बजट 2018: क्या हुआ सेस की रकमों का जो आपने स्वच्छ भारत और कृषि कल्याण के नाम पर जमा किया?
नई दिल्ली। नए वित्तीय वर्ष का बजट अगले कुछ दिनों के भीतर पेश कर दिया जाएगा। हालांकि इस बार बजट में बड़ी राहत यह मिलेगी कि वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के कारण इस बार कोई सेस (अधिभार) नहीं लगाया जाएगा। हालांकि अब सवाल यह है कि बीते सालों में जनता ने जो सेस दिया है , उसका अब तक क्या हुआ? बता दें कि GST से पहले भारत भर में 20 सेस लागू थे, जैसे स्वच्छ भारत, कृषि कल्याण सेस,एजुकेशन सेस इत्यादि। ये सभी सेस किसी उद्देश्य के चलचे लगाए जाते थे। हालांकि यह चौंकाने वाली बात यह है कि तमाम सेसों से जुटाई गई इन राशियों में से बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं किया जा सका है।

CAG के अनुसार...
नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (CAG) के अनुसार 2016-17 तक 6 बड़े सेस के माध्यम से सरकार ने 4 लाख करोड़ रुपए की राशि इकट्ठा की थी। इसमें से 1.81 लख करोड़ रुपए यानी 45 फीसदी राशि खर्च नहीं की गई है। इतना ही नहीं इस रकम को सरकार के खाते से जरूर स्कीम के लिए ट्रांसफर नहीं किया गया है।

2016-17 में 83,497 करोड़ रुपये जुटाए
साल 1996-2017 के दौरान रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट सेस के नाम पर 7,885.54 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए थे, इसमें से सिर्फ 609.46 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। कुछ ऐसा ही हाल माध्यमिक और उच्च शिक्षा सेस के साथ भी हुआ, जिसके तहत साल 2016-17 में 83,497 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसे स्कीम के फंड में ट्रांसफर नहीं किया गया।

साल 2016-17 में आंकड़ा तेजी से बढ़ा
बीते तीन सालों में सेस और सरचार्ज से होने वाली कमाई तीन गुना ज्यादा तक बढ़ गई 2014-15 में सेस और सरचार्च से 75,533 करोड़ रुपए इकट्ठा हुए थे, जबकि साल 2016-17 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा और 2,25,308 करोड़ रुपए इकट्ठा किए गए।












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