वेंकैया नायडू को राखी बांधती थीं सुषमा स्वराज, इस बार सूनी रहेगी कलाई

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं है, अचानक उनके यूं चले जाने से पूरा देश सदमे में है, वो केवल भाजपा की ही नहीं बल्कि पूरे देश की लोकप्रिय नेताओं में से एक थीं, जिन्हें कोई शायद कभी भी भूल नहीं पाएगा। गौरतलब है कि सुषमा स्वराज का मंगलवार देर शाम दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। हार्ट अटैक के बाद सुषमा स्वराज को एम्स लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। मोदी सरकार में वो अकेली मंत्री थीं, जो ट्विटर पर ही लोगों की समस्याओं पर तुरंत एक्शन लेती थीं।

 रक्षा बंधन पर वेंकैया नायडू को राखी बांधती थीं सुषमा स्वराज

रक्षा बंधन पर वेंकैया नायडू को राखी बांधती थीं सुषमा स्वराज

आज पीएम से लेकर हर आम की आखें नम हैं, किसी के लिए सुषमा मां थीं तो किसी के लिए बड़ी बहन, हर कोई अपनी तरह से इस लोकप्रिय नेता को याद कर रहा है, उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को राज्यसभा में सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि हर रक्षाबंधन पर सुषमा स्वराज उनको राखी बांधती थीं।

इस राखी पर सूनी रह जाएगी इस भाई की कलाई

इस राखी पर सूनी रह जाएगी इस भाई की कलाई

उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बताया कि इस साल भी उनको सुषमा स्वराज राखी बांधने वालीं थी, उन्होंने बताया कि जब सुषमा जी को फोन करके बताया कि मैं आपके घर राखी बंधवाने के लिए आ रहा हूं तो सुषमा जी ने कहा कि आप अब उपराष्ट्रपति बन गए हैं आपको आने की जरूरत नहीं है बल्कि मैं खुद आपके घर आपको राखी बांधने के लिए आऊंगी।

आदर्श भाई-बहनों की लिस्ट में शामिल थे नायडू-स्वराज

आदर्श भाई-बहनों की लिस्ट में शामिल थे नायडू-स्वराज

ये कहते हुए नायडू का गल भर आया क्योंकि राखी के चंद रोज पहले ही उनकी बहन सुषमा ने दुनिया को अलविदा कह दिया और इस बार नायडू की कलाई पर सुषमा की राखी नहीं बंधेंगी। आपको बता दें कि देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू देश आदर्श भाई-बहनों की लिस्ट में शामिल थे।

छोटे भाई-बहनों की तरह ही आपस में बातें करते थे नायडू-स्वराज

छोटे भाई-बहनों की तरह ही आपस में बातें करते थे नायडू-स्वराज

दोनों ही की गिनती काफी गंभीर नेताओं के रूप में होती थी लेकिन इन्हें करीब से जानने वाले कहते है कि ये दोनों जब भी आपस में मिलते थे तो छोटे भाई-बहनों की तरह ही आपस में बातें करते थे, दोनों ही विनोद प्रिय थे और एक-दूसरे का काफी सम्मान करते हैं, दोनों का रिश्ता भले ही खून का ना हो लेकिन राजनीति के पथ पर दोनों भाई-बहन के रूप में लंबे वक्त से चलते चले आ रहे थे।

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