देवभूमि उत्तराखण्ड के विकास की ओर केंद्र का एक और कदम, जल्द पूरी होगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन
उत्तराखंड, भारत का वो राज्य जहां के हवाओं में भक्ति-भाव प्रवाहित है। देश के कोने-कोने से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखंड पहुंचते हैं। पवित्र नदियाँ और अनेक पावन जलधाराएं यहां के पवित्र स्थलों की शिराओं के समान हैं। हरिद्वार के मैदानी भूभाग से लेकर बद्रीनाथ, केदारनाथ और पंच प्रयाग समेत अनेक पावन तीर्थ स्थल यहां की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित हैं।
उत्तराखंड के कुछ दुर्गम तीर्थ स्थलों तक की यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत यहां की है। इन परियोजनाओं में कई पहाड़ी जिलों को रेल मार्ग से जोड़ना शामिल है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन इसी परियोजना का हिस्सा है। इस के ऊपर काम भी शुरु कर दिया गया है।
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ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक इस रेलमार्ग की कुल लंबाई 125.20 किमी होगी। इसे बनाने में लगभग 16,200 करोड़ रुपये तक का खर्चा आने का अनुमान लगाया गया है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन परियोजना के पूरा हो जाने पर ये उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ तक की यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए सुगम और आरामदायक बना देगा।
125.20 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस रेलमार्ग में 17 सुरंगें और 35 पुल शामिल होंगे। लक्षमोली से मलेथा के बीच हाल ही में बनकर तैयार हुई 3 किमी लंबी सुरंग भी इस यात्रा का रोमांच बढ़ाएंगे। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच कुल 12 रेलवे स्टेशन होंगे। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से इस रेल-मार्ग के आस-पास के क्षेत्रों को बेहतर आवा-गमन सुविधा मिल पाएगी।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार की तत्परता के साथ-साथ लोगों का उत्साह भी देखने लायक है। उत्तराखंड में रेल-तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में भी तेज़ी से कार्य किया हो रहा है। इस क्रम में दिल्ली से देहरादून के बीच वंदे भाारत ट्रेन का संचालन भी शामिल है, जिसने इन दोनों शहरों के बीच की दूरी को कम कर दिया है। अब दिल्ली से देहरादून की यात्रा महज 6 घंटों में तय की जा सकती है।
योग नगरी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले ऋषिकेश में भी रेल-परिवहन और पर्यटन के लिहाज से बड़े कदम उठाए गए हैं। ऋषिकेश के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच एक नए, भव्य और बेहद खूबसूरत रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया है। इसका नाम योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन दिया गया है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत हरिद्वार बाईपास पर निर्मित यह रेलवे स्टेशन चारधाम रेल परियोजना का पहला स्टेशन भी है।
करीब 250 करोड़ की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन की सुंदरता देखते ही बनती है। केंद्र सरकार की इस परियोजना से तीर्थयात्रा के साथ-साथ औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही साथ उत्तराखंड के 11 रेलवे स्टेशनों की भी पहचान की गई है, जिन्हें अमृत भारत योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार विकसित करेगी। ये तमाम प्रयास उत्तराखंड की प्रगति का एक नया अध्याय और एक नए युग की शुरुआत की ओर पहला कदम है।
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