कृषि कानूनों को लेकर ब्रिटिश संसद में हुई चर्चा पर बोले शशि थरूर- लोकतंत्र में हर मुद्दे पर बोलने का अधिकार
किसानों को लेकर ब्रिटिश संसद में हुई चर्चा पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि लोकतंत्र में सभी को बोलने का अधिकार है।
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ भारत में हो रहे किसान विरोध प्रदर्शनों को लेकर ब्रिटेन की संसद में हुई चर्चा के बाद ब्रिटेन के राजदूत को भारत सरकार द्वारा भेजे गए सम्मन को लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि एक लोकतांत्रिक देश में हर किसी को किसी भी मुद्दे पर बात करने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि, 'मैं भारत सरकार पर कोई दोषारोपण नहीं करना चाहता लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि एक लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि किसी भी मुद्दे पर बात करने के लिए स्वतंत्र हैं।' उन्होंने आगे कहा कि जैसे हम भारत में फिलिस्तीन के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं या फिर किसी अन्य देश के घरेलू मुद्दे को चर्चा का विषय बना सकते हैं उसी प्रकार ब्रिटिश संसद के पास भी यह अधिकार है।
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उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार को अपनी बात रखने के लिए कोई दोषारोपण नहीं करना चाहता, लेकिन हमें यह ध्यान में रखना होगा वे जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि हैं और उन्हें अपना दृष्टिकोण रखने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ बहुत बड़ा चौंकाने वाला है। हमें इसे सामान्य तौर पर लेना चाहिए।' गौरतलब है, गुरुवार को ब्रिटेन की संसद में भारत में कृषि कानूनों के विरोध में लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन और भारतीय प्रेस की आजादी को लेकर चर्चा हुई थी, जिसको भारत सरकार ने गलत ठहराया था। भारत सरकार ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए ब्रिटिश राजदूत को तलब किया था।
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इस चर्चा पर कड़ा विरोध दर्ज किया था। विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने इस मामले को लेकर एक बयान जारी कर कहा था कि, 'ब्रिटेन की संसद में हुई इस चर्चा ने एक अन्य लोकतांत्रिक देश की राजनीति में हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्व किया है। ब्रिटिश सांसदों को (विशेष रूप से एक लोकतांत्रिक साथी के संबंध में) गलत तरीके से घटनाओं को प्रस्तुत करके वोट बैंक की राजनीति से बचना चाहिए।'












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