हरियाणा ने सुगम संपत्ति पंजीकरण और भूमि प्रबंधन के लिए स्वचालित उत्परिवर्तन प्रणाली शुरू की
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संपत्ति पंजीकरण और भूमि अभिलेख प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से स्वचालित ऑटो म्यूटेशन सिस्टम (Automated Auto Mutation System) और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 (Paperless Registration 2.0) की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाना है, जिससे नागरिक अलग से आवेदन किए बिना ऑनलाइन म्यूटेशन रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकें।

सैनी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नई प्रणाली संपत्ति पंजीकरण को म्यूटेशन प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत करती है, जिससे देरी कम होती है और सरकारी कार्यालयों में कई बार जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। यह प्रयास हरियाणा की व्यापक डिजिटल शासन को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की रणनीति का हिस्सा है।
प्रणाली संपत्ति लेनदेन में दोनों पक्षों के लिए आधार-आधारित ई-केवाईसी (Aadhaar-based e-KYC) को अनिवार्य करती है, जिससे पूरी पहचान सत्यापन सुनिश्चित होता है। आवेदक अब ऑनलाइन अपने आवेदनों को ट्रैक कर सकते हैं, डिजिटल रूप से दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और क्यूआर कोड (QR codes) का उपयोग करके रिकॉर्ड सत्यापित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, पासपोर्ट सेवाओं के समान, संपत्ति पंजीकरण के लिए तत्काल (tatkal) नियुक्तियों की शुरुआत की जाएगी।
विभागीय अनुमोदन, जिसमें अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificates - NOCs) और योजना मंजूरी (planning clearances) शामिल हैं, ऑनलाइन संसाधित किए जाएंगे, जिससे कागजी कार्रवाई और प्रक्रियात्मक देरी कम होगी। ऑटो म्यूटेशन सिस्टम (Auto Mutation System) ने राज्यव्यापी लॉन्च से पहले एक महीने के पायलट चरण से गुजरा, जिसमें इस अवधि के दौरान लगभग 50,000 म्यूटेशन स्वतः संसाधित हुए।
लंबित मामलों पर प्रभाव
नई प्रणाली के तहत, संपत्ति पंजीकरण के दौरान म्यूटेशन नंबर स्वचालित रूप से उत्पन्न होते हैं। संयुक्त स्वामित्व अभिलेखों के विभाजन (partition of joint ownership records) से जुड़े मामलों को 24 घंटे के भीतर अनुमोदित किया जाएगा, जबकि विभाजन (partition) की आवश्यकता वाले मामलों को 10 दिनों के भीतर हल किया जाएगा। हरियाणा में छह लाख से अधिक लंबित म्यूटेशन मामलों में से चार लाख से अधिक को पहले ही निपटाया जा चुका है, और शेष मामलों को जल्द ही हल करने की उम्मीद है।
अधिकारियों की प्रतिक्रियाएँ
राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने इस सुधार की सराहना करते हुए इसे एक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित कदम बताया, जिसने हरियाणा को डिजिटल भूमि प्रशासन प्रणाली अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में से एक बना दिया है। उन्होंने बताया कि इस पहल से नागरिकों को पटवारियों और राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
इन प्रणालियों की शुरुआत हरियाणा के भूमि प्रशासन प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर, राज्य अपने नागरिकों को तेज और अधिक कुशल सेवाएं प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
With inputs from PTI












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