• search

नज़रिया: दक्षिण पूर्व एशिया के लिए ये है मोदी फॉर्मूला

By Bbc Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ़्ते तीन देशों की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान एक बार फिर अंतर सामुदायिक स्तर तक फैली भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक कड़ियों के विस्तार को दिखाने का प्रयास किया.

    साथ ही वो रक्षा और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देते हुए अंतरदेशीय संबंधों को मजबूत करते दिखे.

    ये चीन के दबदबे वाला इलाका है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की एसोसिएशन के सदस्य देशों में चार का दक्षिण चीन सागर में चीन की दावेदारी को लेकर विवाद है. चीन यहां टापुओं के निर्माण में जुटा है और उसकी ओर से होने वाली अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना इन देशों की चिंता की सबसे बड़ी वजह है.

    शांगरी ला संवाद में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान भारत का नरम रुख जाहिर हुआ.

    चीन का दबदबा

    मोदी के भाषण के महज 24 घंटे पहले अमरीकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा था कि अमरीका दक्षिण चीन सागर में चीन की ओर से किए जा रहे टापुओं के सैन्यीकरण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है.

    इसके चंद दिन पहले अमरीकी नौसेना के पोत इन टापुओं के पास से गुजरे थे. इसका मकसद आवाजाही की आज़ादी तय करना था. चीन ने इसकी कड़ी निंदा की थी.

    बीते दो हफ्तों के दौरान अमरीकी खुफिया जानकारियों के हवाले से मीडिया में ख़बरें आई हैं कि चीन ने स्प्रैटली द्वीपों पर एंटी शिप क्रूज़ मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक जैमर लगाए हैं.

    रिपोर्टों के मुताबिक ऐसी मिसाइलें फेयरी क्रॉस रीफ, सुबी रीफ और मिसचीफ रीफ पर भी लगाई गईं हैं.

    मोदी का मिशन

    बीते हफ्ते चीन ने अपने आला H-6K बमवर्षक विमान को पैरासल टापुओं पर भेजा था. इनके जरिए चीन अपनी हवाई ताक़त को दक्षिण चीन सागर के फैलाव तक सुनिश्चित करता है.

    ये भी अटकलें लगाई जाती हैं कि चीन जल्दी ही दक्षिण चीन सागर में 'एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन' का एलान कर सकता है जिसके जरिए दूसरे देशों पोतों और विमानों के संचालन पर कड़ाई से रोक लगाई जा सकती है.

    शांगरी ला संवाद में मोदी ने 'सामुद्रिक सुरक्षा के लिए भारत के सैद्धांतिक रुख' को सामने रखते हुए 'नियम आधारित व्यवस्था के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की'. इस बात को उपहास में उड़ा दिया गया होता अगर इसके पहले उन्होंने रक्षा और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने को भारत के सांस्कृतिक संबंधों को आधार की तरह इस्तेमाल करने के लिए चार दिन की अथक मेहनत न की होती.

    साझेदारी का विस्तार

    मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएंग लून से मुलाक़ात की. सख्ती और लचीलेपन की बात रखते हुए मोदी ने मुद्दे की संजीदगी को कम नहीं होने दिया.

    भारत ने एशियाई समुद्री सीमा में मुक्त व्यापार के लिए आवाजाही की आज़ादी के लिए प्रतिबद्धता जताई और इसके महज 48 घंटे पहले ही भारत ने मलाका स्ट्रेट्स के रणनीतिक लिहाज से अहम साबंग पोर्ट पर आधारभूत ढांचा विकसित करने और इकॉनॉमिक ज़ोन बनाने इरादा जाहिर किया था.

    मोदी का चांगी नौसिक ठिकाने पर जाना और आईएनएस सतपुड़ा के अधिकारियों और नाविकों से मुलाकात ने भारत के सामुद्रिक प्रोफाइल के विस्तार का संकेत दिया.

    मोदी ने ये रेखांकित करने की कोशिश की कि चीन के साथ भारत के पेचीदा रिश्तों का असर द्विपक्षीय वाणिज्यिक और व्यापारिक संबंधों के विस्तार पर नहीं होने दिया जाएगा.

    सिंगापुर में मोदी
    EPA
    सिंगापुर में मोदी

    सांस्कृतिक संबंधों पर ज़ोर

    मोदी अपनी 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को मजबूती देना चाहते हैं. बीते साल अमरीका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत के चौपक्षीय मंच की दोबारा बहाली के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूती मिली है.

    अब तक की कोशिशें भारत के लिए मौके तलाशने तक रही ही रही हैं. भारत ने अमरीकी सेना के शक्ति प्रदर्शन और चीन के आर्थिक विस्तार से दूरी बनाई हुई है.

    इस क्षेत्र में भारत के विकास और सुरक्षा से जुड़े हितों को आगे ले जाने में सांस्कृतिक संबंधों को माकूल कन्वेयर बेल्ट या माध्यम के तौर पर देखा जाता है.

    सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी घरेलू मोर्चे पर भी भारत के महान अतीत को दोबारा हासिल करने की बात करती है और इसे रणनीतिक साझेदारी की नींव बताती है.

    इसके जरिए प्रधानमंत्री मोदी की शिक्षाविदों, बिजनेस एक्ज़ीक्यूटिव, सार्वजनिक क्षेत्र की हस्तियों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात का मक़सद समझ आता है. इनकी अंतरदेशीय साझेदारी को मजबूत करने में अहम भूमिका है.

    इंडोनेशिया को न्योता

    मोदी की पांच दिन की यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महल मर्डेका से हुई जहां दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मैरीटाइम कोऑपरेशन यानी सामुद्रिक सहयोग को लेकर साझा नज़रिया पेश किया.

    रक्षा सहयोग समेत 15 समझौतों पर दस्तख़त हुए लेकिन ज़ोर सांस्कृतिक संबंध दिखाने पर रहा. साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने ओडिशा की 'बालिजात्रा' का जिक्र किया जिसकी झांकी इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में थी. गणतंत्र दिवस पर दक्षिण पूर्व एशिया के सभी दस देशों के नेता मुख्य अतिथि थे.

    हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक रिश्तों की याद में हर साल ओडिशा के कटक में महानदी के किनारे बाली यात्रा नाम से व्यापार मेले का आयोजन होता है.

    मोदी ने जकार्ता में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते समय भी बाली यात्रा की कहानी दोहराई.

    उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि वो और राष्ट्रपति विडोडो सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं और दोनों साल 2014 में सत्ता में आए.

    उन्होंने लोगों को इलाहाबाद के कुंभ मेले में आने और 'न्यू इंडिया' से रूबरू होने का न्योता दिया. मोदी ने एलान किया कि 'इंडोनेशिया के नागरिकों को तीस दिन के दौरे के लिए मुफ़्त वीज़ा दिया जाएगा'.

    जकार्ता में दोनों नेताओं के पतंग उड़ाने की तस्वीरें टीवी पर प्रसारित हुईं. यहां पहली बार पतंगों की संयुक्त प्रदर्शनी लगाई गई थी जिसकी थीम रामायण और महाभारत थी.

    मोदी और महातिर मोहम्मद
    Reuters
    मोदी और महातिर मोहम्मद

    मोदी एशिया के सबसे बुजुर्ग नेता महातिर मोहम्मद से मिलने के लिए कुछ वक्त कुआलालंपुर में भी रुके.

    यहां भी मोदी ने मलेशिया और भारत के करीबी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर ज़ोर दिया. जिसके जरिए ये मुल्क भारत का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच बीते साल व्यापार 15 अरब 44 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया.

    प्रधानमंत्री मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री
    Reuters
    प्रधानमंत्री मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री

    व्यापार पर ज़ोर

    सिंगापुर में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लूंग को छठी शताब्दी की बुद्धगुप्त की मूर्ति की प्रतिकृति भेंट की. इसमें पल्लव लिपी में संस्कृति रचनाएं उकेरी गई हैं. ये बताती हैं कि दक्षिण एशिया में बौद्ध धर्म का विस्तार भारत से हुआ है. मोदी ने प्रवासी भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया और सिंगापुर को भारत का 'स्प्रिंगबोर्ड' बताया.

    हालांकि, चीन की ओर ऐतिहासिक झुकाव और चीनी मूल की 76 फ़ीसद आबादी को देखते हुए सिंगापुर चीन और भारत से समान दूरी रखता है.

    यही वजह है कि अमरीका जापान ऑस्ट्रेलिया और भारत के चौपक्षीय मंच को लेकर सिंगापुर ने दूरी बनाए रखी.

    प्रधानमंत्री लूंग ने चीन की अगुवाई में पूर्वी एशियाई देशों की समग्र आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर ज़ोर दिया. भारत और सिंगापुर के बीच आठ समझौतों पर दस्तख़्त हुए. इनमें पब्लिक सर्विस के अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए साझेदारी बढ़ाने, साइबर सिक्योरिटी, नारकोटिक्स कंट्रोल और नौसेना के बीच सहयोग शामिल है.

    दोनों देशों की पेमेंट प्रणाली को जोड़ने और आर्थिक साझेदारी की समीक्षा के लिए भी वर्किंग ग्रुप बनाया गया है. इसके जरिए दोनों देशों के बीच दोपक्षीय व्यापार साल 2004 के नौ अरब डॉलर के मुक़ाबले अब 18 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

    नरेंद्र मोदी
    AFP
    नरेंद्र मोदी

    इस बात में कोई संदेह नहीं है कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक नीति और उसके दावों को लेकर असहज करने वाली स्थिति बनी हुई है. चार अन्य देश ब्रूनेई, मलेशिया, फिलीपीन्स और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर पर अपनी दावेदारी पेश करते हैं.

    इसकी वजह से इस क्षेत्र में भारत की स्वीकार्यता बढ़ी है. भारत किसी भी पक्ष के साथ खड़े दिखने से बचता रहा है. शांगरी ला संवाद में मोदी के भाषण के बरक्स सामाजिक सांस्कृतिक और सांकेतिक कूटनीति को आधार बनाकर आगे बढ़ने की चाहत को समझा जा सकता है. नहीं तो इसे भारत के नरम रुख की तरह ही देखा जाता.

    ये भी पढ़ें

    दक्षिण चीन सागर में चीनी बम वर्षकों की तैनाती का मतलब क्या

    मोदी के इंडोनेशिया दौरे से चीन क्यों टेंशन में

    23 महीने में ही मलेशिया से अलग देश क्यों बना सिंगापुर

    सिंगापुर में इतनी जल्दी कैसे आई बेशुमार दौलत

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Views This is Modi Formula for Southeast Asia

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X