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Bengal SIR: ‘अनमैप्ड वोटर’ पर अचानक क्यों रुकी EC की सुनवाई? कौन हैं ये Unmapped voters, बंगाल में जमकर विवाद

Bengal SIR Unmapped voters News: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग का एक फैसला अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत जिन मतदाताओं को 'अनमैप्ड' बताया गया था, उनकी सुनवाई पर अब अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब चुनाव आयोग पर विपक्षी दल लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं और सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है।

दरअसल चुनाव आयोग ने बंगाल में वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा के दौरान लाखों मतदाताओं को 'अनमैप्ड' की श्रेणी में डाल दिया था। इन मतदाताओं के नाम चुनाव आयोग के सेंट्रल सॉफ्टवेयर में 2002 की आखिरी इंटेंसिव रिवीजन वाली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पा रहे थे। नियम के मुताबिक ऐसे वोटरों को सुनवाई के लिए बुलाया जाना था, ताकि वे अपनी पात्रता साबित कर सकें।

Bengal SIR Uunmapped voters News

🟡 कौन हैं 'अनमैप्ड' वोटर (Who is Uunmapped voters)

डिलीट किए गए नामों के अलावा करीब 32 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें 2002 की सूची से लिंक नहीं होने के कारण 'अनमैप्ड' बताया गया। इन लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर दस्तावेज देने के निर्देश थे। लेकिन अब तकनीकी कारणों से गलत तरीके से चिह्नित किए गए वोटरों को इस प्रक्रिया से राहत दी गई है।

🟡 अचानक क्यों रोकी गई सुनवाई?

27 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर साफ निर्देश दिए कि जिन मतदाताओं को केवल सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के चलते 'अनमैप्ड' दिखाया गया है, उन्हें सुनवाई के लिए न बुलाया जाए।

आयोग को जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों से जानकारी मिली कि कई ऐसे वोटर या उनके बच्चे 2002 की हार्ड कॉपी वोटर लिस्ट में मौजूद हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से BLO ऐप में उनका डेटा नहीं दिख रहा।

🟡 तकनीकी खामी बनी बड़ी वजह

असल समस्या 2002 की मतदाता सूची के डिजिटल फॉर्मेट से जुड़ी है। आयोग के अनुसार उस समय की पूरी PDF फाइल को CSV या टेक्स्ट फॉर्मेट में सही ढंग से कन्वर्ट नहीं किया जा सका। इसी वजह से BLO ऐप कई मामलों में लिंक नहीं दिखा पाया और हजारों मतदाता गलत तरीके से 'अनमैप्ड' हो गए। हालांकि हार्ड कॉपी रिकॉर्ड में उनकी मौजूदगी साफ तौर पर दर्ज है।

🟡 किन मामलों पर लागू नहीं होगी रोक?

यह रोक उन मामलों पर लागू नहीं होगी, जहां चुनावी अधिकारियों ने जमीनी सत्यापन के बाद किसी मतदाता को 'अनमैप्ड' घोषित किया है। ऐसे मतदाताओं को आगे भी सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि अगर भविष्य में किसी केस में गड़बड़ी पाई जाती है, तो नोटिस जारी कर दोबारा सुनवाई हो सकती है।

🟡 सियासत गरम, TMC का आयोग पर हमला

इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सिस्टम जनरेटेड नोटिसों के जरिए आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस प्रक्रिया को गलत और अमानवीय बताया। खासतौर पर बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर TMC ने सवाल उठाए।

🟡 अब आगे क्या होगा?

चुनाव आयोग का कहना है कि जिन वोटरों को तकनीकी गड़बड़ी के कारण 'अनमैप्ड' बताया गया है, उनकी संख्या अब घटेगी। BLO को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन करें, फोटो लें और रिकॉर्ड अपलोड करें। आयोग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटेगा।

🟡 चुनाव से पहले बढ़ेगा विवाद

2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले SIR और वोटर लिस्ट का मुद्दा बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी हथियार बनता दिख रहा है। एक तरफ आयोग प्रक्रिया को तकनीकी सुधार बता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र पर खतरा करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं।

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