2019 लोकसभा चुनाव: 6.5 करोड़ 'फर्स्ट टाइम वोटर' पर दारोमदार

नई दिल्ली- बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बार-बार पहली बार मतदाता (First Time Voter) बने युवाओं को रिझाने की कोशिशें यूं ही नहीं हो रही हैं। इनकी संख्या इतनी ज्यादा है कि जिस भी पार्टी के पक्ष में वोट करेंगे उसकी दिल्ली दूर नहीं रहेगी। हाल ही में चुनाव आयोग की ओर से जारी मतदाता सूची को देखने से साफ हो जाता है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्यों कहा है कि अगर मजबूत और बहुमत वाली सरकार नहीं बनी तो यह एक तरह से फर्स्ट टाइम वोटर का अपमान होगा। दरअसल, यह एक ऐसा मतदाता वर्ग है, जो 2019 के लोकसभा चुनाव की दिशा बदल सकता है।

2019 में 'फर्स्ट टाइम वोटर' का गणित

2019 में 'फर्स्ट टाइम वोटर' का गणित

चुनाव आयोग ने पिछले 22 फरवरी को जो मतदाता सूची जारी की है, उसके मुताबिक इस साल 18 से 19 वर्ष की उम्र के 1.6 करोड़ नए मतदाता जुड़ गए हैं। इनको मिलाकर 2019 के आम चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या 90 करोड़ हो चुकी है। जबकि, 2014 के लोकसभा चुनावों में कुल मतदाताओं की संख्या 83.4 करोड़ ही थी। लेकिन, इस साल होने जा रहे लोकसभा चुनाव की बात करें, तो कुल 6.5 करोड़ मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। इसका कारण ये है कि पिछले आम चुनावों के बाद 2016 में 1.8 करोड़, 2017 में 1.5 करोड़ और 2018 में 1.59 करोड़ फर्स्ट टाइम वोटर शामिल हुए थे। यानि इन्होंने अबतक एकबार भी अपना सांसद चुनने के लिए वोट नहीं डाला है। 2019 में राजस्थान में सबसे ज्यादा 20.3 लाख, पश्चिम बंगाल में 20 लाख, उत्तर प्रदेश में 16.76 लाख, मध्य प्रदेश में 13.6 लाख और महाराष्ट्र 11.99 लाख नए मतदाता बने हैं। यानि 2018 और 2019 में वोटर बनने वाले अधिकतर वोटरों का जन्म 21वीं सदी में हुआ है। वहीं, 2016 में पश्चिम बंगाल में 79 लाख, यूपी में 73.8 लाख और राजस्थान में 61.2 लाख नए वोट बने थे, जिनका जन्म 20वीं सदी के आखिर में हुआ था। कुल मिलाकर ये युवा वोटर हैं, जो आने वाली सरकार का फैसला करने वाले हैं।

बीजेपी का मंसूबा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में लगातार युवा मतदाताओं को बीजेपी के पक्ष में रिझाने की कोशिश करते रहे हैं। इस साल की शुरुआत में भी उन्होंने बीजेपी के कार्यकर्ताओं से कहा था कि 2019 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें उन्हें भी वोटिंग का मौका मिलेगा, जिन्होंने 21वीं सदी में जन्म लिया है। 2018 से ही वे इस बात पर जोर देते रहे हैं। अभी हाल ही में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इसी से जुड़ा एक बयान देकर पार्टी का मंसूबा जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि, अगर मजबूत और बहुमत वाली अच्छी सरकार नहीं बनी, तो हम कम से कम 50 साल पीछे चले जाएंगे। उनके अनुसार ऐसा होना एक तरह से पहली बार वोट देने वालों का अनादर करना होगा।

किसके प्रभाव में युवा?

किसके प्रभाव में युवा?

आज के भारतीय युवाओं ने स्मार्ट फोन से खेल-खेल कर होश संभाला है। संचार क्रांति ने पूरी दुनिया को उसकी उंगलियों में थमा दिया है। वो भले ही राजनीति में खुलकर दिलचस्पी नहीं दिखाता हो, लेकिन देश और दुनिया में क्या चल रहा है, उससे पूरी तरह वाकिफ है। सोशल मीडिया की बदलौत वो उसे ऐसी चीजों के बारे में भी पता होता है, जिससे उसके माता-पिता वंचित रहे हैं। बदली हुई दुनिया ने उसे जातपात जैसी सामाजिक बुराइयों से काफी हद तक निकलने में मदद भी की है। लेकिन, वो देश के लिए फैसला क्या लेगा, ये उसी को पता है।

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