क्या है पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, मणिपुर में सेना पर हमले के पीछे इस आतंकी संगठन का हाथ
नई दिल्ली, 13 नवंबर: मणिपुर में सेना की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए हमले में सीओ समेत सात जवान शहीद हुए हैं। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के सिनघाट सब-डिवीजन में ये हमला हुआ है। हमले में कर्नल और उनके परिवार के सदस्य भी शहीद हो गए हैं। मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का नाम इस हमले के पीछे आया है। आइए आपको बताते हैं कि इस आतंकी संगठन का इतिहास क्या है।

1978 में बना था ये संगठन
मणिपुर में हुए इस आतंकवादी हमले ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर फिर से ध्यान दिला दिया है। जिसे इसके पीछे माना जा रहा है। पीएलए की स्थापना एन बिशेश्वर सिंह ने 25 सितंबर, 1978 को मणिपुर को भारत से अलग आजाद देश बनाने की मांग के लिए की थी। बिशेश्वर सिंह ने यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) से अलग होकर ये संगठन बनाया था। ये संगठन आज मणिपुर के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक है।

चीन से मिलती है इसको मदद
स्वतंत्र मणिपुर की मांग करने वाले पीपुल्स लिबरेशन आर्मी संगठन को भारत सरकार ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। पहले भी इस संगठन का नाम मणिपुर में भारतीय सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए आता रहा है। जानकारी के मुताबिक इस संगठन को चीन से समर्थन मिलता रहा है। ये असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर त्रिपुरा, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में भी अलगाववाद को बढ़ावा देता रहा है।

पीएलए मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट का भी हिस्सा
1989 में पीएलए ने मुख्यधारा की राजनीति के लिए के रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) नाम का राजनीतिक दल भी बनाया था। पीएलए मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट का भी सदस्य है, जो मणिपुर के तीन अलगाववादी संगठन का एक छाता संगठन है।
बता दें कि शनिवार को असम राइफल्स यूनिट के कमांडिंग अफसर के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया, तब काफिले में त्वरित प्रतिक्रिया टीम के सदस्य और अफसर के परिवार वाले शामिल थे। हमले में कमांडेंट और जवानों के शहीद होने समेत उनके परिवार के लोगों की मौत हुई है।
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