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मार्गरेट अल्वा ने क्यों कहा- CM ममता के पास मन बदलने का पर्याप्त समय ?

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की हार के बाद अब नजरें vice presidential election पर लगी हैं। विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास मन बदलने का पर्याप्त समय है।
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नई दिल्ली, 23 जुलाई : उपराष्ट्रपति चुनाव (vice presidential election) में 80 वर्षीय मार्गरेट अल्वा विपक्ष की उम्मीदवार हैं। एनडीए ने पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ को वाइस प्रेसिडेंट कैंडिडेट बनाया है। 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है। प्रेसिंडेंट पोल में द्रौपदी मुर्मू की जीत के बाद उपराष्ट्रपति पद का चुनाव भी विपक्षी दलों के लिए कठिन माना जा रहा है।

mamata alva

अपोजिशन पार्टी की ओर से वाइस प्रेसिडेंट कैंडिडेट मार्गरेट अल्वा ने कहा, विपक्षी दलों का कहना है कि वे एक दलीय शासन नहीं चाहते। संविधान की रक्षा की जानी चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे वह भाजपा को जीतने में मदद कर सकें।

गैरभाजपा खेमे में पारिवारिक झगड़े !

विपक्षी दलों के मतभेद पर मार्गरेट अल्वा ने शनिवार को कहा, गैर-भाजपा खेमे में मौजूदा मतभेद "पारिवारिक झगड़े" हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां 2024 के लोक सभा चुनाव की चुनौती के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में मार्गरेट अल्वा ने कहा कि आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था की "त्रासदी" यह है कि लोगों का जनादेश प्रबल नहीं होता है। उन्होंने कहा कि बाहुबल, धन बल और धमकियां निर्वाचित ढांचे की संरचना को बदल देती हैं। बता दें कि अल्वा पूर्व राज्यपाल रह चुकी हैं।

सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल

संसद में लगातार व्यवधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अल्वा ने कहा, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अध्यक्ष उन समझौतों पर काम करने में "असमर्थ" हैं, जिनमें विपक्ष के दृष्टिकोण पर विचार किया जाता है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि जब सरकार का नारा 'मेरा रास्ता है या नहीं' (my way or no way) है, तो लोकतंत्र कैसे काम कर सकता है ?

CM ममता बनर्जी के फैसले से हैरानी

वंशवाद की राजनीति पर अल्वा ने कहा कि राजनेताओं के बच्चे अगर राजनीति में आते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन उन्हें चुनाव और लोगों का विश्वास जीतना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने के तृणमूल कांग्रेस के फैसले से 'हैरान' हैं क्योंकि पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी विपक्ष को एकजुट करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। अल्वा ने कहा कि वह भाजपा को जीतने में मदद नहीं कर सकतीं। ममता बनर्जी के पास अपना विचार बदलने के लिए पर्याप्त समय है।

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की हार !

बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने गत 48 साल में रिकॉर्ड वोट हासिल किए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में अधिक वोट पड़े। द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति निर्वाचित हुई हैं। 25 जुलाई को उनका शपथग्रहण समारोह होगा।

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English summary
vice presidential election : Margaret Alva on CM Mamata rethinking over participation.
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