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Mark Tully Passes Away: वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का निधन, निर्भीक पत्रकारिता से बने भारत की भरोसेमंद आवाज

Mark Tully Passes Away: दिग्गज पत्रकार और बीबीसी (BBC) के पूर्व इंडिया ब्यूरो चीफ मार्क टुली का निधन हो गया। 25 जनवरी 2026 को 90 वर्ष की आयु में उन्होंने आखिरी सांस ली। दिल्ली के मैक्स अस्पताल में वह पिछले एक हफ्ते से भर्ती थे। उनके निधन की पुष्टि उनके करीबी दोस्त और पूर्व सहयोगी सतीश जैकब ने की। देश-विदेश में अपनी पत्रकारिता से पहचान बनाने वाले टुली को ब्रिटेन ने नाइटहुड की उपाधि दी थी।

मार्क टुली उन चुनिंदा विदेशी पत्रकारों में हैं, जिन्होंने भारत में लंबा समय बिताया। 40 साल से ज्यादा के करियर में उन्होंने भारत के सामाजिक जीवन और बड़ी घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज की थी। उन्हें दुनिया के सामने भारत में हो रहे सामाजिक-राजनीतिक घटनाओं को पूरी गहराई और सच्चाई के साथ सामने लाने के लिए याद किया जाता है।

Mark Tully Passes Away

Mark Tully Passes Away: 40 साल के करियर में की गई यादगार कवरेज

- अपने लंबे पत्रकारिता करियर में उन्होंने करीब 30 सालों तक बीबीसी के लिए काम किया था। इसमें से 22 सालों तक वे दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने भारत के इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं की रिपोर्टिंग की।

- 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान वे स्वर्ण मंदिर के भीतर सेना की कार्रवाई को कवर करने वाले चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों में से एक थे। सरकार की नाराजगी झेलकर उन्होंने निर्भीक रिपोर्टिंग की थी।

- उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुए सिख विरोधी दंगों की उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी।

-भोपाल गैस त्रासदी (1984) में पीड़ितों की आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में भी उनका अहम योगदान रहा। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद श्रीपेरंबदूर से उन्होंने चुनावी माहौल और देश की बदलती राजनीति को कवर किया।

- 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दिन वे अयोध्या में मौजूद थे और दुनिया को वहां की तनावपूर्ण स्थिति का आंखों देखा हाल सुनाया था।

Mark Tully Career : आपातकाल के दौरान छोड़ना पड़ा था भारत

मार्क टुली उन चुनिंदा पत्रकारों में से थे, जिन्होंने आपातकाल (1975-77) के दौरान निर्भीक रिपोर्टिंग की थी।उनकी पत्रकारिता ने तत्काली इंदिरा गांधी सरकार को इतना असहज कर दिया था कि आखिरकार उन्हें भारत छोड़ना ही पड़ा। अपने करियर में उन्होंने कई युद्धों की भी रिपोर्टिंग की थी। 1971 के भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग भी उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में रही।

मार्क टुली को भारत सरकार ने पद्म श्री (1992) और पद्म भूषण (2005) से सम्मानित किया था। 2002 में उन्हें ब्रिटेन में नाइटहुड की उपाधि भी मिली। वे अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया' के लिए भी जाने जाते हैं।

Mark Tully Profile: हिंदी भाषा के थे मुखर समर्थक

मार्क टुली मूल रूप से अंग्रेजी के पत्रकार थे लेकिन वह हिंदी भाषा के मुखर समर्थक थे। वह लगातार इस बात को दोहराते थे कि भारतीय सामाजिक जीवन की विविधता में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं ही भारत की असली आत्मा हैं। टुली का स्पष्ट मानना था कि अंग्रेजी भारत में सिर्फ अभिजात वर्ग तक सीमित है। वे सरकारी फरमानों के जरिए हिंदी थोपने के विरोधी थे और बोलचाल की 'हिंदुस्तानी' के पक्षधर थे। शिक्षा के लिए अंग्रेजी पर निर्भरता को वे आम जनता के सशक्तिकरण में बाधा मानते थे।

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