अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मुस्लिमों के साथ हो रहा है भेदभाव
नई दिल्ली। लगातार तीसरे वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग (USCIRF) ने अमेरिकी विदेश विभाग से भारत को "विशेष चिंता वाले देश" की श्रेणी में रखने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में काफी जोर देकर कहा गया है कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव होता है और हिंदू राष्ट्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट में भीम कोरेगांव हिंसा के आरोपी का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा त्रिपुरा हिंसा और पत्रकारों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र है।
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रिपोर्ट में सीएए कानून को भेदभाव वाला बताया गया है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि भारत में कोरोना काल के दौरान मुस्लिमों के साथ भेदभाव हुआ है। रिपोर्ट में भारत उन 15 देशों में शामिल है जिन्हें संदिग्ध सम्मान दिया गया है। इस श्रेणी के तहत अन्य देश अफगानिस्तान, बर्मा, चीन, इरिट्रिया, ईरान, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और वियतनाम हैं।
विशेष रूप से भारत पर, रिपोर्ट में कहा गया है साल 2021 में, भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति काफी खराब हो गई। इस वर्ष के दौरान, भारत सरकार ने नीतियों के प्रचार और प्रवर्तन को बढ़ाया। इसमें हिंदू-राष्ट्रवादी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले भी शामिल हैं, जो मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।
USCIRF ने अपनी रिपोर्ट में किसान आंदोलन का भी जिक्र करते हुए बड़ा आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक देशव्यापी आंदोलन में शामिल हुए सिखों को 'आतंकवादी' बताया गया। धर्मांतरण का ही जिक्र करते हुए USCIRF की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी नाम लिया गया है। कहा गया है कि पिछले साल जून में सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन लोगों के खिलाफ NSA लगाने की बात कही थी जो धर्मांतरण मामले में दोषी पाए जाएंगे।












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