सीएम वसुंधरा राजे के सामने चुनौतियों का पहाड़

जयपुर। राजस्थान में भाजपा ने जबरदस्त कमबैक किया है। पांच सालों तक विपक्ष का वनवास भोगने के बाद भाजपा ने अब सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने वाली है। वसुंधरा राजे आज एकबार फिर से राजस्थान की सत्ता संभालने जा रही है। उनके शपथ समारोह में नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे। वसुंधरा राजे की सत्ता संभालने के साथ ही अग्निपरीक्षा का दौर शुरू हो जाएगा। विपक्ष में बैठकर उन्होंने सरकार के कामों की बहुत आलोचना की अब उनकी बारी है।

उन्हें मतदाताओं से किए वादों की कसौटी पर खड़ा उतरना है। हलांकि खरे-खोटे की पैमाइश वसुंधरा राजे के शपथ लेने के साथ ही शुरू हो गई है। सरकार की मुखिया होने के नाते यह परीक्षा भाजपा से ज्यादा राजे के लिए अहम है। राजे दोबारा से राजस्थान की कुर्सी पर काबिज होने वाली है, लेकिन इसबार उनकी चुनौती बिल्कुल अलग है। आपको यहां हम कुछ ऐसी चुनौतियों के बारे में बता रहे है जिनका सामना वसुंदरा राजे को करना है।

सबसे कठिन परीक्षा

सबसे कठिन परीक्षा

राजस्थान की जनता से भाजपा को भारी मतों से जिताया है। उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया है। वसुंधरा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जीत के बाद पार्टी और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखना है। इसमें जातीय, क्षेत्रीय संतुलन बैठाने में तगड़ी माथापच्ची करनी होगी।

विवादों का अंबार

विवादों का अंबार

मुख्यमंत्री और विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद वसुंधरा राजे के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्विवाद मंत्रिमंडल का गठन करना होगा। उन्हें बड़ी तादाद में जीत कर आए विधायकों को संतुष्ठ करना होगा।

रोजगार और टैट

रोजगार और टैट

भाजपा ने अपने घोषणापत्र में राज्य में 15 लाख नए रोजगार देने और शिक्षक पात्रता परीक्षा की बाधाओं को खत्म करने की बात कही थी। ऐसे में सीएम की कुर्सी पर बैठने के साथ ही राजे के सामने ये चुनौती होगी कि वो घोषणापत्र में किए अपने वादे को पूरा करे।

संवेदनशील मसला

संवेदनशील मसला

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मसला हमेशा से अहम रहा है। राज्य में अतिसंवेदनशील रहे गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा ने गुर्जरों समेत पांच जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण दिलाने का अपना वादा पूरा करना होगा।

सरकारी योजनाओं पर माथापच्ची

सरकारी योजनाओं पर माथापच्ची

राज्य की पूरवर्ती कांग्रेस सरकार की मुफ्त दवा योजना को विपक्ष में बैठी भाजपा अबतक तो जहर बता रही थी, पेंशन योजना को रेवड़ी ठहरा चुकी है। ऐसे में राजे के सामने बड़ी चुनौती होगी कि वो इन योजनाओं को कैसे चलाती है। अगर चलाती है तो क्या संसोधन करती है यदि वो इसे बदलती है तो क्या नई योजना होगी। जनता से जुड़ी अहम योजनाओं को लेकिन निर्णय, संशोधन करने में भी राजे को काफी गुणा-भाग करने पड़ेंगे।

लोकसभा में सीट बढ़ानी है रहना होगा मैदान में

लोकसभा में सीट बढ़ानी है रहना होगा मैदान में

राजस्थान में भाजपा की जीत के पीछे मोदी फैक्टर को अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में जिस तरह से यह फैक्टर सामने आया है अगर उसे लोकसभा चुनाव तक बनाए रखना है तो वसुंधरा राजे को ये मैदान में उतरे रहना होगा।

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