Next Two Week Weather Status: अगले 14 दिनों में मॉनसून की भारत में कैसी होगी चाल? कहां-कहां बार‍िश का अलर्ट?

July Next Two Week Weather Status: दक्षिण भारत के रास्‍ते भारत में जून से प्रवेश करने वाला मॉनसून लगातार अपने अलग-अलग रंग द‍िखा रहा है। जुलाई का महीने अब अपने अंत के करीब आ चुका है। इस वक्‍त मॉनसून को पूरे भारत में आकार ले लेना चाह‍िए, लेक‍िन देश की राष्‍ट्रीय राजधानी द‍िल्‍ली अभी तक मॉनसून के पूरे सुख से वंच‍ित है। हल्‍की बार‍िश से मॉनसून की झलक भर ही स‍िर्फ नजर आती है।

इस बीच, मौसम व‍िभाग ने दो सप्‍ताह यानी 14 द‍िनों के मौसम का पूर्वानुमान जारी क‍िया है। ज‍िसके तहत, पश्चिम, मध्य, पूर्व और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले 5 दिनों के दौरान इस क्षेत्र में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। अगले 5 दिनों के दौरान कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात राज्य, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग/कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। अगले 5 दिनों के दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश पश्चिमी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान में छिटपुट भारी बारिश की संभावना है। आइए जानते हैं 14 दिन कहां-कहां होगी बार‍िश?

Weather Forecast

7 द‍िनों का बार‍िश का अलर्ट?

  • 18-20 जुलाई के दौरान कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
  • 19 जुलाई को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, गुजरात राज्य, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम।
  • 19 और 20 जुलाई को विदर्भ, दक्षिण छत्तीसगढ़।
  • 19 जुलाई को दक्षिण ओडिशा, रायलसीमा, तमिलनाडु में बार‍िश की संभावना है।
  • 18-21 जुलाई के दौरान तेलंगाना में।
  • 20 जुलाई को ओडिशा, मराठवाड़ा में।
  • 20 और 21 जुलाई को पश्चिमी राजस्थान।
  • 19 और 21 और 22 जुलाई को हरियाणा-चंडीगढ़।
  • 21 जुलाई को हिमाचल प्रदेश में बार‍िश का अलर्ट है।
  • 21 और 22 जुलाई को पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।
  • 20-22 जुलाई के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही गंगा के तटीय पश्चिम बंगाल में भी।

दूसरे हफ्ते (25 से 31 जुलाई, 2024) में बारि‍श का पूर्वानुमान
मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों और भारत के पश्चिमी तट पर सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है और प्रायद्वीपीय भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को छोड़कर भारत के बाकी हिस्सों में सामान्य वर्षा होने की संभावना है, जहां सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।

क्‍या है बार‍िश का पैमाना?

  • भारी बार‍िश: 64.5 से 115.5 मिमी
  • बहुत भारी बार‍िश: 115.6 से 204.4 मिमी,
  • अत्यधिक भारी बार‍िश: 204.4 मिमी

(यहां क्‍ल‍िक करके पढ़ें पूरी ड‍िटेल)

भारत का मानसून कैलेंडर
भारत में मानसून का सही समय हर साल जून से सितंबर तक होता है। इसे चार प्रमुख चरणों में बांटा जा सकता है। आइए समझते हैं कैसे?

जून प्रारंभ (1-15 जून):

  • केरल में मानसून की शुरुआत: आमतौर पर 1 जून के आसपास, मानसून केरल के तट पर पहुंचता है।
  • दक्षिण भारत में प्रगति: मानसून धीरे-धीरे तमिलनाडु, कर्नाटक, और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ता है।

उत्तर की ओर विस्तार (16-30 जून):

  • महाराष्ट्र, गुजरात, और मध्य भारत: मानसून महाराष्ट्र के तटवर्ती क्षेत्रों में प्रवेश करता है और गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, और ओडिशा तक फैलता है।

जुलाई: पूरे भारत में फैलाव (1-15 जुलाई):

  • उत्तर भारत: मानसून दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, और पश्चिम बंगाल में पहुंचता है।
  • पूर्वी भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश होती है।

विकास और डेंसिटी (16-31 जुलाई):

  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान: मानसून उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश करता है।
  • भारत में व्यापक प्रभाव: इस समय तक लगभग पूरे भारत में मानसून सक्रिय होता है और व्यापक वर्षा होती है।

अगस्त: स्थिरता (1-15 अगस्त):

  • लगातार बारिश: मानसून पूरे भारत में स्थिर हो जाता है, विशेष रूप से पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर राज्यों, और गंगा के मैदानी इलाकों में।
  • बाढ़ की संभावना: कुछ क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

विकास का चरम (16-31 अगस्त):

  • भारी बारिश: अगस्त के दूसरे पखवाड़े में देश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश होती है।
  • कृषि पर प्रभाव: यह समय खरीफ फसलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

सितंबर: धीरे-धीरे कमी (1-15 सितंबर):

  • मानसून की वापसी: मानसून दक्षिण भारत और पश्चिमी भारत से धीरे-धीरे वापस लौटने लगता है।
  • कृषि गतिविधियां: किसान खरीफ फसलों की कटाई की तैयारी शुरू करते हैं।

वापसी (16-30 सितंबर):

  • उत्तर भारत से वापसी: मानसून उत्तर भारत और पूर्वी भारत से वापस लौटने लगता है।
  • सफर का अंत: सितंबर के अंत तक, मानसून ज्यादातर भारत से वापस लौट चुका होता है।

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