कैसे संभव है 'वन नेशन- वन इलेक्शन'? जानिए कैसे होगा लागू और क्या होगा फायदा
One Nation One Election Bill: देश में एक बार फिर 'वन नेशन- वन इलेक्शन' यानी एक देश-एक चुनाव का मुद्दा गर्माया गया है। संसद के विशेष सत्र के ऐलान के साथ ही इसकी भी चर्चा तेज हो चुकी है। केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र को बुलाया है।
जिसे लेकर बताया जा रहा है कि इस विशेष सत्र में मोदी सरकार कई अहम बिल पेश कर सकती हैं, जिनमें 'वन नेशन- वन इलेक्शन' का बिल भी शामिल किया जा सकता है। ऐसे में जानिए यह कैसे लागू होगा और इसका क्या फायदा होगा।

पिछले 10 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार ने कोई विशेष सत्र बुलाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार 'वन नेशन वन इलेक्शन' बिल ला सकती है। दरअसल, साल 2018 से ही केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जोर देती नजर आई है, लेकिन विपक्ष की ओर से इसका तगड़ा विरोध झेलना पड़ा है।
वन नेशन वन इलेक्शन क्या है?
आसान भाषा में इसका मतलब एक देश और एक चुनाव यानी एक ही वक्त पर लोकसभा और विधानसभा चुनावों को साथ कराना। मौजूदा समय में बीजेपी की सरकार इसके पक्ष में है। बीजेपी का विचार है कि वन नेशन वन इलेक्शन से देश में चुनावों का खर्चा कम आएगा।
जानिए क्या होगा फायदा?
दरअसल, लगातार हो रहे चुनावों के चलते विकास कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी। देश में बार-बार होने वाले चुनावों पर खर्च बचेगा। वोटिंग के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती पर खर्चा कम होगा।
कैसे संभव है 'वन नेशन- वन इलेक्शन'?
आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब देश में वन नेशन और वन इलेक्शन होने जा रहा है। साल 1967 तक देश में इसी नीति के आधार पर चुनाव होते थे। जिसका मतलब है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक ही हुआ करते थे, लेकिन बाद में कुछ राज्यों में 1968 और 1969 में चुनाव करवाने पड़े और लोकसभा के चुनाव साल 1970 में हुए। इस वजह तब से अब तक दोनों चुनाव समय पर नहीं हो सके, लेकिन अब फिर से ऐसी नीति लागू हो सकती है।
अब बिल लाकर संविधान में संशोधन जरूरी
गौरतलब है कि साल लोकसभा के साथ ही कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव है। और फिर बाकी राज्यों के विधानसभा चुनाव होंगे, लेकिन वन नेशन वन इलेक्शन के लिए कुछ विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाना होगा तो किसी को समय से पहले भंग करना होगा। इसलिए ये सब बिना संविधान संशोधन के मुमकिन नहीं है।












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