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Video: मोदी सरकार की दो कद्दावर मंत्रियों के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्‍स मैटिस ने की नेहरू की जमकर तारीफ, जानें क्‍या कहा

नई दिल्‍ली। छह सितंबर को भारत और अमेरिका के बीच पहली 2+2 वार्ता का समापन हुआ है। इस वार्ता के साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संबंध एक नए स्‍तर पर पहुंचे हैं। वार्ता के बाद दोनों देशों के मंत्रियों, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो, अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्‍स मैटिस, भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ज्‍वॉइन्‍ट प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। इस प्रेस कांन्‍फ्रेंस मोदी सरकार की दो वरिष्‍ठ मंत्रियों के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री मैटिस ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को याद किया। उन्‍होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को नए मुकाम पर पहुंचाने में नेहरू की पहली अमेरिका यात्रा का कितना योगदान था।

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नेहरु की प्रशंसा में क्‍या कहा मैटीस ने

भारत और अमेरिका के संबंध 70वें वर्ष में हैं और मैटिस ने इस मौके पर दोनों देशों के बीच संबंध कैसे शुरू हुए, इसका जिक्र किया। मैटिस ने कहा, जब भारत ने साल 1947 में आजादी हासिल की थी, उसके सिर्फ तीन वर्ष बाद देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू, अमेरिका की यात्रा पर गए थे। मैटिस ने यहां पर उस दौरान नेहरु ने कैसे दोनों देशों के संबंधों को बयां किया था, इसे याद किया। मैटिस ने कहा नेहरू ने अपनी यात्रा पर कहा था, 'यह अमेरिका के दिल और दिमाग के खोज की यात्रा है।' मैटिस ने आगे कहा कि वह और विदेश मंत्री पोंपेयो इसी भावना के साथ भारत आए हैं।

कई सदियों से हैं रिश्‍ते

कई सदियों से हैं रिश्‍ते

मैटिस ने कहा भारत और अमेरिका के रिश्‍ते आज से नहीं बल्कि कई वर्षों से हैं और उम्‍मीद है कि 2+2 वार्ता के बाद रिश्‍ते और मजबूत होंगे। नेहरू पहली बार जब अमेरिका की यात्रा पर गए थे तो उन्‍होंने तीन हफ्ते अमेरिका में गुजारे थे। इस दौरान उन्‍होंने कई मीटिंग्‍स की और विदेश नीति की शुरुआत की। हालांकि उनकी मुलाकात तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन के साथ फ्लॉप साबित हुई थी क्‍योंकि ट्रूमैन ने भारत को किसी भी तरह की आर्थिक सहायता या फिर खाद्यान्‍न की मदद करने से साफ इनकार कर दिया था। नेहरू दिसंबर 1956, सितंबर 1960 और फिर साल 1961 में भी अमेरिका की यात्रा पर गए थे।

फिर बदला माहौल

फिर बदला माहौल

साल 1956 में जब नेहरू ने अमेरिका का दौरा किया तो उन्‍होंने तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति ड्वाइट डी आइश्‍नॉवर के साथ उनके गैट्टीसबर्ग स्थित फार्म हाउस पर डेढ़ दिन बिताए थे। दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर 14 घंटे तक वार्ता हुई। इसके बाद आइश्‍नवार ने भारत की आर्थिक मदद को बढ़ाकर दोगुना कर दिया और मदद की रकम 822 मिलियन डॉलर हो गई। इसके साथ ही उन्‍होंने भारत के लिए पीएल480 फूड प्रोग्राम को भी मंजूरी दी। इसके बाद साल 1959 में आइश्‍नवार भारत भी आए थे और उनका भारत दौरा काफी सफल साबित हुआ था।

कैनेडी और नेहरू की मुलाकात

कैनेडी और नेहरू की मुलाकात

नेहरु आखिरी बार साल 1961 में अमेरिका गए और उस समय अमेरिका के राष्‍ट्रपति जॉन एफ कैनेडी थे। कैनेडी जिस समय सीनेटर थे, उस समय से ही वह भारत को और मदद देने के समर्थक थे। साल 1961 में नेहरू और कैनेडी की मुलाकात हुई और इसे आज भी एक उत्‍साहहीन दौरा करार दिया जाता है। यह नेहरू का अंतिम अमेरिकी दौरा था और 71 वर्षीय नेहरू काफी थके हुए थे। इसक बाद भी कैनेडी ने उन्‍हें वार्ता के मजबूर किया। लेकिन बाद में जॉन एफ कैनेडी ने नेहरू के उस अमेरिकी दौरे को 'सबसे खराब' अमेरिकी दौरा करार दिया। हालांकि कैनेडी ने भारत को दी जाने वाली आर्थिक मदद में इजाफा कर दिया था।

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