Video: बदलू राम का बदन, गाने पर -40 डिग्री से भी कम तापमान पर नाचते सैनिक

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में 10 डिग्री या 5 डिग्री तापमान पर आपको ठंड लगती है और काम करने का मन नहीं करता, तो असम रेजीमेंट के ऑफिसर्स और जवानों का यह वीडियो आपको जोश से भर देगा। 15 जनवरी को सेना दिवस था और इस मौके को असम रेजीमेंट ने अपने ही तरीके से सेलिब्रेट किया। नॉर्थ सिक्किम में चीन से सटी सीमा पर स्थित पोस्‍ट पर तैनात रेजीमेंट के सैनिकों ने रेजीमेंट गीत 'बदलू राम का बदन' पर कदम से कदम मिलाए। जिस जगह पर सैनिकों ने डांस किया है वहां पर तापमान इस समय -40 डिग्री से भी नीचे हैं। देखिए जोश से भर देने वाला यह वीडियो और जानिए कौन थे बदलू राम जिन पर लिखा गीत रेजीमेंट का गीत बन गया।

क्‍या है गाना

15 जनवरी को नॉर्थ सिक्किम में सबसे ऊंचे हेडक्‍वार्टर्स पर असम रेजीमेंट की बटालियन के ऑफिसर्स और जवानों ने बदलू राम का बदन पर डांस किया। इस गाने के शब्‍द हैं, 'बदलू राम का बदन जमीन के नीचे और हमको उसका राशन मिलता है।' फील्‍ड मार्शल एम करियप्‍पा ने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश कमांडर इन चीफ से चार्ज लिया और इंडियन आर्मी के पहले जनरल बने थे। इसी दिन की अहमियत के तौर पर 15 जनवरी को आर्मी डे मनाया जाता है। जिस जगह पर सैनिक डांस कर रहे थे, वह जगह 16,000 फीट की ऊंचाई पर है और यहां पर तापामान -40 डिग्री से भी कम था। नॉर्थ सिक्किम में भारत-चीन बॉर्डर पर रेजीमेंट हर पल एलएसी की सुरक्षा में तैनात रहती है।

कौन थे बदलू राम

कौन थे बदलू राम

लीजेंड बदलूराम वर्ल्‍ड वॉर टू के समय असम रेजीमेंट के सैनिक थे। उनकी मृत्‍यु के बाद उनके राशन ने 100 से ज्‍यादा जवानों की भूख उस समय मिटाई जब जापान की सेना ने उन्‍हें घेर लिया और उनकी राशन सप्‍लाई कट कर दी थी। कई दिनों तक जवान इसी राशन पर जिंदा थे और आपको जानकर हैरानी होगी की तब तक बदलूराम की मौत हो चुकी थी। असम रेजीमेंट की स्‍थापना 15 जून 1941 को शिलॉन्‍ग में हुई थी। इस रेजीमेंट की स्‍थापना का मकसद जापान के बढ़ते खतरे का सामना करना था।

अगर नहीं होता बदलूराम का राशन तो भूख से मर जाते सैन‍िक

अगर नहीं होता बदलूराम का राशन तो भूख से मर जाते सैन‍िक

युद्ध के समय जवान बदलू राम शहीद हो गए थे लेकिन उनकी शहादत के बारे में किसी को जानकारी नहीं मिल सकी। इसका नतीता यह हुआ कि उनके हिस्‍से का राशन भेजा जाता रहा। इसकी वजह से अतिरिक्‍त राशन इकट्ठा हो गया। इसी बीच जापान की सेना ने असम रेजीमेंट को चारो ओर से घेर लिया और हर लॉजिस्टिक सपोर्ट की सप्‍लाई कट कर दी। लेकिन बदलूराम को भेजा गया राशन उनके काम आ गया। अगर यह राशन वहां नहीं होता तो शायद कई सैनिक भूख से मर जाते।

इसी गाने पर नए ऑफिसर्स लेते हैं कसम

इसी गाने पर नए ऑफिसर्स लेते हैं कसम

आज असम रेजीमेंट की 11 22 बटालियन हैं। इस रेजीमेंट के ज्‍यादातर जवानों की भर्ती नॉर्थ ईस्‍ट के राज्‍यों से होती है। असम रेजीमेंट सेना की इंफ्रेंटी रेजीमेंट है। 'बदलू राम का बदन' इस रेजीमेंट का वह गीत है जो हर जगह मशहूर है। रेजीमेंट की पासिंग आउट परेड के दौरान जब नए सैनिकों की भर्ती होती है तो इसी गीत पर शिलॉन्‍ग के रेजीमेंटल सेंटर पर जश्‍न मनाया जाता है। 'कसम परेड' के दौरान युवा सैनिक इस गाने के साथ अपने कदम आगे बढ़ाते हैं। वर्ल्‍ड वॉर टू के समय देश में ब्रिटिश शासन था।

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