उत्तराखंड का कर्ज- कांग्रेस से सूत समेत वसूली करेंगी मायावती

बीते कई दिनों से चल रही सियासी खींचतान के बाद उत्तराखंड में फ्लोर टेस्ट हुआ। और इसके नतीजे का ऐलान भी सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया। कोर्ट ने बताया है कि हरीश रावत के पक्ष में 33 विधायक थे और बीजेपी के पक्ष में 28 विधायकों ने अपना मत दिया। कोर्ट में केंद्र सरकार ने अपने पैर पीछे खींचते हुए कहा कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाएगा। इसी के साथ मामले का पूरा निपटारा हो गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से बसपा के तीन विधायक जिन्होंने कांग्रेस के पक्ष में मत दिया है एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Uttarakhand Row: Congress in now under debt of BSP

कांग्रेस के पक्ष में मतदान की वजह क्या?

यूपी में 2017 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसमें कहीं न कहीं कयास ये लगाई जा रही है कि मायावती जिस दलित वोटबैंक के बल पर खुद को बेहद मजबूत समझती थीं, वो अब प्रभावित हुआ है। ऐसे में स्थितियों पर यदि गौर किया जाए तो पूर्ण बहुमत के नाम पर सभी सियासी दलों के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह लग जाता है। अनुमान के अनुसार यदि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिला तो गठबंधन ही एक विकल्प शेष रह जाता है।

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जरूरत पड़ने पर यूपी में भी हो सकता है बसपा-कांग्रेस गठबंधन

माना जा रहा है कि बसपा के तीन विधायकों ने जिस दया भावना के साथ कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया, उसे जरूरत पड़ने पर यूपी विधानसभा चुनाव में भुनाने की कोशिश भी की जा सकती है। अगर कांग्रेस यूपी में बसपा के साथ गठबंधन करने को राजी न हुई तो संभव है कि मायावती उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को प्रभावित करें। इस वजह से कांग्रेस को उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाए रखने के लिए बसपा के साथ गठबंधन करना भी मजबूरी होगी।

इधर-उधर

हां ये सवाल अन्य सियासी दलों के जहन पर जरूर है लेकिन वे इस बात को जुबान पर लाने से बच रहे हैं। जब वन इंडिया ने इस संदर्भ में सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी से बातचीत की तो उन्होंने क्या कहा आईये जानते हैं :

सवाल- उत्तराखंड में बसपा के समर्थन के साथ ही हरीश रावत सरकार की फिर से वापसी हो गई है, क्या ये यूपी के लिहाज से अन्य सियासी दलों के लिए खतरे की घंटी नहीं है।

जवाब- सीधे तौर पर उत्तराखंड के इस मामले का यूपी से कोई कनेक्शन नहीं है।

सवाल- मान लीजिए गर 2017 विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिला तो उस दशा में बसपा ने कहीं न कहीं कांग्रेस के साथ इस दांव से खुद के लिए गठबंधन का जरिया तैयार कर लिया है। इस बात से कितना सहमत हैं आप?

जवाब- नहीं इस बात से हम कतई सहमत नहीं हैं। हां उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार फिर से बन गई, हम हरीश रावत जी का स्वागत करते हैं। रही बात केंद्र सरकार की तो उसने राष्ट्रपति शासन जैसी स्थितियां तैयार करके लोकतंत्र की हत्या की है।

केंद्र ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है- रीता बहुगुणा जोशी

इन सबके इतर जिस भाजपा ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की पहल की थी, जिस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत लोतंत्र की हत्या करार दे रहे थे, उसी से कांग्रेस अब यू-टर्न करती नजर आ रही है। वन इंडिया से बातचीत में कांग्रेसी नेता रीता बहुगुणा जोशी ने केंद्र सरकार की पीठ थपठपाई। पढ़िए रीता बहुगुणा जोशी ने वन इंडिया के सवाल पर क्या कहा ?

सवाल- उत्तराखंड में जिस तरह से हरीश रावत सरकार की वापसी हुई है उसे आप किस तरह से देखती हैं ?

जवाब- हमारा जो संविधान है वो जिस तरह से प्राविधानित करता है कि सदन चलना चाहिए और जिस तरह से कानून को तोड़ मरोड़कर अव्यवस्था बनाई गई है, उसके विरोध में केंद्र सरकार ने जो निर्णय लिए है, वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है।

देखना दिलचस्प होगा कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे घोषित होने के बाद किसे समर्थन की जरूरत होती है और किसे नहीं। और उस वक्त कौन किसका साथ देता है। हां इसके लिए सियासत ने अपने हिसाब से अभी से प्यादे प्रभावी खेमों में सेट करने शुरू कर दिए हैं। आगे पढ़ें- यूपी के कन्हैया कुमार बने भाजपा वाले

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