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नरेन्‍द्र मोदी को खुश करने के लिए हाफिज सईद से मिले थे वैदिक

Ved Pratap Vaidik meets Hafiz Saeed to make Narendra Modi happy
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद भारत-पाकिस्‍तान की सीमा पर आया और वहां अपने लड़ाकों को दिशा निर्देश देकर वापस चला गया। इसके अलावा सैकड़ों भारतीयों के खून से अपने हाथ रंगने वाले हाफिज सईद ने भारत को कई बार धमकी भी दी मगर उस वक्‍त इतना हंगामा नहीं मचा था जितना वरिष्‍ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक के साक्षात्‍कार पर मचा है। हंगामा हो भी क्‍यों ना! वैदिक जी ने खुद ही इस इंटरव्‍यू को लीक करके अपने साथ ही साथ सरकार की भी छिछालेदर करवा दी है।

देश के जाने-माने पत्रकार और हिंदी दैनिक जनसत्‍ता के संपादक ओम थानवी ने अपने फेसबुक वॉल पर जो लिखा है उसे एक दम से खारिज कर देना गलत होगा क्‍योंकि उसमें से सच्‍चाई छन कर बाहर आ रही है। थानवी ने लिखा है कि मुझे ऐसा शुबहा होता है कि बाबा रामदेव का हाथ सर पर लेकर वैदिक जी मोदी के दरबार में अपनी "कूटनीतिक योग्यता" का डंका पीट रहे थे कि कहीं राजदूत बना दिए जाएं लेकिन मोदी या उनके सलाहकारों ने मीडिया के जरिए उनको खुद एक्सपोज करवा दिया।

न रहा बांस, न बजी बांसुरी। बाद को रही-सही कसर अपने बड़बोलेपन और प्रचार की भूख में वैदिक जी ने खुद पूरी कर दी। इतनी कि कोई उम्मीद लेकर कहीं उठने -बैठने लायक भी नहीं रह गए। भाजपा और मोदी सरकार का मानना है कि उन्होंने सुर्खियों में आने के लिए जो कुछ भी किया व कहा है वह सरकार की इस घोषित नीति का मखौल उड़ाने वाला है कि वह मुंबई बमकांड के आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहती है। हाफिज सईद से वैदिक किस हैसियत से मिले इस बारे में सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।

हाफिज सईद की छवि चमकाना चाहते हैं वैदिक

मगर वैदिक जिस तरह से बात को प्रस्‍तुत कर रहे हैं उससे साफ जाहिर होता है कि वो हाफिज सईद की छवि चमकाना चाहते हैं और नरेन्‍द्र मोदी को ये एहसास दिलाना चाहते हैं कि वो पाकिस्‍तान में किस तरह उनका प्रचार कर रहे हैं। बतौर वैदिक जब वो हाफिज सईद के ठिकाने पर पहुंचे तो हाफिज सईद ने उनकी कार का दरवाजा तक खोला। अब इसमें कितनी सच्‍चाई है ये तो खुद वैदिक जी ही बता सकते हैं लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो कहना बिल्‍कुल भी गलत ना होगा कि एक पत्रकार किसी और चोगे में वहां गया और लौटा।

हाफिज सईद को तो मुंबई ब्‍लास्‍ट की जानकारी ही नहीं थी

वैदिक का कहना है कि हाफिज सईद ने उन्‍हें बताया कि मुंबई बम विस्‍फोट की जानकारी उसे लगभग 1 घंटे बाद न्‍यूज चैनलों से मिली थी। वैदिक ने ये भी दावा किया है कि उन्‍होंने हाफिज सईद से कहा था नरेन्‍द्र मोदी तो बिल्‍कुल भी मुस्लिम विरोधी नहीं है। यहां तक की अपने चुनाव प्रचार में उन्‍होंने मुस्‍लमानों के खिलाफ एक शब्‍द तक नहीं कहा। इस पूरे मामले में जो गौर करने वाली बात है वो ये है कि वैदिक जैसा जाना माना और वरिष्‍ठ पत्रकार जब एक खूंखार आतंकवादी का इंटरव्‍यू करने गया तो अपने साथ ना तो टेप रिकॉर्डर ले गया और ना ही उस साक्षात्‍कार को रिकॉर्ड करने की कोशिश की।

वैदिक का कहना है कि उन्‍होंने उस साक्षात्‍कार को सिर्फ कागजों पर नोट किया। इसके पीछे भी यही प्रतीत होता है कि वैदिक ये संदेश देना चाहते हैं कि मानो वो प्रधानमंत्री के दूत के रूप में यह मुलाकात की हो। ठीक वैसे ही जैसे अटल बिहारी वाजपेयी ने पैट्रियाट के संपादक व वामपंथी आरके मिश्र को माहौल भांपने के लिए पाकिस्‍तान भेजा था।

नरसिंहा राव के संग दोपहर में ताश खलेते थे वैदिक

वैदिक ने खुद का डंका बजाने के लिए सब कुछ खुद ही कर डाला वो भी तब जब उन्‍हें ना तो पार्टी की ओर से अधिकृत किया गया था और ना सरकार ने कोई गाइड लाइन दी थी। वैदिक के बारे में एक और बात बताते चलें कि जब पीवी नरसिंहा राव की सरकार बनी थी तो उनके बेहद करीबी माने जाते थे। इतना ही नहीं उस दौरान वे यह दावे करते थे कि दोपहर में प्रधानमंत्री उनके साथ ताश खेलते हैं। उनका आज भी यह दावा है कि वे उस समय डिप्टी पीएम जाने जाते थे।

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