देश में पहली बार 'छोटे' अपराधों के लिए दी जा सकेगी सामुदायिक सेवा की सजा, नए बिल में कम्युनिटी सर्विस क्या है?
Community Service punishment In India: केंद्र सरकार ने देश में पहली बार "छोटे" अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा यानी कम्युनिटी सर्विस को एक सजा के रूप में पेश करने का प्रस्ताव दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 11 अगस्त को तीन बिल पेश किए। इसमें भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023, (Bharatiya Nyaya Sanhita Bill), भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 (Bharatiya Sakshya Bill) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक (The Bharatiya Nagrik Suraksha Sanhita Bill) शामिल हैं। ये तीनों बिल इंडियन पीनल कोड 1860 (IPC), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1898 (CrPC) और एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे।

इस बिल में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि देश में पहली बार अब सजा के एक नए प्रारूप यानी सामुदायिक सेवा की शुरुआत की गई है। अब देश में पहली बार 'छोटे' अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) की सजा दी जाए सकेगी। आइए जानें नए बिल में शामिल सजा के तौर पर कम्युनिटी सर्विस क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 के उद्देश्य और कारणों के बयान में कहा गया है कि "छोटे अपराधों के लिए सजा के रूप में पहली बार सामुदायिक सेवा देने का प्रस्ताव है।"
गौरतलब है कि भारतीय अदालतों में मामूली अपराध के लिए दोषियों को धार्मिक स्थलों, आश्रय स्थलों पर सेवा करने, वृक्षारोपण आदि करने के आदेश के बाद छोड़ा जाता है लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता बिल में छोटे अपराधों के लिए भी सामुदायिक सेवा का प्रावधान को शामिल किया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान जिसके तहत सामुदायिक सेवा को एक वैकल्पिक सजा के रूप में माना गया है, वो है आपराधिक मानहानि से संबंधित। पहले आपराधिक मानहानि में जहां अधिकतम सजा दो साल की जेल है। लेकिन नए विधेयक के तहत एक दोषी को केवल सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) प्रदान करने के आदेश के साथ छोड़ा जा सकता है।
इन-इन मामलों में सामुदायिक सेवा की सजा
सरकार का यह कदम मानहानि को घोर अपराध की श्रेणी में रखता है। 2023 विधेयक की धारा 354 (2) में कहा गया है, "जो कोई भी दूसरे की मानहानि करेगा, उसे साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा।"
मानहानि के अलावा इस विधेयक में लोक सेवकों के गैर कानूनी रूप से कारोबार करने और कानूनी शक्ति के अनुपालन को रोकने, आत्महत्या के प्रयास, सार्वजनिक नशा जैसे अपराधों के लिए भी सामुदायिक सेवा को दंड के तौर पर शामिल किया गया है।
वहीं 5 हजार रुपये कम की चोरी, जिसकी भरपाई दोषी ने कर दी है, उस हालात में भी कोर्ट दंडात्मक प्रावधान के तहत सामुदायिक सेवा को दंड दे सकता है।
कम्युनिटी सर्विस की सजा सकारात्मक
भारत में अब तक सामुदायिक सेवा यानी कम्युनिटी सर्विस की सजाआपराधिक न्याय प्रणाली का हिस्सा नहीं रही है। अभी तक कोर्ट के जज अपने विवेक से दोषियों को सामुदायिक सेवा करने की सजा देते थे, जिसमें पौधे लगाना और उनकी बड़े होने तक देखभाल करना, जल स्रोतों की साफ सफाई करना, ट्रैफिक संचालन में मदद करने जैसी चीजें शामिल हैं। इन सजा का दंड संहिता में कोई जिक्र नहीं था। लेकिन अब देश में सजा के एक नए प्रारूप के तहत कम्यूनिटी सर्विस की भी शुरुआत होगी।
भारत सरकार भारतीय कानूनी ढांचे में छोटे अपराधों के लिए सजा के रूप में सामुदायिक सेवा शुरू करने के प्रस्ताव के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन और कई अन्य विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
पहली बार अपराधियों के पुनर्वास के तरीके के रूप में पेश की गई सामुदायिक सेवा भीड़भाड़ वाली जेलों की समस्या का समाधान करने के लिए एक अहम कदम हो सकती है।












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