Solar Storm: क्या होता है सौर तूफान, Aditya-L1 लॉन्च के बाद पृथ्वी से टकराया, जानें इसके नुकसान
Solar Storm News: राष्ट्रीय मौसम सेवा के अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान केंद्र (SWPC) ने कहा है कि सौर तूफान यानी सोलर स्ट्रोम 03 सितंबर को पृथ्वी से टकराया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सौर मिशन आदित्य एल-1 (Aditya-L1) लॉन्च के बाद ये पहली बार था जब, सौर तूफान धरती से टकराया।
ऐसे में हमें ये जानना जरूरी है कि आखिर सौर तूफान क्या होता है...? क्या इसके टकराने से धरती को खतरा हो सकता है? क्या सोलर तूफान से इंसानी जीवन को कोई खतरा होता है...? तो आइए जानें इन सारे सवालों के जवाब...?

What is Solar Storm: सौर तूफान क्या होता है?
सौर तूफान का सीधा कनेक्शन सौर मंडल से होता है। सौर तूफान सीधे तौर पर सूर्य से संबंधित है। सौर तूफान सूरज पर उठने वाली विकराल ज्वालाओं का एक समूह है। जो वहां पैदा होने वाले गैसों के प्रभाव से हुए विस्फोट से पैदा होती है। ये विस्फोट कई परमाणु बमों जितने शक्तिशाली होते है।
What will happen in solar storm: सौर तूफान में क्या होता है?
सौर तूफान सूर्य पर एक विक्षोभ है, जो हेलिओस्फीयर के बाहर की ओर निकल सकता है, जो पृथ्वी और उसके मैग्नेटोस्फीयर सहित पूरे सौर मंडल को प्रभावित करता है। जब सूरज पर विस्फोट होता है तो उससे सोलर फ्लेयर्स (सौर ज्वालाएं) निकलती हैं, जो पृथ्वी की ओर 30 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से आती है।
Can solar storms affect humans: क्या इंसानी जीवन को सौर तूफान से खतरा है?
अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक सौर तूफान से ग्रह पर जीवन के लिए कोई खतरा होने की संभावना नहीं होती है। क्योंकि ये तूफान धरती के बाहर-बाहर रहता है...इसलिए इससे इंसानी जीवन को कोई खतरा नहीं है।
How serious is solar storm: कितना गंभीर हो सकता है सौर तूफान
सौर ज्वालाओं से आवेशित कणों की विशाल धाराओं को कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है। जब ये पृथ्वी से टकराती हैं तो सूरज से धरती पर विद्युत आवेशों और चुंबकीय क्षेत्रों की एक धारा भेजती है।
जिसका असर उपग्रहों के जरिए होने वाले संचार तंत्र, विद्युत ग्रिड, नेविगेशन और संचार प्रणालियों पर पड़ता है और मामूली दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा आश्चर्यजनक ध्रुवीय दृश्य देखने को भी मिल सकते हैं। फरवरी 2011 में चीन में आए सौर फ्लेयर की वजह से पूरे देश में रेडियो संचार बाधित हो गया था।
what is Coronal Mass Ejections: कोरोनल मास इजेक्शन क्या है?
SWPC के मुताबिक के, कोरोनल मास इजेक्शन (CME) सूर्य के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का बड़ा निष्कासन है। वे अरबों टन कोरोनल सामग्री को बाहर निकाल सकते हैं और एक एम्बेडेड चुंबकीय क्षेत्र ले जा सकते हैं जो पृष्ठभूमि सौर पवन इंटरप्लेनेटरी चुंबकीय क्षेत्र (IMF) की ताकत से ज्यादा मजबूत है।
सीएमई सूर्य से बाहर की ओर 250 किलोमीटर प्रति सेकंड (किमी/सेकंड) से धीमी गति से लेकर 3000 किमी/सेकेंड तक की तेज गति से यात्रा करते हैं।
solar storm type: कितने तरह के होते हैं सौर तूफान?
सौर तूफानों की तीव्रता को G1 से G5 के पैमाने पर वर्गीकृत किया जाता है। G1 तूफान पैमाने पर सबसे कमजोर होते हैं और नियमित आधार पर, हर महीने कई बार आ सकते हैं।
G1 भू-चुंबकीय तूफान से पृथ्वी पर जीवन को कोई नुकसान होने की संभावना नहीं है, लेकिन फिर भी यह पावर ग्रिड को प्रभावित कर सकता है और जीपीएस सिस्टम और मोबाइल उपकरणों के लिए उपयोग किए जाने वाले कुछ उपग्रह कार्यों को प्रभावित कर सकता है।
G5 तूफान सबसे तीव्र होते हैं और बहुत कम आते हैं। कैरिंगटन घटना अब तक दर्ज किया गया सबसे बड़ा सौर तूफान था और यह 1859 में हुआ था।












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