Morbi पुल ढहने के 3 साल बाद कैसे हुआ Gambhira Bridge हादसा? मरने वाले 9 लोगों में कौन-कौन?
Gambhira Bridge Collapse Reason: गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार (9 जुलाई 2025) सुबह एक दर्दनाक हादसे ने सबको झकझोर दिया। आणंद और वडोदरा को जोड़ने वाला 40 साल पुराना गंभीरा ब्रिज सुबह करीब 7:30 बजे अचानक ढह गया, जिसके चलते महिसागर नदी में कई वाहन गिर गए। इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल बताए जा रहे हैं।
पादरा तालुका के मुजपुर गांव के पास महिसागर नदी पर बना गंभीरा ब्रिज, जो मध्य गुजरात और सौराष्ट्र को जोड़ता है, सुबह के व्यस्त समय में टूट गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुल के दो पिलरों के बीच का स्लैब अचानक टूटकर नदी में गिर गया। इस दौरान दो ट्रक, एक बोलेरो एसयूवी, एक पिकअप वैन, एक ऑटो-रिक्शा और एक इको वैन नदी में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे से पहले एक तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद पुल का हिस्सा ढह गया।

क्रेन की मदद से 5-6 लोगों को बजाया गया
घटना की सूचना मिलते ही वडोदरा जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग, और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय तैराकों और ग्रामीणों ने भी बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब तक 5 से 6 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से कुछ को मामूली चोटें आई हैं। घायलों को वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। क्रेन और डाइवर्स की मदद से नदी में फंसे वाहनों को निकालने का काम जारी है।
List of People Died Gambhira Bridge Collapse: क्या मृतकों की पहचान हो गई? कौन-कौन?
हादसा सुबह हुआ, और प्रशासन अभी मृतकों की पहचान की प्रक्रिया में जुटा है। वडोदरा कलेक्टर अनिल धमेलिया के अनुसार, शवों की पहचान के लिए पोस्टमॉर्टम और परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। पहचान पत्रों और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही मृतकों के नाम आधिकारिक तौर पर जारी किए जाएंगे। फिलहाल, प्राथमिकता बचाव कार्य और घायलों के इलाज को दी जा रही है।
पुल की स्थिति और रखरखाव पर सवाल
1985 में निर्मित 900 मीटर लंबा गंभीरा ब्रिज, जिसमें 23 पिलर हैं, लंबे समय से रखरखाव की कमी का शिकार था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की जर्जर हालत के बावजूद प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यह पुल 'सुसाइड पॉइंट' के नाम से भी कुख्यात था। 2019-20 में 1.75 करोड़ रुपये की लागत से इसकी मरम्मत की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत के बाद भी बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे।
2021 में कांग्रेस ने इस पुल को बंद करने की मांग की थी, और 2022 में आई एक स्ट्रक्चरल रिपोर्ट में भी इसकी खराब स्थिति का उल्लेख था। इसके बावजूद, कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वडोदरा आरएंडबी कार्यकारी अभियंता एनएम नायकवाला ने दावा किया कि पिछले साल मरम्मत कार्य किया गया था और पुल को असुरक्षित नहीं माना गया था।
मोरबी हादसे से सबक नहीं!
यह हादसा 2022 में मोरबी के मच्छु नदी पर हुए पुल हादसे की याद दिलाता है, जिसमें 135 लोगों की जान गई थी। उस त्रासदी के बाद बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल उठे थे, लेकिन गंभीरा ब्रिज का ढहना दर्शाता है कि प्रशासन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया।
मृतकों को 2 लाख और 50 हजार रुपए का ऐलान
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस घटना को 'दुखद' बताते हुए तकनीकी एक्सपर्ट्स की एक टीम को मौके पर जांच के लिए भेजा है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीएम राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने बताया कि 9 शव बरामद किए गए हैं, और बचाव कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने सड़क और भवन विभाग को तत्काल जांच शुरू करने और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पुल की मरम्मत या इसे बंद करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। सोशल मीडिया पर भी लोग "गुजरात मॉडल" की आलोचना कर रहे हैं, इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम बता रहे हैं।
यातायात और रोज़गार पर असर
गंभीरा ब्रिज के ढहने से आणंद, वडोदरा, और भरूच के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। यह पुल किसानों, व्यापारियों, और दैनिक यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण था। अब लोगों को 40-50 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे रोज़गार और व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है।












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