UP Lok Sabha Chunav: मायावती ने भतीजे को 'आकाश' तक उठाकर क्यों कर दिया पैदल, किस दबाव में है बसपा?

Uttar Pradesh Lok Sabha Election: बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार रात को अपने भतीजे आकाश आनंद को अचानक दोनों बड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया। बीएसपी चीफ के मुताबिक यह फैसला आकाश में पूर्ण परिपक्वता (maturity) आने तक के लिए है। मायावती ने जो ऐलान किया है, वह समय के हिसाब से बहुत ही अहम है।

लंदन में शिक्षा लेकर भारत आए आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उनपर यूपी के सीतापुर और उन्नाव की चुनावी रैलियों में 'असंसदीय भाषा' के इस्तेमाल के आरोप हैं और आचार संहित के उल्लंघन के लिए इससे संबंधित धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

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पार्टी और मूवमेन्ट के व्यापक हित में हटा रही- मायावती
मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से मुक्त करने की घोषणा करते हुए लिखा है, 'अन्य लोगों को आगे बढ़ाने के साथ ही, आकाश आनन्द को नेशनल कोओर्डिनेटर व अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, किन्तु पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित में पूर्ण परिपक्वता (maturity) आने तक अभी उन्हें इन दोनों अहम जिम्मेदारियों से अलग किया जा रहा है।'

सियासी जोखिमों के बावजूद बसपा का बड़ा कदम
आकाश को मायावती ने पिछले साल ही अपना उत्तराधिकारी बनाया था। लेकिन, राष्ट्रीय संयोजक के पद के साथ-साथ बसपा अध्यक्ष ने जिस तरह से अपनी सियासी विरासत के दायित्व से भी उन्हें पैदल किया है, इससे लगता है कि लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी को उनकी वजह से कोई चोट गहरी लगी है। क्योंकि, चार चरण के चुनावों से पहले इस तरह के ऐक्शन से कैडर और समर्थकों का मनोबल गिरने का भी जोखिम है।

आकाश आनंद पर हेट स्पीच के तहत दर्ज हुआ है केस
आकाश आनंद के खिलाफ यूपी पुलिस ने 28 अप्रैल को सीतापुर और उन्नाव में 'असंसदीय भाषा' के उपयोग के लिए हेट स्पीच के आरोपों में मामला दर्ज किया है। उनपर आरोप है कि उन्होंने बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार के लिए 'आतंकवादियों की सरकार', 'तबाही की सरकार' और 'तालिबान की सरकार' जैसी भाषा का इस्तेमाल किया है।

इस लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद ने नगीना से 6 अप्रैल को चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। वह पश्चिमी यूपी में 10 और पूर्वांचल में 8 रैलियों को संबोधित कर चुके थे। यूपी में बाद की रैलियों में वह कुछ ज्यादा ही आक्रामक होते चले गए। वह अपने समर्थकों को भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने के लिए उकसाने की हद तक जाने लगे थे।

निजी कारणों से पहले ही रद्दा की जा चुकी थीं रैलियां
केस होने के बाद ही पार्टी ने उनकी प्रस्तावित रैलियां रद्द कर दीं और इसका कारण परिवार में किसी का बीमार होना बता दिया गया था। इससे पहले वह मीडिया को दबाकर इंटरव्यू भी देने लगे थे और सपा, कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के खिलाफ बहुत ही आक्रामक अंदाज में नजर आ रहे थे।

भतीजे को किसी बड़े संकट से बचाने के लिए हटाया?
हालांकि, आकाश के भाषणों की वजह से उनकी सभाओं में भीड़ बढ़ रही थी और समर्थकों में उत्साह दिख रहा था। लेकिन, राजनीतिक के कुछ जानकारों का मानना है कि पार्टी सुप्रीमो नहीं चाहती थीं कि करियर की शुरुआत में ही भतीजा किसी बड़े संकट में फंस जाए। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी का जनाधार तेजी से खिसका है। इसलिए उन्होंने उन्हें अभी के लिए पीछे खींच लिया है।

क्योंकि, मायावती ने न सिर्फ उनके पिता की जिम्मेदारियां कायम रखी हैं, बल्कि यह भी कहा है कि बीएसपी का नेतृत्व, 'कारवां को आगे बढ़ाने में हर प्रकार का त्याग व कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटने वाला है।'

बीजेपी की वजह से हटाया?
लेकिन, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि वह बीजेपी पर जिस तरह से आक्रामक होने लगे थे, उससे बसपा सुप्रीमो परेशान हो गई थीं। क्योंकि, सत्ताधारी दल से अपने रिश्ते बिगाड़ने में उन्हें कोई भलाई नजर नहीं आती।

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