'जय संविधान' के संसद में नारे लगाकर आखिर क्‍या करना चाहता है विपक्ष?

संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को फिर हंगामे और शोर के बीच शुरू हुआ। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने अडानी और संभल से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा, जिसकी वजह से लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही फिर ठप रही। वहीं बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी संविधान की प्रतियां लेकर संसद पहुंचे और विपक्ष ने "जय संविधान" के नारे लगाने शुरू कर दिए।

जिस पर लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला ने असंतोष व्यक्त किया और इस बात पर जोर दिया कि सदन को अपनी पूरी गरिमा और नियमों के भीतर काम करना चाहिए। विपक्ष के विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्‍थगित करनी पड़ी। ऐसे में सवाल उठा रहा है कि "जय संविधान" के नारे लगाना अच्‍छी बात है लेकिन सदन में ये नारा लगाकर विपक्ष खासकर कांग्रेस पार्टी क्‍या करना चाहती हैं?

rahul

लोकसभा सत्र के पहले दिन ही संविधान को बनाया हथियार

ये पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस ने हाथ में संविधान की प्रतियां हाथ में लहराते हुए प्रदर्शन किया है। इसकी शुरूआत 2024 को 18वीं लोकसभा के शपथ ग्रहण समारोह से ही हो गई थी। 24 जून 2024 को 18वीं लोकसभा का पहले सत्र में कांग्रेस और विपक्षी सांसदों ने भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने का विरोध किया था और संविधान की प्रति हाथ में लहराते हुए सोनिया गांधी समेत अन्‍य विपक्षी सांसदों ने संविधान बचाओ के नारे लगाए थे।

राहुल गांधी ने शपथ लेते ही लगाए थे "जय संविधान" के नारे

दूसरे दिन राहुल गांधी शपथ ग्रहण के लिए पहुंचे तो उनके हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति थी और उन्‍होंने अंग्रेजी में शपथ लेने के बाद जय हिंद और जय संविधान के नारे लगाए थे।

महाराष्‍ट्र चुनाव प्रचार में संविधान की प्रति

इसके बाद महाराष्‍ट्र चुनाव समेत अन्‍य मौकों पर राहुल गांधी अपने हाथों में संविधान की प्रति हाथ में लेकर स्‍वयं को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक जताते आए हैं। अभी दो दिन पहले उत्‍तर प्रदेश के संभल में जाने पर पुलिस द्वारा रोके जाने पर ट्रैफिक जाम के बीच कार पर खड़े हुए हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति लहराते हुए मीडिया से बात करते नजर आए। वहीं आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि के अवसर पर जय संविधान के नारे सदन में लगाए। इसके बाद संसद के बाहर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी स‍ंविधान की प्रति लेकर नारे लगाते रहे।

आखिर सदन में क्‍यों लगाए "जय संविधान" के नारे?

दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में जो कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन ने भाजपा के खिलाफ जो नैरेटिव फैलाया था उसे अपने लाभ के लिए बनाए रखना चाहती है। याद रहे लोकसभा चुनाव के दौरान जब 'अबकी बार, 400 पार' और संविधान बदल देने का नारा भाजपा ने लगाया था तब विपक्षी इंडिया गठबंधन ने ये नैरेटिव फैलाया कि 400 पार सीटें पाकर भाजपा संविधान बदल देगी और आरक्षण खत्‍म कर देगी।

जिससे भाजपा को भारी संख्‍या में सीटें गवां कर चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा और कांग्रेस और इंडिया गठबंधन में शामिल अन्‍य राजनीति दलों को सीटों के तौर पर फायदा हुआ और इंडिया गठबंधन सदन में मजबूत हुआ।

लेकिन सत्‍ता में तीसरी बार वापसी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलितों और पिछड़ी जातियों की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।जिसका परिणाम हाल में संपन्‍न हुए हरियाणा और महाराष्‍ट्र चुनाव में भी दिखा। जिस कारण सदन में जय संविधान के नारे लगाना विपक्षी दलों की ये खलबलाहट और बौखलाहट है। वो हर हाल में संविधान के हितैषी बनकर किसी भी तरीके से दिल्‍ली समेत अन्‍य राज्‍यों में होने वाले चुनाव से पहले अपनी स्थित को मजबूत करना चाहते है।

कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्षी पार्टियां संसद में संविधान जय के नारे लगाकर सीधे दलित और ओबीसी वोट बैंक को टॉरगेट करना चाह रहे हैं। दलित को ये पता है कि संविधान के रचयिता बाबा भीमराव अंबेडकर हैं। विपक्षी दलों द्वारा संविधान के लिए मुखर होना इन महत्वपूर्ण मतदाता वर्गों के बीच अपने समर्थन आधार को मजबूत करने के उद्देश्य से है।

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