West Bengal SIR Draft List: ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं तो घबराएं नहीं, इन डॉक्यूमेंट से होगा सुधार
West Bengal SIR Draft List: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) का पहला चरण पूरा हो चुका है। 16 दिसंबर 2025 को चुनाव आयोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा।
इस सूची में मतदाता अपने नाम देख सकते हैं। अगर इस लिस्ट में नाम नहीं है तो घबराने की कोई जरुरत नहीं है बस आप सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, कई लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट कट सकते हैं ऐसे में वो ड्रॉफ्ट लिस्ट में अपना नाम नहीं देख पाएंगे। ऐसे मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज़ों की आवश्यकता होगी।

कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं?
अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो उसे भारतीय नागरिकता और वोटर होने की पात्रता साबित करनी होगी। इसके लिए निम्नलिखित 11 में से कोई एक या अधिक दस्तावेज़ जमा किए जा सकते हैं:
- राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी का पहचान पत्र या पेंशनर आईडी
- 1987 से पहले जारी दस्तावेज - पोस्ट ऑफिस, बैंक, LIC या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- पासपोर्ट
- माध्यमिक (10वीं) या अन्य शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र
- राज्य सरकार के किसी विभाग/संस्था द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र (Forest Right Certificate)
- जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) - केवल असम के लिए मान्य
- स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर
- सरकार द्वारा जारी जमीन या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
ध्यान रहे कि केवल आधार कार्ड को पहचान या नागरिकता का एकमात्र प्रमाण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नाम न होने पर क्या करें?
अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है और आपको सुनवाई के लिए बुलाया भी नहीं गया है, तो आपको फॉर्म-6 के तहत Annexure-IV भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराना होगा। यह प्रक्रिया सामान्य मतदाता पंजीकरण के समान है।
यदि आपका नाम 2002 की मतदाता सूची में है, तब भी सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है या नहीं-यह स्थानीय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के विवेक पर निर्भर करेगा।
फर्जी दस्तावेज देने पर होगी कार्रवाई
चुनाव आयोग ने फर्जी दस्तावेज देने वालों के लिए चेतावनी जारी की है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 के तहत नकली कागजात बनाने या जमा करने पर सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। आयोग ने कहा है कि हर आवेदन सॉफ्टवेयर के जरिए बारीकी से जांचा जाएगा। दिए गए दस्तावेज़ और जानकारी के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि किसी व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाया जाए या नहीं।
सुनवाई के लिए जरूर जाएं
पहले एक विधानसभा क्षेत्र में दिन में 50 सुनवाई तय की जाती थीं, लेकिन अब आयोग जरूरत पड़ने पर इसे 100 से अधिक करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि तय समय में पूरी प्रक्रिया पूरी की जा सके। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न होने पर मतदाता घबराएं नहीं। सही दस्तावेज जमा करके और फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने से आप आसानी से अपना नाम फाइनल लिस्ट में जोड़वा सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और लोकतांत्रिक है, और मतदाता के अधिकारों की रक्षा करती है।












Click it and Unblock the Notifications