Video: अमेरिका में 'बदलूराम का बदन जमीन के नीचे' गाने पर डांस करते अमेरिकी सैनिक

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    Indian Amry और American Army के Soldiers ने जब Badluram गाने पर किया Dance | वनइंडिया हिंदी

    वॉशिंगटन। इंडियन आर्मी के कुछ अफसर और जवान इस समय अमेरिका के वॉशिंगटन के मैक्‍कॉर्ड स्थित ज्‍वॉइन्‍ट बेस लुईस में एक युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा ले रहे हैं। इस युद्धाभ्‍यास के दौरान एक वीडियो आया है जिसमें अमेरिकी सैनिक, भारतीय जवानों के साथ असम रेजीमेंट के मशहूर गीत 'बदलूराम का बदन' पर थिरकते हुए नजर आ रहे हैं। बदलूराम का बदन, रेजीमेंट का एक मशहूर मार्चिंग गीत है और दूसरे वर्ल्‍ड वॉर के दौरान लिखा गया था।

    'हमको उसका राशन मिलता है'

    इस वीडियो को न्‍यूज एजेंसी एएनआई ने शेयर किया है। इस वीडियो में दोनों देशों के सैनिक 'बदलूराम का बदन जमीन के नीचे और हमको उसका राशन मिलता,' पर थिरकते हुए नजर आ रहे हैं। यह गाना इस वर्ष 15 जनवरी को एक बार फिर से सुर्खियों में आया था जब आर्मी डे के मौके पर चीन की सीमा के नजदीक असम रेजीमेंट के जवान और अफसर इस गाने पर डांस करते हुए नजर आ रहे थे। सेना दिवस के मौके को असम रेजीमेंट ने अपने ही तरीके से सेलिब्रेट किया। नॉर्थ सिक्किम में चीन से सटी सीमा पर स्थित पोस्‍ट पर तैनात रेजीमेंट के सैनिकों ने रेजीमेंट गीत 'बदलू राम का बदन' पर कदम से कदम मिलाए। जिस जगह से सैनिकों के डांस का वीडियो आया था वहां पर तापमान ज्‍यादातर समय -40 डिग्री से भी नीचे रहता है।

    कौन थे बदलू राम

    कौन थे बदलू राम

    लीजेंड बदलूराम वर्ल्‍ड वॉर टू के समय असम रेजीमेंट के सैनिक थे। उनकी मृत्‍यु के बाद उनके राशन ने 100 से ज्‍यादा जवानों की भूख उस समय मिटाई जब जापान की सेना ने उन्‍हें घेर लिया और उनकी राशन सप्‍लाई कट कर दी थी। कई दिनों तक जवान इसी राशन पर जिंदा थे और आपको जानकर हैरानी होगी की तब तक बदलूराम की मौत हो चुकी थी। असम रेजीमेंट की स्‍थापना 15 जून 1941 को शिलॉन्‍ग में हुई थी। इस रेजीमेंट की स्‍थापना का मकसद जापान के बढ़ते खतरे का सामना करना था।

    नहीं होता बदलूराम का राशन तो भूख से मर जाते सैन‍िक

    नहीं होता बदलूराम का राशन तो भूख से मर जाते सैन‍िक

    युद्ध के समय जवान बदलू राम शहीद हो गए थे लेकिन उनकी शहादत के बारे में किसी को जानकारी नहीं मिल सकी। इसका नतीता यह हुआ कि उनके हिस्‍से का राशन भेजा जाता रहा। इसकी वजह से अतिरिक्‍त राशन इकट्ठा हो गया। इसी बीच जापान की सेना ने असम रेजीमेंट को चारो ओर से घेर लिया और हर लॉजिस्टिक सपोर्ट की सप्‍लाई कट कर दी। लेकिन बदलूराम को भेजा गया राशन उनके काम आ गया। अगर यह राशन वहां नहीं होता तो शायद कई सैनिक भूख से मर जाते।

    इसी गाने पर नए ऑफिसर्स लेते हैं कसम

    आज असम रेजीमेंट की 25 बटालियन हैं। इस रेजीमेंट के ज्‍यादातर जवानों की भर्ती नॉर्थ ईस्‍ट के राज्‍यों से होती है। असम रेजीमेंट सेना की इंफ्रेंटी रेजीमेंट है। 'बदलू राम का बदन' इस रेजीमेंट का वह गीत है जो हर जगह मशहूर है। रेजीमेंट की पासिंग आउट परेड के दौरान जब नए सैनिकों की भर्ती होती है तो इसी गीत पर शिलॉन्‍ग के रेजीमेंटल सेंटर पर जश्‍न मनाया जाता है। 'कसम परेड' के दौरान युवा सैनिक इस गाने के साथ अपने कदम आगे बढ़ाते हैं। वर्ल्‍ड वॉर टू के समय देश में ब्रिटिश शासन था।

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