Vice President Election: विपक्ष को मनाने में जुटे मल्लिकार्जुन खड़गे, इंडिया अलायंस में बनेगी एक नाम पर सहमति?
Vice President Election: जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की वजह से उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है। सत्तारूढ़ एनडीए ने पीएम नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा पर भरोसा जताते हुए उम्मीदवार का चयन उनके ऊपर छोड़ दिया है। एनडीए के घटक दलों ने एक तरीके से पीएम मोदी के नेतृत्व में अपना विश्वास और समर्थन जताया है। अब कांग्रेस भी इस मौके को इंडिया गठबंधन की एकता के प्रदर्शन के तौर पर पेश करना चाहती है। साझा उम्मीदवार उतारने के लिए विपक्षी दलों को मनाने का जिम्मा खुद मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाया है।
चुनाव आयोग के खिलाफ कथित वोट चोरी के मुद्दे पर लगभग सभी बड़े विपक्षी दल एकजुट हैं। लोकसभा चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन की वैसी सक्रियता नहीं दिख रही थी, लेकिन वोट में हेर-फेर के राहुल गांधी के दावे और प्रेजेंटेशन के बाद स्थिति बदली है। बिहार में SIR का विरोध भी सभी विपक्षी दल एक स्वर में कर रहे हैं। कांग्रेस उपराष्ट्रपति चुनाव को इंडिया गठबंधन की एकजुटता के तौर पर इस्तेमाल करना चाह रही है।

Vice President Election: साझा उम्मीदवार के लिए सहमति बनाने की कोशिश
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन ने भी साझा उम्मीदवार पर सहमति बनाने के लिए चर्चा शुरू कर दी है। इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच बातचीत चल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष और सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क कर रहे हैं। सोमवार को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष के घर डिनर पार्टी में भी दिग्गज नेता जुटे थे।
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कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, विपक्षी दल साझा उम्मीदवार खड़ा करने पर सहमत हैं। हालांकि, अब तक उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से उम्मीदवार के ऐलान के बाद ही इंडिया अलायंस अपने उम्मीदवार का ऐलान करेगा।
INDIA Alliance की सक्रियता बढ़ी, सरकार के लिए खतरा?
इंडिया गठबंधन की सक्रियता और एकजुटता मानसून सत्र में सतह पर दिख रही है। सभी विपक्षी दल एक स्वर में SIR का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप के भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले, सीजफायर के दावों और चुनाव में वोटों की हेरा-फेरी के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। विपक्षी गठबंधन की एकजुटता का असर कहीं न कहीं सदन की कार्यवाही पर दिख रहा है और पूरे सत्र में लगातार हंगामे की वजहे से दोनों सदनों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
जहां तक उपराष्ट्रपति के चुनाव का मुद्दा है, सरकार के पास जरूरी बहुमत है। एनडीए के सभी दलों ने पीएम मोदी में अपना विश्वास दिखाया है। फिलहाल ऐसे आसार नहीं हैं कि एनडीए के उम्मीदवार के आसानी से जीतने में कोई अड़चन आएगी।
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