग्रेस भाजपा के इतने बड़े दो नेताओं को तोड़ कर फायदे में नजर आ रही है।
भाजपा को क्या होगा इससे नुकसान?
इसकी वजह है कि दोनों लिंगायत नेताओं के कांग्रेस ज्वॉइन करने से सामाजिक समीकरण भी इसका असर देखने को मिल सकता है। शेट्टार और सावदी को टिकट ना देकर नाराज करने से भाजपा के नेता और कार्यकर्ता तक अचंभित है। सबके जेहन में ये ही सवाल उठ रहा है कि आखिर कर्नाटक में भाजपा चुनाव से पहले ये क्या प्रयोग कर रही है। इससे भाजपा को क्या होगा नुकसान या पीएम मोदी और उनकी टीम का ही है ये कोई प्लॉन?
भाजपा को क्यों अभी भी है अपनी जीत का भरोसा?
भाजपा के नेताओं की बगावत और इस बार चुनाव उम्मीदवारों में किए गए बदलावों ने भाजपा लवर्स की धड़कने बढ़ा दी है। हालांकि कर्नाटक चुनाव में अपनी जीत के लिए भाजपा अभी भी आश्वस्त है और ये भरोसा पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व सीएम येदियुरप्पा पर होने के कारण है।
पीएम मोदी समेत अन्य प्रभावी नेता करेंगे ताबड़तोड़ रैलियां
टिकटों के बंटवारे के बाद नेताओं की बगावत से भाजपा डरी नहीं है ऐसा नहीं है लेकिन अभी भी वो चुनावी मैदान में अपने आक्रामक अंदाज में नजर आ रही है। पीएम मोदी, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, जेपी नड्डा समेत अन्य स्टार प्रचारकों की टीम है जो अब चुनाव प्रचार में एक के बाद एक रैली कर विपक्षी कांग्रेस पार्टी और जेडीएस को अपना पॉवर की मिट्टी पलीद करती नजर आएगी।
भाजपा के लिए क्यों ये चुनाव है अहम?
याद रहे भाजपा के लिए ये कर्नाटक चुनाव में जीत हासिल करना बेहद जरूरी है क्योंकि 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। कर्नाट क में लोकसभा की 28 सीटे हैं जिसमें से अकेली भाजपा के पास 25 है। अगर भाजपा को कर्नाटक में चुनाव में नुकसान होता है तो इसका सीधा असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। इतना ही नहीं आम चुनाव के लिए कर्नाटक ही भाजपा के लिए दक्षिण राज्यों में एंट्री का द्वार है। इसे भाजपा किसी हालत में नहीं गवाना चाहेगी।
बोम्मई सरकार का ये फैसला दिलाएगा क्या जीत?
याद रहे कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले कर्नाटक की बोम्मई सरकार जो कि खुद भी लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं उन्होंने लिंगायत समुदाय को दो प्रतिशत आरक्षण का तोहफा दिया था। ऐसे में कर्नाटक भाजपा को अपने परमानेंट लिंगायत वोटरों पर पूरा भरोसा है।
1990 के पहले लिंगायत थे कांग्रेस के वोटर और फिर...
बता दें 1990 के पहले तक लिंगायत वोटर कांग्रेस के सर्पोटर थे लेकिन राज्य में हुए दंगों के बाद उस समय के तत्तकालीन सीएम वीरेंद्र पाटिल को सीएम पद से हटा दिया गया था जिसके बाद लिंगायत भाजपा के येदियुरप्पा के समर्थक बन गए और 2008 में लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन गए जिसके बाद लिंगायत भाजपा को ही वोट कर रहे हैं।
भाजपा सरकार को अपनी उपलब्धियों के कारण है विश्वास
इसके भाजपा को विश्वास है कि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली योजनाओं का लाभ लेने वाली महिलाएं भी भाजपा को सपोर्ट करेंगी। इसके अलावा केंद्र सरकार ने प्रदेश को हाईवे, नए एयरपोर्ट समेत कई सौगात दी है। कुछ ये ही वजह है कि भाजपा का मानना है कि वो भाजपा के कोर वोटरों को बागी नेता बिलकुल तोड़ नहीं सकते वो उन्हें पहले की तरह इस बार भी वो भाजपा को ही वोट देकर जिताएंगे।
जानें लिंगायत समुदाय के कितने बने थे पिछले चुनाव में विधायक
लिंगायत समुदाय से 2018 के चुनाव में कुल 58 विधायक जीत कर विधायक बने थे वहीं 2023 में इनकी संख्या 52थी। कर्नाटक में अब तक हुए 223 मुख्यमंत्रियों में से दस सीएम लिंगायत समुदाय से रह चुके हैं।
कित्तूर निर्वाचन क्षेत्र ने पिछले दो चुनावों में सरकार बनाने में अहम रोल निभाया है। भाजपा को यहां से 30 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और कांग्रेस को महज 17 और जेडीएस को दो सीटें मिली थी।
हर बार के चुनाव में सर्वाधिक सीटें भाजपा ने ही जीतती आई है
बता दें कर्नाटक में पिछले दो दशक से यहां ट्रेंड चल रहा है उसमें कोई भी पार्टी दोबारा सरकार नहीं बना पाई है 2004 और 2013 के अलावा हर बार के चुनाव में सर्वाधिक सीटें भाजपा ने ही जीत रही है। भले ही भाजपा के दो बड़े लिंगायत नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए है लेकिन बोम्मई और येदियुरप्पा को इस समुदाय पर अटूट विश्वास है। इसके अलावा पीएम मोदी के चेहरे पर बाकी वोटर वोट करेंगे उनको ये विश्वास है।












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