12 साल की आयु में अंग दान का संकल्प, शादी के मौके पर हमसफर समेत 1000 लोगों संग Organ Donation
शादी के दिन लोग जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। एक युगल ऐसा भी है जिसने मौत के बाद भी स्मृतियां अमर रहें ऐसा काम किया है। अंगदान का संकल्प लेने के बाद युवा दंपती चर्चा में है। जानिए प्रेरक कहानी

शादी को जीवन का सबसे यादगार लम्हा माना जाता है। हालांकि, आंध्र प्रदेश में रहने वाले कपल ने शादी के साथ-साथ कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसके कारण इनकी चर्चा हो रही है। युगल की चर्चा इनकी शादी के अनोखे कार्ड के कारण भी हो रही है। शादी के मौके को यादगार बनाने के लिए इस युगल ने अंगदान का संकल्प लिया है। शादी के निमंत्रण कार्ड पर लिखा है, अपना अंग दान करें, एक जीवन बचाएं। शादी के इस कार्ड को अपनी तरह के पहला मामला बताया जा रहा है। जानिए ऑर्गन डोनेशन की प्रेरक कहानी

शादी के दिन अंगदान का फैसला
आंध्र प्रदेश के सतीश कुमार और उनकी मंगेतर संजीव रानी ने अपनी शादी के दिन अपने अंग दान करने का फैसला लिया है। 29 दिसंबर को पूर्वी गोदावरी जिले के निदादावोलु में होने वाली शादी में अंगदान करने वाला ये युगल चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

12 साल की एज में अंगदान का फैसला
अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ा रहे इस युगल के बारे में न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक युगल की पहल से प्रेरित होकर, उनके लगभग 60 रिश्तेदारों ने भी अंगदान के लिए साइन अप किया है। दूल्हे सतीश ने बताया कि उन्होंने अंग दान की योजना तब बनाई थी जब वह सिर्फ 12 साल के थे।

'विलिंग टू हेल्प' फाउंडेशन से मिली मदद
बकौल सतीश, उन्होंने एक मां को कहते सुना था कि अगर कोई अपना अंग दान कर देता तो उसके बेटे को बचाया जा सकता था। उसी वक्त उन्होंने अपने अंगों को दान करने का फैसला कर लिया। उन्होंने कहा, ऑर्गन डोनेशन का फैसला कर लिया, लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में 'विलिंग टू हेल्प' फाउंडेशन से संपर्क करने पर उन्हें मार्गदर्शन मिला।

आईटीआई कॉलेज के प्रशिक्षक हैं सतीश
पेशे से निदादावोलू में रवींद्र इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) में ट्रेनर के रूप में काम कर रहे सतीश कुमार बताते हैं कि अंग दान पर जागरूकता समय की जरूरत है। उन्होंने बताया, वे अपनी शादी के जरिए लोगों का ध्यान ऑर्गन डोनेशन की तरफ खींचना चाहते हैं। सतीश ने बताया कि शादी में कम से कम 1,000 लोगों के आने की उम्मीद है, ऐसे में अंगदान का संकल्प लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
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युवाओं का रक्तदान प्रेरित करता है
आईटीआई कॉलेज के प्रशिक्षक होने के बावजूद मानवीय आधार पर लोगों की मदद करने का फैसला लेने वाले सतीश की जमकर सराहना हो रही है। अंगदान के क्षेत्र में काम कर रही संस्था- सावित्रीभाई फुले एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की प्रमुख गुडुरु सीता महालक्ष्मी ने कहा, बहुत से लोग रक्तदान करने के लिए आगे आते हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब युवाओं के एक समूह ने सामूहिक अंगदान के लिए मुझसे संपर्क किया है। उन्होंने कहा, अंगदान के बारे में सोचने वाली नई पीढ़ी को इतना संवेदनशील और विचारशील देखकर अच्छा लगता है।












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