उत्तराखंड: सीएम रावत से बहस के बाद सस्पेंड टीचर को आया शिक्षा मंत्री का फोन, बोले- न्याय दिलाएंगे
उत्तराखंड: सीएम रावत से बहस के बाद सस्पेंड टीचर को आया शिक्षा मंत्री का फोन, बोल- न्याय दिलाएंगे
देहरादून। जनता दरबार में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ तीखी बहस के बाद सस्पेंड की गईं शिक्षिका उत्तरा पंत को आखिरकार राहत की सांस मिली। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उत्तरा पंत बहगुणा को प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने फोन किया। उत्तरा पंत ने कहा कि उनके साथ एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जो अन्याय किया है कि उसके लिए शिक्षा मंत्री ने उनसे माफी मांगी है और भरोसा दिया कि वह उनसे जरूर मिलेंगे। उत्तरा पंत ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने 3 जुलाई को उन्हें मिलने का समय दिया है भरोसा दिलाया है कि वह उनकी समस्या का समाधान जरूर करेंगे। इस बीच उत्तरा पंत के बेटे का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जनता दरबार में सीएम और उनकी मां के बीच हुई बहस का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह पूरा नहीं है। गलती सीएम की तरफ से थी, उन्होंने पहले गलत बात शुरू की। शिक्षिका के बेटे ने कहा कि वे कह रहे हैं कि सीएम से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन सीएम को भी इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए।

सीएम रावत से जनता दरबार में हो गई थी कहासुनी
उत्तरा पंत 28 जून को तबादले की मांग लेकर मुख्यमंत्री रावत के जनता दरबार में गई थीं। जब उन्हें समस्या सुनाने का मौका मिला तो उन्होंने सीएम से कहा कि वह जिस जगह कार्य कर रही हैं, वहां से ट्रांसफर चाहती हैं। इस पर सीएम ने उनसे पूछा कि नौकरी लेते वक्त उन्होंने क्या लिख कर दिया था? सीएम के इस सवाल पर शिक्षिका भड़क गईं और कहा कि उन्होंने यह लिखकर नहीं दिया था कि जीवनभर वनवास में रहेंगी। शिक्षिका ने सीएम से कहा कि न तो वह अपने बच्चे को छोड़ सकती हैं और न ही नौकरी। उन्होंने सीएम से कहा, 'आपको मेरे साथ न्याय करना पड़ेगा।' इस पर सीएम रावत भड़क उठे और निलंबन के आदेश दे दिए।
25 साल से एक ही जिले में सेवा दे रही हैं उत्तरा पंत
57 वर्षीय शिक्षिका उत्तरा पंत का कहना है कि एक साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी। उनके बच्चे देहरादून में अकेले रहते हैं, उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो अपने बच्चों को अकेला छोड़ सकती हैं और न ही नौकरी छोड़ सकती हैं। मीडिया के सामने व्यथा सुनाते हुए उत्तरा पंत रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि सीएम ने उनके लिए इसे शब्द का प्रयोग किया, 'इसे बाहर ले जाओ।' उत्तरा पंत उत्तरकाशी जिले के नौगांव प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं। वह पिछले 25 साल से इस जिले में सेवा दे रही हैं।












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